The Power of Being Alone (No One Talks About This)
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The Power of Being Alone (No One Talks About This)

Sarthak Virmani 05.05.2026 21 731 просмотров 1 529 лайков

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Описание видео
The moment you’re alone… you reach for your phone. The truth is — the problem isn’t being alone. The problem is that we don’t know how to sit with ourselves. In this video, we talk about: Why silence feels uncomfortable Why you keep distracting yourself And how being alone can actually make you stronger If you’ve ever felt like “everything is fine… but something feels missing” this video is for you. 🎯 Today’s Challenge: Sit alone for 5–10 minutes. No phone. No music. Just observe. Don’t escape. If you find it helpful, please like, subscribe, and share with others!" Thankyou.. For Personal Gudiance Book a 1:1 Guidance Call with me- https://topmate.io/sarthak_virmani/ Join my Whatsapp Channel and become a part of community - https://whatsapp.com/channel/0029VbCFyARKrWQwuz4qlR1M All gears that i use: Main mic : https://amzn.to/41NcC2j My Secondary Wireless mic: https://amzn.to/4qN0AkE Camera: https://amzn.to/3QjMABE Camera Lens - https://amzn.to/45irGXq Key Light: https://amzn.to/4kRHB5Y Rim Light - https://amzn.to/4pznjiT RGB Light: https://amzn.to/49z5pa6 Budget Tripod: https://amzn.to/3XR86P7 My Main Tripod - https://amzn.to/3J1ZMI3 Portable Tripod: https://amzn.to/43JcjIw Magic Arm: https://amzn.to/3FETOea Lamp: https://amzn.to/3DDUikk Mic Stand: https://amzn.to/4iQHh5K My Black Chair - https://amzn.to/4m8Cu2m My New Chair - https://myfrido.com/?rfname=Sarthak%20Virmani&dispc=10&discount=SARTHAKVIRMANI&tt-cart-mod=true Beginner's Budget Gears - Tripod - https://amzn.to/4pCTUo8 Portable Tripod - https://amzn.to/4sCsbqa Light - https://amzn.to/4qQl2ki Wireless Mic - https://amzn.to/4qEjxGB Wired Mic - https://amzn.to/45bircA My Daily Diary Link - https://amzn.to/4pX7GSH Copyright Disclaimer:- This video has been made with good thinking for education, whose content has been made after very deep research on the internet itself. We apologize if any facts or data are incorrect. The footage and photos used in the video are for fair use only. We do not intend to violate anyone's sentiments or copyrights. For more queries contact us at - sarthakvirmani4@gmail.com Facebook - https://www.facebook.com/Sarthakvirmani4 Instagram - https://www.instagram.com/sarthakvirmani_ #power #psychology #alone #mindsetshift #productivity #selfgrowth

Оглавление (2 сегментов)

Segment 1 (00:00 - 05:00)

