# सही समय पर Stand लेना इसलिए है ज़रूरी | Sonal Mishra | Social Change | Inspiration| Josh Talks Hindi

## Метаданные

- **Канал:** जोश Talks
- **YouTube:** https://www.youtube.com/watch?v=7aY9MUlDrew
- **Дата:** 14.05.2026
- **Длительность:** 18:39
- **Просмотры:** 9,024

## Описание

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"क्या सहनशीलता ही एक महिला की सबसे बड़ी खूबी है? या फिर यही खामोशी उसे धीरे धीरे खत्म कर देती है? सोनल मिश्रा की यह कहानी मेरठ के एक ऐसे घर से शुरू होती है जहाँ वह एक 'अनचाही' बेटी थीं।"

इस जोश टॉक्स में मिलिए सोनल मिश्रा से, जो आज एक सफल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर हैं। सोनल की कहानी उस दिन बदल गई जब 12 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। बिना किसी बड़े भाई या पिता के साये के, उन्होंने घर और बाहर की जिम्मेदारियाँ संभालीं। लेकिन असली संघर्ष तब शुरू हुआ जब उन्होंने जिसे अपना हमसफर चुना, वही उनका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया।

7 साल तक सोनल ने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेली। डेढ़ महीने की प्रेगनेंसी के दौरान रॉड से पीटा जाना और पूरी रात खुद को बाथरूम में बंद करके मौत का इंतज़ार करना : यह वो डरावना सच है जिसे सोनल ने जिया है। लेकिन जब उनका डेढ़ साल का मासूम बेटा अपने पिता के सामने हाथ जोड़कर अपनी माँ की जान बख्शने की भीख माँगने लगा, तब सोनल की खामोशी टूटी।

इस वीडियो में आप सोनल मिश्रा से सीखेंगे:

* चुप्पी तोड़ना क्यों ज़रूरी है: जब आप सहना बंद करते हैं, तभी दुनिया आपको दबाना बंद करती है।
* शिक्षा की ताकत: कैसे एक अच्छी जॉब और एजुकेशन ने सोनल को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया।
* सिंगल मदर का संघर्ष: सुसाइडल थॉट्स से लड़कर अपने बच्चे के लिए एक रोल मॉडल कैसे बनें।
* सेल्फ वर्थ की पहचान: अपनी कमियाँ ढूँढना बंद करें और गलत के खिलाफ खड़े होने का साहस जुटाएँ।
* सफलता का स्वाद: 2022 में अपना खुद का घर खरीदना और समाज में अपनी नई पहचान बनाना।

सोनल की यह कहानी हर उस इंसान के लिए है जो किसी भी तरह के दबाव में जी रहा है। यह वीडियो आपको याद दिलाएगा कि आप अकेले नहीं हैं और आपके अंदर वो ताकत है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल को हरा सकती है।

"Being strong is not a choice when it is the only option left. Sonal Mishra, an unwanted child who grew up to be a self made woman, shares her haunting yet empowering journey."

On the Josh Talks, we bring you the raw and courageous story of Sonal Mishra. Her life has been a series of battles: from losing her father at 12 to surviving 7 years of a violent marriage. Sonal shares the chilling details of being beaten with a rod while 1.5 months pregnant and how she spent nights locked in a bathroom fearing for her life.

The turning point came when she saw her toddler son folding his hands in front of his father to save his mother. That was the day Sonal decided she would not let her son grow up in fear. Today, she is a successful Placement Head, an inspiration to thousands of students, and a proud homeowner who rebuilt her life from scratch.

Key Highlights from this Session:

* Breaking the Cycle of Abuse: Why taking a stand early is crucial for your survival.
* The Importance of Financial Independence: How her education saved her when she had nowhere to go.
* Motherhood as Motivation: Turning the love for her child into the strength to fight back.
* Empowering Others: Her mission as a Placement Officer to train girls for a better future.
* Legal and Social Victory: Finalizing her divorce and buying her own home in 2022.

Sonal’s story is a powerful reminder that your past does not define your future.

