# DO YOU REALLY HAVE TWO BRAINS?!

## Метаданные

- **Канал:** Dr Ashish Desai
- **YouTube:** https://www.youtube.com/watch?v=yVRZD70lDgk
- **Дата:** 05.05.2026
- **Длительность:** 4:53
- **Просмотры:** 2,592
- **Источник:** https://ekstraktznaniy.ru/video/50447

## Описание

Are creative people really “right-brained”? Are logical thinkers naturally “left-brained”?

Most of us have heard this idea our entire lives—that the left side of the brain controls logic, math, and analysis, while the right side controls creativity, art, and intuition.

But what if modern neuroscience says that’s mostly a myth?

In this video, a neurosurgeon explains one of the most fascinating discoveries in brain science: The Split Brain Experiment.

This incredible story begins with a structure deep inside your brain called the corpus callosum—a neural bridge made of nearly 200–250 million nerve fibers that connects the left and right hemispheres of the brain.

For patients suffering from severe epilepsy, surgeons once performed a rare operation that involved cutting this connection to stop seizures from spreading across the brain.

What scientists discovered afterward completely changed our understanding of the human mind.

Researchers like Roger Sperry and Michael Gazzaniga ran g

## Транскрипт

### Segment 1 (00:00 - 04:00) []

आपने यह बात बहुत बार सुनी होगी। शायद आपने कभी खुद भी बोला होगा ओह मैं यह काम नहीं कर सकता। मैं तो बस लेफ्ट ब्रेन हूं। [संगीत] या फिर अगर आप थोड़े आर्टिस्टिक हो तो आप प्राउडली बोल देते हो मैं राइट ब्रेन हूं। ये आईडिया [संगीत] ऑलमोस्ट हर जगह मिलता है। लेफ्ट ब्रेन मतलब लॉजिकल और एनालिटिकल पर्सन और राइट ब्रेन मतलब क्रिएटिव और इंट्यूसिव पर्सन। [संगीत] बहुत सिंपल सा लेवल बना दिया है। लेकिन आज मैं आपको बोलने वाला हूं कि यह पूरा कांसेप्ट एक मिथ है, एक मिसअंडरस्टैंडिंग है। और इसका रियल स्टोरी और भी ज्यादा शॉकिंग है। इसमें एक ऐसी सर्जरी का रोल है जो डिकेड्स पहले की गई थी जिसमें लोगों के ब्रेन को लिटरली दो पार्ट्स [संगीत] में स्प्लिट कर दिया गया था। और इस एक्सपेरिमेंट ने ह्यूमन माइंड के बारे में एक बहुत बड़ा सीक्रेट रिवील किया। द टेल ऑफ [संगीत] टू हेमिस्फयर्स। इसको समझने के लिए हमें एक ब्रिज के बारे में बात करनी होगी जो आपके ब्रेन के अंदर होता है। ब्रेन के राइट और लेफ्ट हेमिस्फयर को कनेक्ट करने वाला एक [संगीत] सुपर हाईवे होता है जिसमें अराउंड 200 से 250 मिलियन नर्व फाइबर्स होते हैं जिसको कॉर्पस कैलोजम बोला जाता है। यह ब्रिज [संगीत] दोनों साइड्स को कास्टेंटली कनेक्ट करते रहता है। जिससे आपको दुनिया का एक सिंगल [संगीत] स्मूथ एक्सपीरियंस मिले। आपको कभी फील ही नहीं होता कि आपके पास दो अलग ब्रेन है। क्योंकि यह ब्रिज उन दोनों को एक साथ [संगीत] काम करवाता है। 1940 में डॉक्टर्स ने एक एक्सट्रीम स्टेप लिया। कुछ पेशेंट्स को सीवियर [संगीत] एपिलेप्सी होती थी। जिनमें सीज़र्स इतने डेंजरस होते थे कि उन्हें कंट्रोल करना मुश्किल होता था। तो एज अ लास्ट रिसोर्ट सर्जन्स ने [संगीत] एक सर्जरी ट्राई की जिसमें उन्होंने कॉर्पस केजम को कट कर दिया ताकि सीज़र्स एक साइड से दूसरी साइड जा ना सके। और रिजल्ट बहुत ही सरप्राइजिंग था। सीज़र्स रुक गए और पेशेंट्स नॉर्मल लाइफ जीने लगे। वो बोल सकते थे, चल सकते थे। सब कुछ नॉर्मल था। साइंटिस्ट को समझ ही नहीं आया कि यह ब्रिज एक्चुअली करता क्या था। इस पॉइंट पर रजर्स पेरी और माइकल गैजनीिका नाम के रिस्चरर्स ने डिसाइड किया कि इसको डीपली स्टडी किया जाए। शॉकिंग सीक्रेट इज रिवील्ड। 