आज मैं एक ऐसे टॉपिक के ऊपर बात करना चाहूंगा जिसको अभी तक मैंने अपनी पास्ट वीडियोस में कवर नहीं करा है जो कि है अकेले रहना। देखो यार अकेले रहना आज के टाइम में एक्सट्रीमलीेंट हो चुका है क्योंकि हमारी लाइफ में इतनी सारी अपॉर्चुनिटीज आती हैं जिनको हमें ऑब्जर्व करना होता है गैब करने के लिए लेकिन हम ऑब्जर्व ही नहीं कर पाते क्योंकि हम अपनी लाइफ में इतना ज्यादा फास्ट हो चुके हैं, इतना ज्यादा बिजी हो चुके हैं कि हमारे पास टाइम ही नहीं है। हमने ना बचपन से कुछ चीजों की आदतें डालनी है कि हमें हमेशा लोगों के साथ रहना है। हम बचपन में जब स्कूल में थे तो हम अपने फ्रेंड्स के साथ रहेंगे। हम घर पे हैं तो फैमिली के साथ रहना है और अगर हम घर पर नहीं है कहीं और हैं तो हमारे पास फोन है जो नोटिफिकेशंस के साथ रहता है। तो ऑटोमेटिकली जब भी हमारे पास एक खाली टाइम आता है तो हमारा हाथ जो है वो सबकॉन्शियसली फोन की तरफ चले जाता है और हम YouTube पे शॉट्स देख रहे हैं, Instagram पे रील्स देख रहे हैं, मेल्स चेक कर रहे हैं, WhatsApp पे चैट कर रहे हैं। पता नहीं जो कुछ कर रहे हैं लेकिन हम खाली नहीं बैठ सकते। क्योंकि खाली बैठना बड़ा अनकंफर्टेबल सा लगता है और यह चीज हमने बचपन से ही नहीं सीखी है। तो अचानक से अगर आपसे कोई बोला जाए कि आपको एक ऐसा काम करना है जिस चीज की आपको आदत नहीं है तो आपको ऑब्वियसली बात है अनकंफर्टेबल सा फील होगा। इसी की वजह से आज की जनरेशन के साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या आ रही है। आज की जनरेशन ही सबसे ज्यादा कंफ्यूज्ड डिस्ट्रैक्टेड है। क्यों? क्योंकि उन्हें यही नहीं पता कि किस डायरेक्शन में जाना है और अगर कोई भी डिसीजन लेना है तो उसके लिए हमेशा वो दूसरों से मतलब पूछने की कोशिश करते हैं। कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते कि व्हाट दे एक्चुअली वांट। इवन एक बड़ा अनकंफर्टेबल सा ट्रुथ बताऊंगा। आज के टाइम में हमें यह भी नहीं पता कि हमें पसंद क्या है। हम वो चीजें कर रहे हैं जो ऑलरेडी ट्रेंडिंग में है और ट्रेंडिंग को ही फॉलो करना शुरू कर रहे हैं। हम गाने वो सुनते हैं जो ट्रेंड में है। हम कपड़े वो पहनते अपना कभी भी कोशिश नहीं करते कि यार अपने मनपसंद गाने सुने या अपने मनपसंद कपड़े पहने। क्यों? क्योंकि हमें लगता है कि यार अगर मैं अपना करना शुरू करूंगा तो लोग क्या बोलेंगे? क्योंकि हमने कभी अपने आप को टाइम दिया ही नहीं है। हमें हमेशा यह लगता है कि अगर मैं अकेले रहा तो लोग जज करेंगे और लोगों के साथ रहूंगा तो मैं उनका एक पार्ट बन जाऊंगा। मेरे साथ वो फोमो क्रिएट नहीं होगा जिसकी वजह से कोई भी इंसान अकेले नहीं रह पाता। गौतम बुद्ध ने भी एक चीज बोली थी और मैं अपनी लाइफ में इस चीज को बहुत ज्यादा इंप्लीमेंट करता हूं। आपको चीजों को ना मानना नहीं है। मानना प्लीज बंद कर दो। चीजों को जानना शुरू करो। आपके साथ कोई चीज काम नहीं कर रही ना तो आपने मान लिया यार ठीक है नहीं काम कर रही। अरे क्यों मान लिया? उस चीज को जानो। व्हाई दिस थिंग इज नॉट वर्किंग। आपकी कोई वीडियो पे व्यूज नहीं आ रहे तो उसको जानने की कोशिश करो। क्यों नहीं आ रहे? आपके साथ कोई इंसिडेंट हुआ तो उसको जानने की कोशिश करो। वो आपके साथ ही क्यों हुआ? या उसकी वजह क्या थी? जब आप चीजों को जानना शुरू करोगे ना तब आपको पता चलेगी कि हां चीजें