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## Содержание

### [0:00](https://www.youtube.com/watch?v=7aY9MUlDrew) Segment 1 (00:00 - 05:00)

हर मार के बाद मुझे लगता था कि कमियां मेरे अंदर है। लेकिन वो सच नहीं था। एक स्टिक रखी हुई थी, रॉड रखी हुई थी एंड ही स्टार्टेड बीटेड मी अप विथ दैट वन। उस दिन मैंने अपने आप को पूरी रात एक बाथरूम में लॉक करके रखा। मैं डर गई थी। मुझे लगा था कि आज सब यहां पर खत्म हो चुका है। कुछ दूर पे जब मैंने देखा मेरा बेटा ही वास लिटरली फोल्डिंग हिज हैंड लाइक दिस और वो रो रहा है। वो सब देख कर के मेरे दिल में एक अंदर से आवाज आई कि बस अब और नहीं। जिस साल मैं पैदा हुई थी, बेसिकली मेरे फैमिली को वेट था दैट दे वर वेटिंग कि हमारे घर लड़का होगा। मैं अपने परिवार में सबसे छोटी बेटी हूं। वी आर फोर सिस्टर्स एंड आई वाज़ द अनवांटेड चाइल्ड। मैं एक अनवांटेड चाइल्ड थी क्योंकि मेरी जगह सबको बहुत उम्मीदें थी कि लड़का होगा। तो जब मैं अपने घर में पैदा हुई तो बहुत लोग अपसेट थे इस बात से। बट स्लोली एंड स्टेडीली धीरे-धीरे मेरे को वो प्यार मिला अपने फादर से, अपने सिबलिंग से, अपनी मदर से कुछ टाइम तक सब ठीक चला। लेकिन उसके बाद जब मैं 12 साल की हुई तो सडनली मेरे साथ लाइफ ने एक ऐसा खेल किया जहां मेरे फादर की लास्ट स्टेज ऑफ कैंसर डिटेक्ट हुई और टेक्नोलॉजीस उस टाइम इतनी एडवांस नहीं थी अपने फादर को हम बचा नहीं पाए। जब मेरे फादर इस दुनिया में नहीं रहे तो वो पॉइंट हम लोगों के लिए एक ऐसा पीरियड था। वो पीरियड हमारे लिए इतना डार्क फेस था कि हम उस चीज से कोप अप करना हमारे लिए बहुत मुश्किल था। मैं और मेरी मदर एक गांव से बिलोंग करती हैं। शी वाज़ नॉट दैट एजुकेटेड। और मैं उस टाइम सिर्फ 12 साल की थी। तो मेरे लिए वो चीजें करना बहुत मुश्किल था। मतलब जो मेरा लर्निंग फेस था वहां पर मुझे रेडी किया जा रहा था कि मैं अपनी लाइफ में सब कुछ सीख कर खुद उसको आगे बढूं। तो घर के काम, बाहर के काम, बैंक के काम, अपनी पढ़ाई सब कुछ मुझे अपने आप से करना पड़ता था। थोड़े दिन बाद जब मैंने देखा कि मेरे घर के लोग ही मेरे रिलेटिव्स ही हमें मैनपुलेट कर रहे हैं रिगार्डिंग द प्रॉपर्टी अबाउट द फाइनेंशियल इशूज़ तो वो पीरियड मेरे लिए बहुत ज्यादा एक खतरनाक पीरियड था क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं किस डायरेक्शन में वहां पर जाऊं। मेरे को जिस फेस में गाइडेंस चाहिए थी अपने फादर की, अपनी मदर की मुझे वहां पर कुछ नहीं मिल पा रहा था। ऑल आई वास स्टैंडिंग अलोन और मैं एक दुनिया में फाइट कर रही थी कि मुझे एक्चुअली में करना क्या है? मैं अपने को प्रोटेक्ट कैसे कर सकती हूं? मेरी मदर का हमेशा मेरे साथ सपोर्ट रहा। बट शी हरसेल्फ वाज़ इन डिप्रेशन तो यू नो देयर वाज़ दैट लैक ऑफ इमोशनल कनेक्शन। वो इमोशनल कनेक्शन हम लोगों के बीच में उतना नहीं रहा। क्योंकि वो खुद डिप्रेस्ड थी। तो बस ऐसे करते-करते हम लोग जो है आगे बढ़े हिम्मत करके मेहनत करके बट मेरे ऊपर बहुत सारे रिस्पांसिबिलिटीज आ चुकी थी। मैं अपना घर संभाल रही थी। अपनी मदर को देख रही थी। वो ठीक भी नहीं रहती थी। तो उनको डॉक्टर के पास ले जाना सब कुछ करना। ये मैं सब कर रही थी वहां पर। मैंने अपनी स्टडीज बहुत तरह से हर तरह से यू नो बहुत एक डिप्रेशन में ए्जायटी में प्रेशर में मैंने अपनी स्टडीज को कंप्लीट करा। मैंने अपनी ग्रेजुएशन करी। फिर मैंने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन करी और टाइम के साथ धीरे-धीरे मैं अपना पोस्ट ग्रेजुएशन करके मैंने एक अच्छी एमएसी में जॉब अपनी पास ली। कुछ टाइम के बाद जब सब कुछ ठीक चलने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि शायद आई मेट अ बॉय ही इज द वन ही इज द सोलमेट वेयर आई कैन रिलाई ऑन मतलब मेरा जो इमोशनल कनेक्शन था उनके साथ अच्छा था और जैसे कि मैं अपने घर में सबसे छोटी बेटी थी तो मेरे नाम पे प्रॉपर्टी थी सब कुछ था तो मैं उस टाइम यह नहीं समझ पा रही थी कि मेरी लाइफ में जो पर्सन मेरे साथ हैं जिनको मैं एज अ अपना सोल पार्टनर एज अ लाइफ पार्टनर के रूप में देख रही हूं कि वो मेरे लिए कितने सही हैं या कितने गलत हैं। एक जजमेंट होता है। उस ऐज में मैं सही जजमेंट नहीं ले पा रही थी। मुझे लगा ही इज़ द ओनली वन वेयर आई कैन गो एंड स्पेंड रेस्ट ऑफ माय लाइफ। तो देयर आई डिसाइडेड कि मुझे लाइक इनसे शादी करनी है और मैं अपनी लाइफ में इनका साथ अगर मेरे साथ होगा तो धीरे-धीरे मैं आगे बढ़

