# Why Are Toppers UNEMPLOYED?! | Warikoo Careers Hindi

## Метаданные

- **Канал:** warikoo careers
- **YouTube:** https://www.youtube.com/watch?v=V81QUCiSgAg
- **Дата:** 08.05.2026
- **Длительность:** 14:57
- **Просмотры:** 103,522
- **Источник:** https://ekstraktznaniy.ru/video/50283

## Описание

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I spoke to 50 graduates who were the "stars" of their schools and colleges. 98% in boards, JEE cleared, toppers in Eco Hons, NEET rankers. They did everything the system asked them to do. They followed every rule. And yet, they are unemployed.

They didn't do anything wrong. The game just changed, and nobody told them. The "Topper Tag" has become a trap. Being a topper used to be the finish line. In 2026, it’s barely the starting point. This is a wake-up call for every student and parent who thinks a "Tag" will secure their life.

#TopperParadox #CareerAdvice #warikooCareers

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## Транскрипт

### Segment 1 (00:00 - 05:00) []

कुछ हफ्ते पहले इस चैनल के लिए मैंने कुछ ऐसा किया जो मैंने पहले कभी नहीं किया था। 50 ग्रेजुएट्स से बात करी जो अभी भी अनइंप्लॉयड हैं। उन्होंने सब कुछ सही किया था। लेकिन सिस्टम ने उनको हरा दिया। सिस्टम फेल्ड देम, डिसपॉइंटेड देम, क्रश्ड देम। और जब मैं वो वीडियो बना रहा था, उनसे बातें कर रहा था, मेरे दिमाग में बस एक ही चीज चल रही थी कि यार कहीं उस वीडियो को बनाते मैं जेन्युइनली हिल गया। क्योंकि मेरे पास इतना कोई जवाब नहीं था। जब वो पूछते थे कि अंकुर सर एक चीज बता दीजिए जो हमने गलत करी मुझे नहीं पता था उन्होंने क्या गलत किया जेन्युइनली नहीं हां वो साधारण एवरेज स्टूडेंट्स थे सो आई वुडंट से दैट दे वर टॉपर्स एनीथिंग लाइक दैट लेकिन यार एवरेज स्टूडेंट होना कोई गलत बात थोड़ी है कोई गाली थोड़ी है। ऐसा थोड़ी है कि यार आपके अगर 80% आए और 99% नहीं आया तो आप बर्बाद हैं। आप फिजूल हैं। आपकी जिंदगी का कुछ मायना ही नहीं है। नहीं। सो आफ्टर दैट वीडियो आई थॉट यार मैंने अनइंप्लॉयड ग्रेजुएट से बात करी जिनके लिए यह सिस्टम नहीं चल पाया। चलो टॉपर से भी बात करते हैं। जिनके 95% आए थे, 97% आए थे, जिनके जेई क्लियर हो गया ये सब तो इस वीडियो में वही बात करेंगे। मैंने 50 टॉपरों से बात करी। टॉपरों टॉपर्स से बात करी फ्रॉम 2020 तो करीब पांच छ साल पुराने। एंड आई वांटेड टू फिगर आउट व्हाट वाज़ दे डूइंग? डड द दिस सिस्टम वर्क फॉर देम एंड व्हाट कैन वी लर्न फ्रॉम दैट। अर्जुन की कहानी 24 साल गए अर्जुन। लखनऊ से जेई क्लियर किया था। एक टॉप 15 इंजीनियरिंग कॉलेज में घुसा जो बहुत अच्छा है। कंप्यूटर साइंस कॉलेज में 8. 