ऐसे काम करती हैं, ऐसे काम नहीं करती। लेकिन जानने के लिए टाइम निकालना पड़ता है। टाइम निकालने के लिए अकेले रहना पड़ता है और अकेले रहना मुश्किल हो चुका है। देखो यार मैं अगर अपनी लाइफ की बात बताऊं तो मैं बहुत कुछ यूनिक नहीं करता। लेकिन मेरे डे में मेरे पास खुद के लिए एक पर्सनल टाइम हमेशा रहता है। जहां मैं वॉक पे जाता हूं, एक ऐसी जगह पर जाता हूं जहां मुझे फोन लेकर नहीं जाना। मुझे 30 मिनट्स वन आवर कभी कबभार तो मैं दो-दो घंटे की वॉक करता हूं। क्यों? क्योंकि मुझे वहां पे आइडियाज आते हैं, थॉट्स आते हैं। मैं घर पे आके उसको डायरी पर लिखता हूं। उसको ऑब्जर्व करता हूं और फिर मैं वीडियोस तक बनाता हूं। इसलिए लोग मुझसे पूछते हैं कि आपको कंटेंट आइडियाज कहां से आते हैं? और मेरे कंटेंट आईडियाज आपको किसी और की वीडियोस के एग्जैक्ट सेम नहीं मिल सकते क्योंकि ये मेरे खुद के थॉट्स हैं। और थॉट्स तब आते हैं जब मैं टाइम देता हूं और टाइम देने के लिए आपको अनकंफर्टेबल चीज को सीखना पड़ेगा। मैं आपसे यह नहीं कहूंगा कि अपने घर में खाली बैठे हो तो आधे घंटे 1 घंटे बैठ जाओ। क्योंकि आप नहीं बैठ पाओगे। यह आपके लिए बहुत ज्यादा डिफिकल्ट हो जाएगा। आपको पता है करना क्या है? सबसे पहले तो अपने दिन में एक 15 से 20 मिनट या 30 मिनट्स मिनिमम एक वॉक स्टार्ट कर दो। जहां पे आपको अपना फोन तक लेके नहीं जाना। अब आप क्या करोगे? आप कहोगे यार मैं फोन थोड़ी चला रहा हूं। बस गाने लगाए और वॉक करना शुरू कर दी। देखो अल्टीमेटली गाने सुन रहे हो। आप डिस्ट्रैक्टेड हो। आपको गाने भी नहीं सुनने। आपको फोन रखना ही नहीं है। आप नॉर्मल वॉक पे गए फिर आप देखना चार से पांच दिन के बाद आपके पास थॉट्स आना शुरू हो जाएंगे। नंबर सेकंड चीज आप जिन जगहों पे मतलब मैं आपको एक क्या बताऊं। जैसे मैं रेड लाइट पे हूं या आप बस स्टैंड पे बस का वेट कर रहे हो या दिल्ली में रहते हो तो मेट्रो का वेट कर रहे हो या ऐसी जगह पे हो जहां पर बहुत सारे लोग आपके आसपास हैं। बस वहीं पे आपको फोन यूज़ नहीं करना है। आप अगर डॉक्टर के क्लीनिक में गए हो और आपका जो प्रिस्रिप्शन आने में 10 से 15 मिनट का टाइम लग रहा है। आपको उस समय फोन नहीं निकालना और आपको ऑब्जर्व करना है। ये वो जगह होती हैं जहां पे हम कंट्रोल नहीं कर पाते। देखो घर पे तो ऑटोमेटिकली हम खाली है तो फोन को हाथ लगाएंगे। लेकिन इन जगहों पे अगर आपने अपने आप को कंट्रोल करना सीख लिया। आपको आपने ऑब्जर्व करना सीख लिया। स्ट्रीट लाइट पे देखना शुरू कर दिया। ट्रैफिक को देख रहे हो। वहां से पता नहीं अचानक से कोई थॉट आ गया या आप खाना खा रहे हो और आपके पास फोन नहीं है। वहां पे अचानक से थॉट आ गया। थॉट्स हमेशा तब आते हैं ना जब आपका ब्रेन एकदम खाली होता है। लेकिन अगर आप खुद खाली बैठे हुए हो रूम के अंदर जब आसपास लोग नहीं है। उस समय आपको थॉट्स नहीं आएंगे। आप कितनी कोशिश कर लेना। थॉट्स हमेशा रैंडम आते हैं और रैंडम थॉट्स में ही हम सबसे ज्यादा डिस्ट्रैक्टेड होते हैं। क्योंकि हमने ये सीखा है कि अगर हम रैंडम कहीं पे भी खाली खड़े हैं। इवन आज के टाइम में तो हम अपने दोस्तों के साथ भी खड़े होते हैं तो फोन निकाल के रील्स देखना शुरू कर देते हैं। मतलब हम इतना ज्यादा घुस चुके हैं कि हम अपने फ्रेंड्स के साथ भी अगर खड़े होंगे ना तो हमारे हाथ में फोन होगा। 2 मिनट में हमारे फ्रेंड ने