### [5:00](https://www.youtube.com/watch?v=7aY9MUlDrew&t=300s) Segment 2 (05:00 - 10:00)

जाऊंगी। तो यही सोच रख के मैंने शादी करी। शादी करने के बाद कुछ महीने तक सब ठीक चला। लेकिन महीने के कुछ महीनों के बाद यहां एक शादी की जो डार्क साइड मैंने देखी अपनी लाइफ में वो मैं यहां पर आप सब लोगों के साथ शेयर करना चाहती हूं। क्योंकि आई थिंक कुछ डिसीजन ऐसे होते हैं जो हम लोग जजमेंट कर लेते हैं आउट ऑफ इमोशंस में आकर के कैरिड अवे हो जाते हैं। लेकिन हमें इतनी जल्दी वो डिसीजंस नहीं लेने चाहिए। ये चीज मैंने अपनी लाइफ में सीखी है। तो कुछ टाइम के बाद जब सब ठीक चल रहा था तो माय एक्स हस्बैंड ही स्टार्टेड बीटिंग मी अप फॉर नो रीज़न। आई वास जस्ट सिंपली स्टैंडिंग। मेरे हाथ में खाना था उनके लिए ही थ्रू दैट खाना ऑन माय फेस तो आई वास नॉट एबल टू अंडरस्टैंड दैट व्हाट वेंट रोंग मैंने ऐसा क्या किया है तो मुझे फिर भी लगा कि शायद फ्रस्ट्रेशन होगी या जो भी होगा आई रियली डोंट नो कि व्हाट एक्सक्टली हैपेंड तो कुछ टाइम के बाद मेरे को लगा कि ठीक है आउट ऑफ फ्रस्ट्रेशन ऐसे इंसान कर देते हैं इट्स ओके बट फिर ये बिहेवियर ना फ्रीक्वेंटली रिपीट होता गया और जैसे-जैसे ये बिहेवियर रिपीट उनका होता गया मुझे समझ नहीं आ पा रहा था। दैट वास वै सफोकेटिंग फॉर मी। वन डे आई आस्क्ड हिम दैट व्हाट इज द रीज़न? आप मुझे इतना फ्रीक्वेंटली यू बीट मी अप फॉर नो रीज़ फ्रस्ट्रेटेड आप अब्यूसिव होते हो। मुझे आई वांटेड टू नो द रीज़न कि तुम ठीक से काम नहीं करती हो। एंड दिस एंड दैट आई गॉट दिस टाइप ऑफ़ आंसर। यह मुझे जब सब पता चला तो मैंने कहा ठीक है। आई विल ट्राई टू इंप्रूव मायसेल्फ। मैं अपने को ठीक करूंगी और आपके लिए यू नो आई वुड मतलब मैं अपने आपको बेटर बनाऊंगी और अपने आपके लिए मैं आपकी फैमिली के लिए सब कुछ अच्छा करने की कोशिश कर मैं यहां पर आप सब लोगों से एक सवाल करना चाहूंगी जो लोग मुझे यहां पर बैठकर देख रहे हैं सुन रहे हैं जब मेरे साथ फर्स्ट टाइम मेरे ऊपर खाना फेंका गया मैंने उस चीज को सीरियसली नहीं लिया जब मुझे मारा मुझे लगा कि शायद कमियां मेरे अंदर है और यहां पर बहुत से लोग जो कॉर्पोरेट में वर्क करते हैं, जो हाउसवाइफ हैं, वह यही मैं रिलेट कर सकती हूं, वह यही सोच रहे होंगे कि हम अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं औरों के