2 सीजीपीए बहुत बढ़िया। समर इंटर्नशिप एक स्टार्टअप के साथ डीएसए लीड कोड सब किया लड़के ने। दिसंबर 2024 में ग्रेजुएट होने वाला था। कोई ऑफर नहीं। एंड जब मैं बात कर रहा था तो वो यही बोला था कि अंकुर सर मैंने एक पार्टी अटेंड करी थी चार सालों में। एक पार्टी जो मेरी फ्रेशर्स पार्टी थी। मैंने अपनी ग्रेजुएशन पार्टी तक अटेंड नहीं करी। प्लेसमेंट की तैयारी करता रहा क्योंकि मेरी अभी तक जॉब नहीं लगी थी। मैं किस मुंह से वह पार्टी भी करता। मां-बाप को क्या बोलता। मुझे नहीं पता मैंने क्या गलत किया है। मैं स्कूल का टॉपर था। कॉलेज में अच्छे से घुस गया। वहां भी अच्छा सा टॉपर था। नथिंग वर्क्ड आउट। एंड आई डिड नॉट टू टेल हिम। वही अनइंप्लॉयड जैसा ही सर कर रहा था। वही लग रहा था कि यार मैं किसी अंकुर से बात कर रहा हूं। जो टॉपर तो बहुत दूर की बात मिडिल में कहीं था। उसको तो शायद मैं कुछ बोल भी सकता था कि भाई टॉपर बन जाता तो हो जाता। यह तो टॉपर ही है। सच यह था कि जिस दुनिया की वो तैयारी कर रहा था ना वो दुनिया ही हट गई थी। उनको लग रहा था कि वही वो मशीनरी जो चल रही थी पिछले 2030 साल से कि भाई आईटी सर्विज कंपनीज आती हैं। धोखे भाव लोगों को ले जाती हैं। 3 चार 5 लाख की नौकरी शुरू होती है। अच्छे से आप काम करते रहो शिद्दत से बहुत लगन से तो 10 20 साल में आप अच्छे से 50 60 70 लाख कमा रहे होंगे। आप वीपी बन जाएंगे। आपको यूएस, जर्मनी, यूके वगैरह भेजा जाएगा। शायद आप वहीं सेटल हो जाएंगे। लाइफ सेट है बट वो दुनिया बदल चुकी थी। तो अर्जुन एक ऐसी गेम खेल रहा था जिस गेम के रूल्स बदल गए थे लेकिन वो तब भी पुराने रूल्स के साथ ही खेलता रहा। काव्या 2020 में नीट की वन ऑफ द टॉपर्स। नाम असली नहीं है क्योंकि नहीं बताना चाहता। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में घुसी। 2025 में एमबीबीएस कंप्लीट किया। उसके बाद नेचुरल था पीजी करना है। एंड ऐसा लगा कि एक दीवार खड़ी हो गई काव्या के सामने। पीजी की दीवार नीट पीजी के लिए बैठी वो स्पेशलाइजेशन नहीं मिला जो होना चाहिए था फिर से बैठी उतने नंबर नहीं आए जिससे स्पेशलाइजेशन मिल सकती थी अरमान था रेडियोलॉजी करने का नंबर इतने थे कि प्राइवेट कॉलेज में बायोकेमिस्ट्री मिल रही थी तो आज 25 साल की उम्र में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर है एक एमबीबीएस डॉक्टर विदाउट अ पीजी ₹400 महीना कमा रही है। क्यों? क्योंकि वो नीट पीजी की प्राइवेट कॉलेज एजुकेशन अफोर्ड नहीं कर सकती थी। काव्या और बहुत सारे एमबीबीएस ग्रेजुएट्स को शायद यह नहीं पता है कि हमारे देश में करीब सवा लाख एमबीबीएस ग्रेजुएट्स निकलते हैं हर साल और पीजी की सीटें हैं 85000 उसमें से भी बहुत ही कम गवर्नमेंट कॉलेजेस हैं एंड मोस्टली प्राइवेट जो बेइंतहा है ये तो पहले टाइम था जब एमबीबीएस करना काफी था अब नहीं है तब पीजी करना ही पड़ता है लेकिन पीजी करने के लिए अगर बार ही इतना रेज हो गया है क्योंकि सिलेक्शन क्राइटेरिया फॉर गवर्नमेंट कॉलेजेस सुपर स्ट्रिक्ट प्राइवेट कॉलेजेस आर आउट ऑफ रीच देन एसेंशियली आप लोगों को यह बोल रहे हैं कि आप डॉक्टर तो बन गए हो लेकिन उससे ज्यादा बढ़ने की आपकी ना हैसियत है ना औकात है तो यहीं रहिए आप ₹00 महीने पे नेहा की कहानी पटना से है 27 साल की है बीकॉम ग्रेजुएट है साथ ही साथ सीए शुरू कर दिया तीसरे अटेम्प्ट में ही फाउंडेशन क्लियर आर्टिकल शिप डन सीए फाइनल पहला अटेम्प्ट नहीं हुआ दूसरा अटेम्प्ट नहीं हुआ 27 साल की है अभी पांच से छ साल हो चुके हैं इस सीए की पाइपलाइन में उनको अभी तक कोई क्वालिफिकेशन नहीं है कोई जॉब नहीं है। कोई सैलरी नहीं है। उन्होंने यह बताया कि उनके भाई ने कॉलेज स्किप करके एक मोबाइल फोन टेक्नशियन का रोल किया था। वो ₹25,000 महीना कमा रहा है। नेहा जैसे

