Walking License in Bikaner  #dharmendrasir #gyrussulcus #education #logic
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GYRUS SULCUS 10.05.2026 2 008 763 просмотров 80 660 лайков

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बहुत वायरल हो रही है ये इमेज। इसमें बताया है कि बीकानेर राज्य जो था बीकानेर के राजा पैदल चलने पर टैक्स लगाते थे और एक लाइसेंस देते थे। अब देखो एआई कैसे हमारे दिमाग को चैलेंज करता है और कैसे हमको सावधानी रखनी है एआई से बनी हुई चीजों को पहचानने में। तो देखो इस डॉक्यूमेंट में ये बताया है कि पैदल चलने का लाइसेंस और कब मिला है? 1455 का किसी को मिला है। पुराना कोई म्यूजियम में रखा हुआ मिल गया। ऐसा इसके अंदर बताया जा रहा है। अब मार्च 1455 में ये बता रहे हैं। इनको थोड़ा सा दिमाग कम था जिन्होंने ये बनाया। वो एक साइंस में आता है कि जिनकी मम्मीियां आयोडीन वाला साल्ट नहीं खाती हैं उनके बच्चों का ब्रेन कमजोर रह जाता है। यहां भी ऐसा ही हुआ है। इनको शायद ये पता नहीं कि बीकानेर स्टेट जो है बीकानेर ही 1488 में बना है। अब बीकानेर तो बीकानेर के अंदर लाइसेंस कहां से आ गया? 1455 के अंदर। पहली चीज। दूसरी चीज देखो एआई की दुनिया में एक टर्म आता है प्लॉसिबिलिटी बायस। तो जब हम एलएलएम और जनरेटिव एआई वाले मॉडल पढ़ते हैं तो उसके अंदर हर टीचर जीके के अंदर ये लिखवाता है कि प्लॉसिबिलिटी बायस इज अ बिग चैलेंज फॉर एआई मॉडल्स। तो एआई मॉडल्स क्या करते हैं? सही क्या है? इस पे ध्यान नहीं देते। सही क्या दिखेगा? इस पे ध्यान देते हैं। अब यहां पे क्या गड़बड़ हुई? ये ए4 साइज के हिसाब से स्टैंडर्डाइज्ड मार्जिन छोड़ के प्रिंट निकाल दिया इसने। अब कभी सोचा है 1455 में उस जमाने में ए4 साइज स्टैंडर्डाइज था ही नहीं। जब ए4 साइज ही पेपर नहीं था तो उस जमाने के प्रिंटर को कैसे पता लगा? फिर तीसरे नंबर पर एक आता है कॉनफबुलेशन। शुरू की बात पता है लास्ट बीच में कुछ भी भर दो। वो कॉन्फबुलेशन कहते हैं इसको। वही इसने किया है कि कैसे किया? दिमाग में आईडिया आया कि चलो एक बनाते हैं। एआई को दे दिया कि ऐसीऐसी इमेज बना दो जो पुरानी लगे और लोगों ने भी शेयर करनी शुरू कर दी। अब यहां कॉन्फगुलेशन कहां हो रहा है? तो बीकानेर स्टेट के अंदर आप कह रहे हो लाइसेंस। आपको पता है लाइसेंस टर्म कब आया है? लाइसेंस टर्म अंग्रेजों के आने के बाद आया है। और आपको पता होगा कि अंग्रेज तो 1600 तक तो स्ट्रगल कर रहे थे कि भैया हमें घुस जाने दो कहीं पे इंडिया के अंदर। 1455 में अंग्रेजों के टाइम की लैंग्वेज में लाइसेंस आ रहा है। फिर अगली गड़बड़ चीज क्या? देवनागरी। शुद्ध देवनागरी के अंदर हिंदी यहां आ गई। क्या बात है यार? कहां से आ गई? Google का फोंट कलम जो होता है बिल्कुल वैसा धनराज सोनी लिखा हुआ आ गया। हाउ इट इज पॉसिबल डिंगल में होता, पिंगल में होता, मारवाड़ी के लेटर्स होते मैं मान लेता। और अगली चीज आपको ये पता होगा कि प्रिंटिंग मशीन तो इंडिया में पोर्तुगीज लेकर के आए हैं। और पोर्तुगीज 1498 में तो पहली बार बेचारा इंडिया पहुंचा है। वो कह रहे हैं इंडिया को हमने डिस्कवर किया है। पहली प्रिंटिंग प्रेस हम लोग जीके में पढ़ते हैं। 1556 में पहली किताब निकाली थी पुर्तगाली भाषा में। और इंडियन लैंग्वेज में अगर आप बात करो तो तमिलनाडु में हर बच्चा नाइन 10th भी जिसने कर रखी है उसको पता है पहली बुक जो इंडिया में पब्लिश हुई वो तमिल लैंग्वेज में थी जिसका नाम भी आता है तंबीराम वक्कम या कुछ ऐसा नाम आता है तो वनाकम सॉरी है ना तो ये जो है ये भी 1578 में आई थी इतने सारे लॉजिक्स हैं अगर वो लॉजिक्स के बैरियर लगे होते यह फॉरवर्ड होना ही नहीं चाहिए साहब

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