लिए। हम राइट टाइम पे राइट डिसीजन नहीं लेते हैं। हम यह सोचते हैं कि हम अपने आप को इंप्रूव करेंगे तो शायद हमारा माहौल जो है वह इंप्रूव हो जाएगा। पर ऐसा नहीं होता है। सही टाइम पर सही डिसीजन लेना इज वेरी इंपॉर्टेंट। अगर मैं उस टाइम ही क्वेश्चन मार्क लगाती कि आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया तो शायद आज मैं इस सिचुएशन में नहीं फंसती। अपने आप को इंप्रूव आप तब कीजिए जब गलती आपकी हो। लेकिन अगर गलत दूसरा बंदा है और एक्सप्लेनेशन देने पर भी वो नहीं मांग रहा है तो उस केस में आपको डिसीजन लेना बहुत जरूरी हो जाता है। अब यहां से मेरी कहानी थोड़ा आगे बढ़ती है और इस तरह से आगे बढ़ती है कि मैं एक वर्स्ट फेस में अपने आपको अपनी गलतियों की वजह से डाल लेती हूं। जब धीरे-धीरे मेरे को लगा कि मतलब मेरे साथ सही नहीं हो रहा है। वहां मैं सब कुछ सहते हुए सफोकेटेड होते हुए अपने आप पर ये सारा टॉर्चर झेलते हुए मैं उस चीज को टोलरेट करे जा रही थी। हमारी सोसाइटी कुछ इस टाइप की होती है जहां पर वो यह बताया जाता है कि आप जितना टोलरेट करोगे बीइंग अ लेडी उतना ही आप अच्छे से सर्वाइव कर पाओगे। अपने घर को बसा पाओगे। लेकिन ऐसा नहीं है। हम शादी के कुछ टाइम बाद अलग भी हुए थे। अलग इन द सेंस हम अलग घर लेकर के हम लोग वहां पर रहने लगे थे। क्योंकि मेरी मदर इन लॉ का इंटरफेरेंस बहुत था। तो मैंने अपने एक्स हस्बैंड से बोला कि शायद चीजें बेटर हो सकती हैं। लेट्स टेक सम एक्शन अबाउट इट। और हम लोग थोड़ा सा अलग होकर रहने लगे। जब हम अलग होकर रहने लगे तो मैंने देखा कि जो मेरे एक्स हस्बैंड थे वो बहुत ज्यादा ड्रिंक करने लगे। वो रात के 12 1:00 बजे आने लगे। एंड बहुत ज्यादा वायलेंट होना, घर पर आकर मारपीट करनी, तमाशे करने, जॉब उनको करनी नहीं थी। मेरे ऊपर हमेशा प्रेशर रहता था कि आप जॉब करोगे एंड यू विल अर्न सो दैट हमारी लिविंग ढंग से चल सके। मुझे उस चीज से भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी। लेकिन कुछ टाइम बाद जब मुझे पता चला कि मैन आई एम प्रेग्नेंट तो मेरे को थोड़ी कॉम्प्लिकेशंस थी जिस वजह से मुझे जॉब के लिए मना करा गया था कि मैं नहीं कर सकती हूं। तो एक्चुअली हुआ ये था कि उस फेस में ही वास ड्रंक और रात के 1:00 बजे आए थे तो मैंने उनसे ये पूछा कि आप इतना लेट आए हो तो व्हाट इज द रीज़न फॉर दैट? तो बस गुस्से