### Segment 2 (05:00 - 10:00) [5:00]

बहुत सारे सीए एस्पिरेंट्स को शायद यह नहीं बताया गया कि सीए फाइनल का पास रेट 9 से 10% है। लेकिन फाउंडेशन से फाइनल का रफली 3 से 4% मतलब 100 लोग फाउंडेशन शुरू करते हैं और तीन से चार ही सीए बन पाते हैं। बहुत लुकटिव प्रोफेशन है। मना नहीं कर रहा हूं। सीए बन गए तो लाइफ वाकई में सेट है। लेकिन सीए बनने के लिए जो जर्नी लेनी पड़ती है उसके लिए लोग तैयार नहीं होते हैं। क्योंकि हर साल लगता है अरे इतनी पास आ गए तो वो चलता रहता है। एंड ये ना मैंने अक्सर देखा है कि वो एग्जाम जिनका सिलेक्शन रेट बहुत कम होता है। लेकिन अनलिमिटेड चांसेस मिलते हैं ना वो सबसे बड़े ट्रैप बन जाते हैं। अनलिमिटेड चांसेस भी नहीं। अगर बहुत सारे भी चांस मिलेंगे ना तो ऐसा लगता है कि लेते रहो यार लेते रहो क्योंकि इतने पास आ गए आरव की कहानी 2020 में सीएलएटी क्लियर कर लिया टियर वन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला पांच साल का बीए एलएलबी खत्म किया 2025 में ग्रेजुएट हुआ मां-बाप को लगा भाई एनएलयू में है 20 लाख की नौकरी तो पक्की आज वो नोएडा में एक लॉयर के चेंबर में ₹35000 की महीने की नौकरी कर रहा है और उन्होंने बोला कि सर मुझे यह तो पता था कि नलसार से यह बोर, एनएलयू से इन सारी जगहों से तो बहुत बढ़िया-बढ़ प्लेसमेंट्स निकल जाती हैं। लेकिन टॉप फाइव लॉ कॉलेजेस के बाद तो जैसे अकाल ही पड़ जाता है। क्योंकि बाहर से तो मुझे लगता था कि हर एक टिए वन, टिए टू, एनएलयू भी सेम है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज है। लेकिन सच ये नहीं है। उनको शायद ये नहीं पता था कि भारत में 24 एनएलयूस है। टॉप के चार पांच में मीडियन सैलरी 18 से 20 लाख है। लेकिन जैसे ही आप टिए टू एनएलयू में आते हैं वो 6. 5 लाख हो जाती है। तो आपको एनएलयू का टैग तो मिल गया लेकिन वो टियर्ड सिस्टम आपके अगेंस्ट है। और वो टॉपर जो ये हैरार्की समझता नहीं है वो अनफॉर्चूनेटली पीछे रह जाता है। आखिरी पैटर्न एंड ये तो इस देश का ही पैटर्न है। रजत की कहानी इंग्लिश ऑनर्स टॉपर 2020 दिल्ली यूनिवर्सिटी नॉर्थ कैंपस। कॉलेज का नाम नहीं बताऊंगा क्योंकि इनका असली नाम है। राजेंद्र नगर में पीजी लेते हैं। यूपीएससी की तैयारी शुरू करते हैं। प्रीलिम दो बार क्लियर हो जाता है। मेंस एक इंटरव्यू स्टेज तक भी एक बार पहुंच जाते हैं लेकिन वो क्लियर नहीं हो पाता। 27 साल के हो चुके हैं। एक अटेम्प्ट बचा है। आखिरी मां-बाप ने ₹8 लाख खर्च कर दिए हैं कोचिंग में पीजी के रेंट पे। इससे उससे जिंदगी में एक भी बार नौकरी नहीं करी है। इंग्लिश ऑनर्स बहुत ही बढ़िया कॉलेज के टॉपर रहे हैं। 