1960 में इन साइंटिस्ट ने कुछ बहुत ही स्मार्ट एक्सपेरिमेंट डिजाइन किए स्प्लिट ब्रेन पेशेंट्स पर। [संगीत] एक इंटरेस्टिंग सेटअप यह था कि आप जो भी राइट साइड में देखते हो वो लेफ्ट ब्रेन में जाता है और जो लेफ्ट साइड में देखते हो वो राइट ब्रेन में जाता है। नॉर्मली यह इंफॉर्मेशन इंस्टेंटली दोनों साइड में शेयर होती रहती है लेकिन स्पिरिट ब्रेन पेशेंट्स में वो कनेक्शन ब्रेक हो चुका था। एक फेमस एक्सपेरिमेंट में उन्होंने पेशेंट के लेफ्ट विजुअल फील्ड में वर्ड की को फ्लैश किया। मतलब इंफॉर्मेशन डायरेक्ट राइट ब्रेन तक गई जो स्पीच कंट्रोल नहीं करता। जब पेशेंट से पूछा गया तुमने क्या देखा? तो पेशेंट ने बोला मुझे कुछ नहीं दिखा। लेकिन जब उसको लेफ्ट हैंड से ऑब्जेक्ट पिक करने को बोला तो बिना सोचे उसने की उठा ली। मतलब राइट ब्रेन को पता तो था कि की लिया है लेकिन वह बोल नहीं सकता था और लेफ्ट ब्रेन जो स्पीच कंट्रोल करता है उसको कुछ पता ही नहीं था। इस एक्सपेरिमेंट ने सबको शॉक कर दिया। जैसे लग रहा था कि एक ही हेड के अंदर दो अलग माइंड एक्सिस्ट कर रहे हैं। इस रिसर्च से यह आईडिया लगा कि कुछ फंक्शनंस ब्रेन के स्पेसिफिक साइड्स में डोमिनेट करते हैं। लेफ्ट ब्रेन लैंग्वेज और लॉजिक में स्ट्रांग होता है और राइट ब्रेन स्पेशियल और विजुअल प्रोसेसिंग में। सच में ये काफी वाइल्ड है ना? साइंस के ऐसे एक्सपेरिमेंट्स हमें अपने ही ब्रेन के बारे में कितना कुछ नया सिखाते हैं। अगर आपको ऐसे रियल साइंस के पीछे के मिथ्स और ट्रुथ्स इंटरेस्टिंग लगते हैं तो आप चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हो। हम और भी ऐसे फैसनेटिंग टॉपिक्स एक्सप्लोर करेंगे। द मिथ इज बोर्न एंड बस्टेड। यहीं से लेफ्ट ब्रेन, राइट ब्रेन वाला मिथ पॉपुलर हो गया। साइंस को सिंपलीफाई करके कैची आईडिया बना दिया गया कि या तो आप लेफ्ट ब्रेन हो या राइट ब्रेन। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि ओरिजिनल एक्सपेरिमेंट्स में यह प्रूव नहीं किया था कि लोग एक साइड से डोमिनेंट होते हैं। उन्होंने सिर्फ यह दिखाया था कि जब दोनों हेमिस्फयर्स कम्युनिकेट नहीं कर पाते तो क्या होता है। मॉडर्न न्यूरो साइंस ने इस मिथ को कंप्लीटली रिजेक्ट कर दिया है। एक बड़ी स्टडी 2013 में यूनिवर्सिटी ऑफ पूता में [संगीत] की गई जिसमें हजार से भी ज्यादा ब्रेन स्कैन्स एनालाइज किए गए। उसमें भी कोई एविडेंस नहीं मिला कि किसी पर्सन में सिर्फ लेफ्ट या राइट ब्रेन डोमिनेंट होता [संगीत] है। रियलिटी यह है कि आपकी पर्सनालिटी, आपकी क्रिएटिविटी, आपका टैलेंट यह सब किसी एक साइड पे डिपेंड नहीं करता। एक्चुअली क्रिएटिविटी जैसे कॉम्प्लेक्स काम में दोनों [संगीत] हेमिस्फयर्स मिलकर काम करते हैं। मतलब ब्रेन एक टीम वर्क से काम करता है। जैसे जब आप कोई मैथ प्रॉब्लम सॉल्व करते हो तो लॉजिक लेफ्ट ब्रेन से यूज़ होता है। लेकिन स्पेशियल अंडरस्टैंडिंग और पैटर्न रिकॉग्निशन में राइट ब्रेन इनवॉल्व होता है। इवन जैस म्यूजिशियंस के स्टडीज में देखा गया है कि जब वो इंप्रोवाइजेशन स्टार्ट करते हैं तो राइट ब्रेन एक्टिव होता है। लेकिन जैसे-जैसे वो एक्सपर्ट बनते हैं तो यह प्रोसेस लेफ्ट ब्रेन के ऑटोमेटिक सिस्टम में शिफ्ट हो जाता है। मतलब क्रिएटिविटी कोई एक जगह स्टर्ड चीज नहीं है। यह एक कंटीन्यूअस कन्वर्सेशन है ब्रेन के दोनों साइडों के बीच में। तो फाइनल आंसर क्या है? कि आप राइट ब्रेन हो या लेफ्ट ब्रेन? आंसर सिंपल है दोनों ही नहीं। आप होल्ड ब्रेन हो। यह जो आईडिया है कि आप सिर्फ लॉजिकल या सिर्फ क्रिएटिव हो सकते हो। यह एक्चुअली एक लिमिटेशन है जो हमने खुद पर लगाया है। रियलिटी तो यह है कि आपका ब्रेन एक सिंगल सिस्टम है जिसमें दोनों साइड्स कंटीन्यूअसली एक दूसरे से बात करते रहते हैं। आपकी इंटेलिजेंस, क्रिएटिविटी और ह्यूमर सब उसी कोलैबोरेशन का रिजल्ट है। तो नेक्स्ट टाइम जब कोई बोले कि मैं तो बस लेफ्ट ब्रेन हूं तो आप उन्हें यह रियल स्टोरी बता सकते हो कि कैसे साइंस ने प्रूव किया है कि हम सब एक्चुअली होल ब्रेन बीइंग्स हैं। और वही हमें ट्रूली पावरफुल और क्रिएटिव बनाता