### [10:00](https://www.youtube.com/watch?v=7aY9MUlDrew&t=600s) Segment 3 (10:00 - 15:00)

में आकर एक स्टिक रखी हुई थी, रड रखी हुई थी एंड ही स्टार्टेड बीटेड मी अप विथ दैट रड। और बोतल लेकर उन्होंने मेरे ऊपर हिट करा जिससे कि मुझे मैं 1. 5 मंथ्स प्रेग्नेंट थी जिससे कि मुझे एकदम से ब्लीडिंग स्टार्ट हुई एंड आई वास नॉट वेल। उस दिन मैंने अपने आप को पूरी रात एक बाथरूम में लॉक करके रखा। मैं डर गई थी। मुझे लगा था कि आज सब यहां पर खत्म हो चुका है। अब मैं यहां से कभी भी उठ नहीं पाऊंगी। जब मैंने वाशरूम का दरवाजा खोला। सुबह 5:00 बज गए मुझे रात के 1:00 बजे से 5:00 बज गए थे। ही वास स्लीपिंग। मैं वहां से भागी। भाग के मैंने अपने डॉक्टर को कॉल करा और डॉक्टर को मैंने बोला कि ऐसेसे मेरे साथ हुआ। उसने बोला कि सोनल यू गो और फटाफट आप अल्ट्रासाउंड कराओ। अल्ट्रासाउंड में उनको डाउट था कि बच्चा है भी या नहीं। तो बच्चा ठीक था, सेफ था लेकिन बट मेरे साथ बहुत प्रॉब्लम आ गई थी। तो उन्होंने मेरे को बोला कि आप को प्रोजेस्ट्रॉन पर रखा जाएगा और कंप्लीट बेड रेस्ट रहेगा। जिस वजह से आप ज्यादा मूव नहीं कर सकते हो। तो मेरी प्रेगनेंसीज में बहुत कॉम्प्लिकेशन आए थे। फिर उसके बाद मैं अपने मम्मी के घर चली गई थी। वो वहां आया। मेरे हस्बैंड वहां आए और उन्होंने मुझे बोला कि सॉरी दिस टाइम हो गया। अब नेक्स्ट टाइम मैं ध्यान रखूंगा ये वो और बहला फुसला करके वो मुझे अपने साथ ले गए। जब मेरा बेटा हो गया तो बेटे के होने के बाद भी वो मेरे पास नहीं आए चार दिन तक और मेरी मदद इन लॉ का मुझे कोई सपोर्ट नहीं था। मेरी मम्मी ही मेरा ध्यान रख रही थी और अपने साथ मुझे वह घर ले गई थी। ठीक है। जब मेरा बेटा एक साल का हो गया, मैं फिर वापस आई तो फिर इनका वही रवैया शुरू मारना पीटना। और अबकी बार तो पता नहीं इनको क्या हुआ था। इतना वायलेंट हो के इस तरह से मारा कि वास जो था वो मेरे पूरे हाथ पे उन्होंने हिट करा जिसकी वजह से आई हैव डेवलप मल्टीपल फ्रैक्चर्स। कुछ दूर पे जब मैंने देखा मेरा बेटा ही वास लिटरली फोल्डिंग हड लाइक दिस। और वो रो रहा है। ही वास लंग ऑन द फ्लोर एंड ही वास लिटरली फोल्डिंग हड कि प्लीज पापा ऐसे मत करो, मम्मी को मत करो, मत करो। वो रो रहा था। वो सिर्फ उस टाइम दो डेढ़ साल का था। वो सब देख कर के मेरे दिल में एक अंदर से आवाज आई कि बस अब और नहीं। आज जो है वो लास्ट है। इसके बाद अब कुछ नहीं होगा। उसी