27 साल होने को आ रहे हैं। रे्यूे पे एक भी महीने का एक्सपीरियंस नहीं है। अगर यह लास्ट अटेम्प्ट क्लियर नहीं होता। रजत को कोई आईडिया नहीं है कि वो जिंदगी में क्या करेंगे। 14 से 15 लाख लोग यूपीएससी हर साल देते हैं तो रजिस्टर करते हैं। उसमें से 7 से 8 लाख देते हैं। फाइनल सिलेक्शन 2026 में 933 सीटों का था। सिलेक्शन रेट ऑफ 1% एवरेज सक्सेसफुल कैंडिडेट करीब 27 साल का है। एवरेज 3. 5 अटेम्प्ट्स के बाद। सर्वे किया गया। 63% यूपीएससी कैंडिडेट्स ने बोला कि उनकी मेंटल हेल्थ वेरी पुअर से पुअर में है। मुझे तो बस यही सीख दिख रही थी कि यूपीएससी एक करियर प्लान नहीं है। एक लॉटरी है। अगर आप 7 8 लाख लोग जो एग्जाम के लिए बैठे हैं उनमें से 1000 सीटों के लिए लड़ रहे हैं। वो इंसान जो 1100 नंबर लेके या 1100 रैंक लेके आया है। वो गधा तो नहीं है ना। वो इस देश के 1100 टॉप माइंड्स सिंग फॉर यूपीएससी एग्जाम में से एक है। लेकिन वो आईएएस अफसर या यूपीएससी में क्लियर नहीं हो पाएगा। लॉटरी लग रही है। मैं ये नहीं बोलता हूं कि बढ़िया करियर नहीं है। बहुत ही बढ़िया करियर है। अगर हो गया तो जेनुइनली लाइफ सेट है। लेकिन आप अपनी जिंदगी के चार पांच छ साल इस सट्टे पे तो नहीं लगा सकते ना दोस्त। किसी पॉइंट पे तो आपको रुकना ही पड़ेगा। अपने आपको बोलना पड़ेगा कि नहीं यार जितना फाइट मार सकते थे मारी पूरे लगन से मारी पूरे जोरों शोरों से मारी नहीं हुआ तो नहीं हुआ आगे बढ़ो जिंदगी बहुत लंबी है एक और कहानी की याद आ गई अंजलि 12th में 98% आए थे अंजली के दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉप कॉलेज में ईर्स कर रही है 204 में ग्रेजुएट हो गई और उस समय पे उनके कैंपस में मार्केट रिसर्च एसोसिएट की नौकरियां आई भरभर के ₹22 महीना डाटा एनालिस्ट ट्रेनी की नौकरी आई ₹25000 महीना उन्होंने बोला 98 98% के बाद इको ऑनर्स के बाद इस कॉलेज के बाद मैं ये नौकरी नहीं एक्सेप्ट करूंगी। एंड यू नो व्हाट अगर उस पॉइंट पे मैं उनकी ये बात सुनता मैं बोलता गुड फॉर यू अंजली अपनी औकात से नीचे कोई भी चीज एक्सेप्ट मत करो। यू डिर्व मोर यार 12वीं में 98% आए हैं। एक बहुत ही बढ़िया कॉलेज जिसका नाम नहीं लूंगा। बहुत ही बढ़िया कॉलेज से इको ऑनर्स कर रही हो यार। 22,000 की नौकरी थोड़ी लोगी लेकिन मैं गलत होता हूं। व्हेन शी स्पोक टू मी, वह 1 साल से नौकरी ढूंढ रही है और उसको 300 से ऊपर की कोई नौकरी नहीं मिली है। घर पे बैठी हुई है। कंटेंट क्रिएशन के बारे में सोच रही थी। और यह ना बहुत इंटरेस्टिंग पैराडॉक्स है इंडिया में कि ग्रेजुएट्स की

