# बुढ़िया की आसक्ति - १० दिवस शिविर प्रवचन कथा - स. ना. गोयनका - हिंदी

## Метаданные

- **Канал:** Vipassana Meditation
- **YouTube:** https://www.youtube.com/watch?v=Acnc5TM3V7k
- **Дата:** 04.04.2026
- **Длительность:** 2:46
- **Просмотры:** 4,826
- **Источник:** https://ekstraktznaniy.ru/video/50471

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## Транскрипт

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बामनवाड़ नाम का गांव है। शिविर लगा उस गांव के तो कितने लोग आए थे। छोटा सा गांव था। आसपास के नगरों से लोग आए तो एक जरा दूर से नगर से एक बुढ़िया आ गई। शिविर लगा सब ध्यान कर रहे हैं। चौथा दिन पांचवा दिन किसी ने बुढ़िया माई को कहा या उसने सुना कि यहां धम्मा हॉल में सुबह 6:00 से 6:30 बजे कोई पाठ होता है कोई वंदना होती है। कोई मंगल मैत्री होती है। ये तो कार्यक्रम में लिखा ही नहीं। तो मैं तो जाती नहीं। तो मैनेजमेंट से पूछा मैं भी जा सकती हूं क्या? उन्होंने कहा हां जरूर जा सकती हो। लेकिन बैठ के ध्यान करना होगा। हां ध्यान ही करूंगी। चलिए आई 6:00 से 6:30 सारी मंगल मैत्री लेकर के बड़ी खुश हुई। बहुत खुश हुई। मुस्कुराते ही अपने निवास स्थान पर गई। निवास स्थान के कमरे में पहुंची चीखी जोर से बड़े जोर से रोई। लोग भागे गए। कुछ सांप ने काट लिया कि बिच्छू ने काट दिया। हो क्या गया बुढ़िया माई को? और जा के पूछे तो रोई जाए। जवाब ही ना दे क्या हुआ माई? बताओ। 10-15 मिनट के बाद जरा रोना कम हुआ तो कहती है क्या बताऊं? मैं तो लूट गई। मैं तो मर ही गई। क्या हुआ बुढ़िया माई? कहती है मेरे जीवन भर की कमाई के ₹20 एक थैली में कपड़े की थैली में उसे लेकर आई थी साथ और 60 वर्ष पहले जब मेरा विवाह हुआ था तो गौने में मुझे दहेज में एक चांदी की लड़ मिली थी कोई आभूषण मिला था वो उसमें था और आने लगी तो पड़ोसन ने एक सूखी मिठाई का टुकड़ा दे दिया वो भी उस थैली में था ध्यान करूं तो उसके पांव के नीचे दबा के ध्यान करूं रात को सोऊं तो सिरहाने रख के सोऊं अरे ये पाठ सुनने क्या चली गई मैं तो पीछे से कोई ले गया मेरा मैं तो लुट गई रे मैं तो लुट ही जाए अरे उन्होंने कहा बुढ़िया भाई तेरे ₹20 नगदावन और 20 एक का और मालमत्ता होगा सब मिला के 50 एक के होंगे तू इतना अच्छी साधना कर रही थी किए जा ना हम तुम्हारे ₹50 का प्रबंध कर देंगे तू कर ना कहां माने बुढ़िया रोए ही जाए उन्होंने सोचा इसके हाथ में जब तक रुपया नहीं धरेंगे इसका रोना नहीं मिटेगा इकट्ठा करने लगे 50 ₹100 हो गया रखा बुढ़िया के हाथ में तो यूं फेंक दिए क्या करूं इस ₹100 को मेरा जो वो आभूषण जो मुझे दहेज में मिला उसके प्रति गहरी आसक्ति है ना वो कहां उसके बिना कैसे रोई जाए कैसे समझाएं इसे वो तो गया सो गया क्या करें शाम होते-ते किसी ने देखा एक पेड़ की डाल पर एक बंदर बैठा है और उसके हाथ में वो कोथली है और वो मिठाई निकाल के खा रहा है उसमें से लोग पीछे भागे बंदर से वो कोथली छुड़वाई थैली छुड़वाई बुढ़िया के हाथ में दी उसका आभूषण हाथ में आया तो रोना बंद हुआ तो यह आभूषण ₹20 का था कि 20 लाख की संपदा थी कुछ फर्क नहीं पड़ता आसक्ति कितनी जितनी आसक्ति उतना रोना आने ही वाला है। दुनिया की [संगीत] कोई शक्ति हमें बचा नहीं सकती।