टाइम मैंने अपने बेटे को वहां से उठाया। अपने आप उठी। अपने बैग में चार जोड़ी कपड़े डाले और मैं वहां से मूव कर गई। मूव करने के बाद मैं अपने घर आई। घर आने के बाद वही सब ड्रामेबाजी शुरू हो गई कि नहीं प्लीज मैं आगे से नहीं करूंगा। यह मैंने कहा दिस टाइम आई हैव टेकन अ फर्म डिसीजन जो मुझे बहुत पहले लेना चाहिए था। अब मैंने जो सफर करा वो सफर कर लिया। मेरा बेटा वो लाइफ सफर नहीं करेगा। अब चाहे मुझे कैसे भी करके सर्वाइव करना पड़े। आई डोंट नो मेरे पास कोई जॉब नहीं कुछ नहीं था। बट मुझे अंदर से एक विश्वास था कि मैं इस चीज को कवर अप करूंगी। मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं था। मुझे करना ही करना था। जब मैंने यह डिसीजन ले लिया कि मुझे अब नहीं रहना है इस आदमी के साथ और मैं अपने घर जब वापस आई वहां से मेरे लिए दूसरे चैलेंजेस स्टार्ट हुए। चैलेंजेस किस फॉर्म में, सोसाइटी का प्रेशर, फैमिली का प्रेशर, दोस्तों का प्रेशर और अपने खुद के दिमाग में तो पता नहीं क्या-क्या चल रहा था। मुझे ऐसा लगता था कि मुझे यहां गिव अप कर देना चाहिए। मुझे आगे किसी के बारे में अब कुछ नहीं सोचना। बस यहां मुझे गिव अप करना है। मेरे दिमाग में बहुत सुसाइडल थॉट्स आते थे कि मैं अब यहां से आगे उठकर नहीं खड़ी हो सकती। लेकिन कहते हैं कि लाइफ में कुछ ऐसे टर्निंग पॉइंट होते हैं। कुछ ऐसी एक रोशनी होती है जो भगवान आपको भेजता है जो आपका मोटिवेशन बनता है। और यहां पर मेरा मोटिवेशन कोई और नहीं। मेरा अपना खुद का बच्चा था। मेरा बेटा था जिसके लिए मुझे लगा कि सुसाइडल थॉट्स सारे हैं। मैं मर भी जाऊंगी। लेकिन मैं यह सोचती थी कि फिर कल इसका क्या होगा? मुझे इसे वो लाइफ नहीं देनी है जो इसके फादर ने मुझे दी थी। मैंने अगर अपने रिस्पांसिबिलिटी मैंने अपने बच्चे के ली है तो मेरी रिस्पांसिबिलिटी उसके लिए बिल्कुल लास्ट तक बनती है। और यही सोच कर के मैं उस मोटिवेशन अपने बच्चे को देख के खड़ी हुई। मुझे यह लगा कि मुझे फाइट करना है। मुझे फाइट बैक करना है रादर और सोसाइटी को और ऐसे लोगों को मुंह तोड़ के जवाब देना है। तब बहुत सोचने के बाद मेरे दिल में यह बात आ चुकी थी कि अब मुझे आगे ही बढ़ना है। क्योंकि समटाइ्स व्हाट हैपन इज स्ट्रांग इज नॉट द ओनली थिंग यू वांट। बीइंग स्ट्रांग इज द ओनली ऑप्शन यू हैव विथ यू। आप स्ट्रांग दुनिया आपको कहती है कि यू आर अ वेरी स्ट्रांग वूमेन लेडी बट दे डोंट अंडरस्टैंड दैट