### Segment 3 (10:00 - 14:00) [10:00]

अनइंप्लॉयमेंटी रेट बहुत ज्यादा है। क्यों? क्योंकि वो वाकई में फाइट मारते हैं। आपने चार साल इंजीनियरिंग कर ली, पांच साल बीए एलएलबी कर लिया, तीन साल आपने ई ऑनर्स कर ली, बीकॉम ऑनर्स कर लिया, बीएससी कर लिया, जो भी कर लिया। एंड यू आर लाइक यार मेहनत करी है। इन जगहों पे आसानी से नहीं पहुंचे हैं। आई एम नॉट गोइंग एक्सेप्ट अ ₹25,000 जॉब। आई डिर्व मोर। तो आप 35 40 45 5000 नौकरी की तलाश में निकल जाते हैं। वेट करते रहते हैं। वो नौकरी कभी आती नहीं है। एंड आप बेरोजगार हैं। व्हिच इज सो शॉकिंग बट द रियलिटी कि 30% नियरली 30% ऑफ इंडियास ग्रेजुएट्स आर अनइंप्लॉयड बिकॉज़ दे फील दे डिर्व मोर। एंड आई वुड से यस दे डिर्व मोर। जॉब्स ही नहीं है। तो ये जो सारी कहानियां थी ना अब तो मैंने कुछ भी शेयर करी है। 50 लोगों से बात करी। कॉमन चीजें यही थी कि यार सब स्मार्ट थे। सब मेहनती थे। ऐसा नहीं था कि किस्मत खराब थी। वो आईआईटी घुसे, आईएम घुस गए, बढ़िया से नेशनल यूनिवर्सिटीज में घुस गए, मुश्किल-मुश्किल एग्जाम क्लियर कर लिए। सब कुछ किया। मुझे जेनुइनली ये लगा एंड मेरे लिए बहुत आसान है ये बोलना। बाय द वे। द थिंग दैट हर्ड देम। वाज़ द थिंकिंग, वो सोच कि यार यह टैग मिल चुका है। अब यह टैग हमारे लिए काम कर जाएगा। वह एसआरसीसी का टैग, वह आईआईटी का टैग, वह टॉपर का टैग, वह यह टैग, वह वो टैग, यह ठप्पा लग चुका है। अब लाइफ सेट है पर लाइफ सेट नहीं है। अगर आप एक टॉपर हैं, प्लीज समझिए कि आपके ड्रीम कॉलेज में घुसना आपकी जीत नहीं, आपकी शुरुआत है। अगर आपका आईआईटी में हो जाए और भगवान करे हो जाए। अगर आपका आईएम्स में हो जाए, आप नीट यूजी क्लियर कर लें, आप एनएलयू चले जाएं। आप सबसे बड़ी आर्किटेक्चर कॉलेज, डिजाइन कॉलेज, कॉमर्स कॉलेज जहां भी जाना चाहते हैं जाएं। भगवान करे आपका हो जाए। प्लीज रिमाइंड योरसेल्फ। वो अंत नहीं है दोस्त। शुरुआत है। एंड इसका मतलब यह भी है कि अगर वहां खुदा ना खास्ता आपका नहीं हो पाया तो वो भी अंत नहीं है। एक नई शुरुआत है। यू आर नॉट गोइंग टू लेट योर कॉलेज डिफाइन योर लाइफ। बोथ फॉर द गुड एंड फॉर द नॉट फॉर गुड। आपका कॉलेज सिर्फ एक जरिया है। जहां अगर आप बहुत अच्छे लोगों से मिले आप जिंदगी में अच्छा कुछ सीखेंगे। अगर आपने इंटर्नशिप्स करी उस कॉलेज की ओपोरर्चुनिटीज जो आपको मिलती है उसका सबसे बेस्ट यूज़ किया। यू विल सेट योरसेल्फ अप फॉर लाइफ। लेकिन उस कॉलेज के थ्रू अपनी जिंदगी खुद बनानी है दोस्त। उसकी प्लेसमेंट एजेंसी आपकी जिंदगी नहीं बनाएगी। वो प्लेसमेंट कमेटी आपके मां-बाप के लोन को नहीं चुकाएगी। आपको खुद वो मेहनत करनी होगी। क्योंकि एक टॉपर बनना आपकी जिंदगी सिक्योर नहीं करता है। आज किसी कंपनी को फर्क नहीं पड़ता कि आप टॉपर हैं। वह सिर्फ यह पूछते हैं कर क्या सकते हो? पहले दिन जब ऑफिस जॉइन करोगे, लैपटॉप ऑन करोगे क्या? क्या हमें बताना पड़ेगा कि तुम्हें क्या करना है? या तुम्हें खुद पता है कि मैं क्या करना है? क्या वाकई में जिंदगी में कुछ किया है? पसीने का स्वाद चखा है? कभी किसी को कुछ बेचा है? कभी कुछ बनाया है? कभी पैसे कमाए हैं? कभी पता भी चला है कि प्राइसिंग क्या होती है? मार्केटिंग क्या होती है? सेल्स क्या होती है? कोडिंग क्या होती है? अकाउंट शीट कैसे बनती है? कभी वाकई में किसी बिजनेस के फाइनशियल डॉक्यूमेंट्स देखे हैं? कभी वाकई में किसी कैट ड्राइंग को इन एक्चुअल रियलिटी प्रोडक्ट बनाया है? अगर नहीं तो घंटा क्लासरूम में बैठ के तुम टॉपर बने हो। किसी को फर्क नहीं पड़ता। यह दुनिया दोस्तों करने वालों की है। अव्वल नंबर लाने वालों की नहीं। एंड जो अव्वल नंबर वाला जिंदगी में आगे बढ़ता है ना वो इसलिए बढ़ता है क्योंकि वो अव्वल नंबर लाने के बावजूद करता रहता है। रुकता नहीं है। एंड दैट इज व्हाट आई लर्न फ्रॉम ऑल ऑफ दिस टॉपर्स। एट सम पॉइंट ऑफ टाइम दे बिलीव्ड देम बीइंग अ टॉपर वास इनफ फॉर देम टू विन एट लाइफ ये है अंकुरिको का ऑफिशियल YouTube करियर्स चैनल और मैं हूं अंकुर वारिक साइनिंग ऑफ आई एम सुपर थिं टू अनाउंस माय न्यू लेटेस्ट प्रोजेक्ट इंडिया जीनियस चैलेंज ये एक नेशन वाइड हंट है भारत के ब्राइटेस्ट यंग स्टूडेंट्स का एज बिटवीन 13 टू 15 इयर्स एक ऑनलाइन राउंड फॉललोड बाय द नेशनल फाइनल दैट विल हैपन इन दिल्ली जहां सबसे ब्राइटेस्ट स्टूडेंट्स को मिलेगी ₹1 लाख की स्कॉलरशिप। ऑनलाइन राउंड्स में डेली, वीकली मंथली विनर्स अनाउंस होंगे। उनको मिलेंगे iPhonस, आईपैड्स, PS5, बुक्स, ट्रॉफीज़, सर्टिफिकेट्स एंड अ लॉट मोर। ऑल लीडिंग टू द नेशनल फाइनल्स हैपनिंग इन दिल्ली। प्लीज अगर आप किसी 13 से 15 साल के बच्चे को जानते हैं, आपके परिवार में कोई है या आप खुद वो हैं देन लॉग ऑन टू इंडिया जीनियस चैलेंज. com एंड स्टार्ट प्लेइंग द चैलेंज।
