10 Biggest Myths About Ecommerce Business in India 🇮🇳 | Amazon, Flipkart & Meesho
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10 Biggest Myths About Ecommerce Business in India 🇮🇳 | Amazon, Flipkart & Meesho

Konnection Business 13.05.2026 11 010 просмотров 553 лайков

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Оглавление (3 сегментов)

Segment 1 (00:00 - 05:00)

सो गाइस, ई-कॉमर्स बिजनेस को लेकर आपके माइंड में बहुत सारे ऐसे सवाल होते हैं, ऐसे डाउट्स होते हैं, ऐसे मिथ होते हैं। लोगों को लगता है कि यार ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू करना बहुत डिफिकल्ट है। जीएसटी को लेकर बहुत सारे डाउट्स रहते हैं। अकाउंटिंग प्रोडक्ट कौन सा चूज़ करें? यह भी माइंड में रहता है। कितना बजट होना चाहिए? कम बजट में शुरू करें तो कितने कर सकते हैं। बिना इन्वेंटरी के स्टार्ट किया जा सकता है नहीं और बहुत सारी ऐसी गलत इंफॉर्मेशन लेकर इस बिजनेस में आ जाते हैं जिससे एट द एंड उनका लॉस हो जाता है। तो आज के इस वीडियो में मैं आप लोगों को 10 ऐसे मिथ बताऊंगा जो एक्चुअली में आप जो सोच रहे हो वैसा बिल्कुल भी नहीं है और आपके माइंड में जो सवाल चल रहे हैं उनके आंसर्स भी मैं दूंगा। सबसे पहला जो मिथ होता है, लोगों को यह लगता है कि ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू करने के लिए 2 से ₹ लाख मिनिमम चाहिए। वरना आप यह बिजनेस रन नहीं कर पाओगे, सक्सेसफुली आगे नहीं बढ़ पाओगे। यह बिल्कुल गलत है। अगर आपने अपने डॉक्यूमेंट्स बनवा लिए जैसे कि जीएसटी, आपका बैंक अकाउंट जो भी डॉक्यूमेंट्स रहते हैं ई-कॉमर्स बिजनेस को या किसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए तो उसके बाद आप बहुत कम पैसों में इन्वेंटरी लाकर इस बिजनेस को शुरू कर सकते हो। अगर आप फैशन एक्सेसरीज के अंदर जाते हो तो आपको वहां पर बहुत सस्ते-सस्ते प्रोडक्ट्स बहुत कम प्राइस में अलग-अलग वैरायटीज में मिल जाएंगे। जिनको आप जेरिक में लिस्ट करोगे। यानी कि बिना किसी ब्रांड के और फिर उसके बाद जब उसके ऊपर अच्छे ऑर्डर्स आएंगे तब धीरे-धीरे और इन्वेंटरी ऐड करके इस बिजनेस को ग्रो कर सकते हो। टाइम लगेगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि 2 से ₹ लाख के बिना आप ई-कॉमर्स बिज़नेस शुरू नहीं कर सकते। आप Amazon, Flipkart, Meesho पे अपने प्रोडक्ट को लिस्ट करिए और फिर उसके बाद देखिए कि कहां पर आपको अच्छा रिस्पांस आ रहा है और कहां पर आप प्रॉफिट बना रहे हो। नेक्स्ट जो लोगों के माइंड में एक मिथ रहता है कि यार ई-कॉमर्स बिजनेस करने के लिए हमें बहुत बड़ा वेयर हाउस या कहीं पर ऑफिस लेना पड़ेगा। बिल्कुल भी नहीं। आप अपने घर से ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू कर सकते हो। इवन गवर्नमेंट खुद आपकी हेल्प करेगी इस बिजनेस को शुरू कराने में। अगर आप घर का किसी प्रकार का गृह उद्योग शुरू करके साथ का साथ ई-कॉमर्स में आते हो तो यह भी पॉसिबल है। यह भी संभव है। दिमाग से यह डाउट निकाल लीजिए कि आपको एक बड़ा वेयर हाउस रिक्वायर्ड है। उसके लिए आपको ऑफिस रेंट देना पड़ेगा। इलेक्ट्रिसिटी का खर्चा उठाना पड़ेगा। बहुत सारी टीम रखनी पड़ेगी। बिल्कुल भी नहीं। मैं ऐसे बहुत सारे सेलर्स को पर्सनली जानता हूं जो अकेले इस बिजनेस को कर रहे हैं और इस बिजनेस को सक्सेसफुली रन भी कर रहे हैं और अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं। तो ये चीज भी आपको ध्यान रखनी है कि नहीं यार कोई किसी प्रकार के वेयर हाउस की रिक्वायरमेंट नहीं है। तीसरा मिथ सिर्फ मैन्युफैक्चरर ही जो है इस ई-कॉमर्स बिज़नेस में सक्सेसफुल होते हैं। देखो मैं एक बहुत बिल्कुल गारंटी के साथ और एक बिल्कुल प्रूफ के साथ आपको इसका एग्जांपल देना चाहूंगा। क्या सिर्फ मैन्युफैक्चरर ही ई-कॉमर्स बिज़नेस में सक्सेसफुल होते हैं जो मैन्युफैक्चरर नहीं है। क्या वह सक्सेसफुल नहीं हो सकते? बिल्कुल गलत। हमने अभी 2 महीने पहले एक पॉडकास्ट किया था अपने चैनल पर। अगर आपने नहीं देखा है तो जरूर देखिएगा। धवल हीरापारा के साथ। वो है ना बाथरूम फिटिंग और बाथरूम एक्सेसरीज होती है ना मैन्युफैक्चरर से वो प्रोडक्ट लाते हैं। अपना ब्रांड का लेबल लगाते हैं और उसको Amazon और Flipkart पर सेल करते हैं। रोज 2 से 3000 ऑर्डर्स उनको आते हैं। आराम से यह वीडियो देखने के बाद वो पूरा का पूरा पॉडकास्ट जरूर देखिएगा। उस पॉडकास्ट में आपको इतनी इंफॉर्मेशन मिलेगी कि मैं कहता हूं कि आप यह समझ लीजिए आपकी एक ट्रेनिंग हो जाएगी। बहुत अच्छा पॉडकास्ट है और बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। तो यह जो माइंड में डाउट है ना कि जो मैन्युफैक्चरर है वही ई-कॉमर्स बिजनेस में सक्सेसफुल होते हैं, प्रॉफिटेबल होते हैं। बिल्कुल गलत है। आप Amazon, Flipkart जैसे मार्केट प्लेसेस पर बिना मैन्युफैक्चरर हुए मैन्युफैक्चरर से प्रोडक्ट्स लाकर लिस्ट करके अपने ब्रांड से उन प्रोडक्ट को लिस्ट करके और सेल करके अपना बिजनेस जो है वो शुरू कर सकते हैं। अगला एक बहुत बड़ा मिथ और बहुत बड़ा गलत इंफॉर्मेशन जो मार्केट में है कि ई-कॉमर्स बिना इन्वेंटरी के भी शुरू हो सकता है। जो बिजनेस बिना इन्वेंटरी लाए किसी और का माल बिकवाने वाला बिजनेस है उसमें सिर्फ और सिर्फ आपका लॉस होगा। मैं इस पे बहुत सारे वीडियोस बना चुका हूं और मैं आपको क्लियरली बताता हूं इस मॉडल को कहते हैं ड्रॉपशिपिंग मॉडल। यानी कि मैन्युफैक्चरर आपको कुछ फोटोस देता है। उन फोटोस को आप अपनी वेबसाइट पर या फिर ई-कॉमर्स मार्केट प्लेसेस पर लगाते हो। जब आर्डर आता है तो मैन्युफैक्चरर उसे पैक करके भेजता है। यह बिजनेस मॉडल सक्सेसफुल नहीं है। इस बात को मैं आपको लिख के दे सकता हूं। लोगों को इसमें लॉस होगा। क्यों? क्योंकि आप इन्वेंटरी मैनेज नहीं करोगे तो आपका उसके ऊपर होल्ड नहीं रहेगा। आपको पता नहीं चलेगा प्रोडक्ट कैसा पैक हो रहा है, प्रोडक्ट कैसा जा रहा है, क्या बिजनेस मिल रहा है, कहीं ना कहीं आपकी परफॉर्मेंस लीक होगी और आपका जो मार्केट प्लेसेस पर बिजनेस है वो ठप पड़ जाएगा। मत करिएगा सिर्फ और सिर्फ पैसों के नीचे होगी और कुछ नहीं मिलने वाला। अगला जो मिथ है जो बेसिकली लोगों के माइंड में रहता है कि सर हम जो ई-कॉमर्स बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं, तो हमारे पास कोई पैन कार्ड या आधार कार्ड या जीएसटी नंबर तो नहीं है। मेरे पापा की एक दुकान है क्या उससे मैं शुरू कर लूं क्या? अब देखो पापा की तो दुकान है मेडिकल की और आप जो है प्रोडक्ट बेचना चाहते हो किसी प्रकार के शूज, किसी प्रकार की फैशन एक्सेसरीज, बैग्स इस तरीके के प्रोडक्ट्स तो वो मैच नहीं करेगा। और सबसे इंपॉर्टेंट चीज कि पापा का जो बिजनेस आपके फादर का जो बिजनेस चल रहा है उसमें जो अर्निंग हो रही है अगर आप इस जीएसटी को ऐड करोगे और यह बिजनेस बहुत बूम करेगा तो वो अर्निंग भी उन्हीं को शो करनी पड़ेगी। तो