### [15:00](https://www.youtube.com/watch?v=7aY9MUlDrew&t=900s) Segment 4 (15:00 - 18:00)

स्ट्रांग लेडी बट दे डोंट अंडरस्टैंड दैट समटाइ्स बीइंग स्ट्रांग इज द ओनली ऑप्शन लेफ्ट विद यू आपके पास और कोई ऑप्शन ही नहीं है स्ट्रांग बनने के अलावा तो यहां से जब मैंने सोचा कि मुझे आगे बढ़ना है तो मैं पूरी-पूरी रात बैठती थी और अच्छे-अच्छे ऑर्गेनाइजेशन सर्च करती थी अपने लैपटॉप पर कि अब मुझे जॉब करनी है क्योंकि मुझे अपने बच्चे की अच्छी तरह से अपब्रिंगिंग करनी है। उसको ह्यूमन वैल्यूस देनी है। उसको अच्छी एजुकेशन देनी है। और समाज में उसको एक अच्छी पहचान, एक अच्छी आइडेंटिटी देनी है। भगवान ने मेरी सुनी। भगवान ने मेरा पूरा साथ दिया। मेरी जॉब एक बहुत ही अच्छे ऑर्गेनाइजेशन में लगी एज अ प्लेसमेंट हेड। जब मुझे वो जॉब मिली तो मुझे ऐसा लगा कि शायद दिस इज द सॉल्यूशन व्हाट आई एम सीकिंग फॉर और मेरी जो मेहनत है अब यहां से शुरू होती है। मैं हर कंपनीज़ में जाती थी। एमएसीस में जाती थी। एक अच्छे रिलेशन बनाने के लिए कि जिससे मेरे बच्चे अच्छी जगह प्लेस्ड उनको अच्छी नौकरी मिले और वो अच्छी तरह से समाज में अपने आप को स्टैंड अपने आप को खड़ा कर सकें। मैंने बहुत मेहनत करी। मैंने बहुत बैचेस निकाले। बच्चों को ट्रेन करा और स्पेशली गर्ल्स को मैं बहुत अच्छे से ट्रेन करती थी और उन्हें यही बात समझाती थी कि एजुकेशन प्लेस वेरीेंट रोल इन योर लाइफ इन सोसाइटी नो मैटर व्हाट इवन इफ यू गेट मैरिड इवन इफ यू हैव चाइल्ड बट इफ यू आर एजुकेटेड नथिंग कैन स्टॉप यू। तो यह मैं अपने बच्चों को बताती हूं स्पेशली गर्ल्स और मेरी पूरी कोशिश रहती है कि उनको एक अच्छी जॉब मिले और वह अच्छी जॉब ले भी रहे हैं और बहुत अच्छा कर भी रहे हैं इन द ईयर 2022 मैंने अपना खुद का घर खरीदा और उसी साल मैंने जो डिवोर्स फाइल करा था वो एक्सेप्ट हुआ। फाइनली मैं अलग हो चुकी थी। अपनी लाइफ जी रही थी। अपने बच्चे को मैं उसकी एजुकेशन दे पा रही थी। घर में सुकून से रह पा रही थी। एंड ऑल दिस बिकॉज़ ऑफ माय एजुकेशन, माय स्ट्रेंथ, माय करज। हम सब में स्ट्रेंथ होती है। जब हम पैदा होते हैं वो स्ट्रेंथ हम ले पैदा होते हैं। लेकिन वो हमें कब दिखानी है, कब करज दिखाना है, वो हमारे खुद के ऊपर होता है। तो मैं आपसे यह कहना चाहूंगी कि जो भी मेरे साथ हुआ है मैंने उससे एक चीज सीखी है जो मैं आपके साथ भी शेयर करना चाहूंगी कि सबसे पहले तो आप अपनी चुप्पी को तोड़िए। अगर आपके साथ गलत हो रहा है तो उसमें आवाज उठाइए क्योंकि जितना आप बर्दाश्त करेंगे उतना आपको दबाया जाएगा। दूसरी चीज एज अ वुमेन प्लीज एजुकेट योरसेल्फ। जितने पढ़े लिखे आप होंगे आप समाज में एक बहुत अच्छा एग्जांपल सेट कर पाएंगे और आप किसी के प्रेशर में नहीं आ पाएंगे। कोई आपका गलत फायदा नहीं उठा पाएगा। और तीसरी चीज कि एज अ वुमेन आप दूसरे वुमेन को एमावर कीजिए। उसके राइट्स उसको दिलवाइए। उसके लिए बोलिए, बात कीजिए। अगर आप देख रहे हैं कि किसी लेडी के साथ गलत हो रहा है तो प्लीज आवाज उठाइए। तो यह मेरी छोटी सी कहानी थी और सबकी कहानी हमें कहीं ना कहीं मोटिवेट करती है। एक लर्निंग देती है। उम्मीद करती हूं कि मेरी कहानी भी आपके लिए एक लर्निंग हो। मोटिवेशन दे। आप इसी तरह से आगे बढ़िए। थैंक यू सो मच। ओम

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*Источник: https://ekstraktznaniy.ru/video/51161*