Segment 2 (05:00 - 06:00)

किसी और टॉपिक पर बात करी और हम तुरंत रील्स के ऊपर शिफ्ट हो जाते हैं या कोई मेल चेक करना शुरू कर देंगे और हमारा ये जो सबकॉन्शियस ब्रेन है वो इतना ज्यादा हमारे ऊपर भारी पड़ चुका है। तो देखो यार अगर आपने इस चीज को अभी तक अपनी लाइफ में कंट्रोल नहीं करा ना तो आपको डायरेक्शन मिल जाए। आपको अपने करियर के बारे में पता चल जाए। लेकिन आप वही मोनोटनस चीजों में काम करोगे जो ऑलरेडी चलते हुए आ रही हैं। आप रिप्लेसेबल हो सकते हो क्योंकि आप वही सेम चीज फॉलो कर रहे हो जो दुनिया फॉलो कर रही है। लेकिन जब आप अपने ओरिजिनलिटी पे आओगे, अपने थॉट्स को ऑब्जर्व करोगे, कुछ यूनिक लेके आओगे, कुछ क्रिएटिव करोगे तो आप इररिप्लेसेबल बन जाओगे। लोग आपको रिप्लेस नहीं कर पाएंगे। तभी कुछ ही लोग होते हैं जिनका कंटेंट या जिनके आइडियाज इतने क्रिएटिव होते हैं कि लोग कॉपी करने की कोशिश करते हैं फिर भी नहीं कर पाते क्योंकि वो अपने थॉट्स को इतनी ज्यादाेंस देते हैं जो आज की जनरेशन नहीं दे पा रही है। हम लोग नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन अगर आपने थोड़ा सा भी टाइम निकालना शुरू करा चीजों को समझना शुरू करा। आप खुद देखना चीजें वापस आएंगी। आपकी लाइफ आपके कंट्रोल में आ जाएगी। तो बस यार आपको एक हैबिट को अपने दिन में लेके आना है कि 30 मिनट्स कम से कम कोशिश करना कि वॉक पे कहीं चले जाओ जहां पर आपको फोन को हाथ नहीं लगाना या फिर आप कहीं पे भी बैठे हुए हो जो अभी मैंने आपको बताया रैंडमली वहां पे आपको बस फोन को टच नहीं करना फिर आप देखना आपकी लाइफ में थॉट्स आना शुरू हो जाएंगे स्टार्टिंग में नहीं आएंगे चार से पांच दिन लेकिन 6 दिन 7 दिन 8 दिन के बाद आप देखना चीजों से कनेक्ट करना शुरू कर दोगे और मैं लिटरली बोल रहा हूं ये चीज काम करती है आप किसी बुक्स में पढ़ लेना किसी से भी पूछ लेना ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपको थॉट्स ना आए आपको थॉट्स तब आएंगे जब आपका रैंडम ब्रेन जो होता है ना जब जिस समय वो बिल्कुल खाली होता है जब उसको समझ में नहीं आता जैसे ट्रैफिक लाइट पे मैंने बोला और उस समय आपके पास फोन नहीं है तब देखना आपके पास थॉट्स आना शुरू हो जाएंगे। सो दैट्स इट फॉर दिस वीडियो। मेरा नाम है सार्थक विरमानी एंड दिस चैनल इज ऑल अबाउट गेटिंग थिंग्स बेटर। मिलते हैं बहुत जल्दी नेक्स्ट वीडियो में। टिल देन टेक केयर। बय।

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