Segment 2 (05:00 - 10:00)

मेरा यह मानना है कि अगर आप सीरियस हो और अब आप चाहते हो तो आपको अपना ही डॉक्यूमेंट लगाना चाहिए। अपने ही पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट सब कुछ अपना बना के देना चाहिए। रादर देन आपके पेरेंट्स, आपके फ्रेंड्स, आपकी फैमिलीज़ या अंकल किसी का लेके। बिज़नेस खुद को करना है, खुद का बनाओ। यह जो चीज आपको कहते हैं ना लोग कि यार ई-कॉमर्स शुरू करना है ट्राई करके देख लो कैसा रिस्पांस आता है। अगर अच्छा हो तो आगे बढ़ना नहीं ऐसे नहीं होता। एक बार आपने जिस डॉक्यूमेंट से अकाउंट बना लिया और उस पे मेहनत कर ली तो बाद में फ्यूचर में आपको उसी के ऊपर टिके रहना पड़ेगा। आप वापस से नया बनाओगे तो यह जर्नी पूरी वापस शुरू करनी पड़ेगी और यह एक बहुत ही गलत डिसीजन होगा आपकी लाइफ का स्पेशली ई-कॉमर्स को लेकर। तो यह गलती बिल्कुल भी नहीं करनी है। मिथ नंबर सिक्स बिना जीएसटी के भी ई-कॉमर्स बिजनेस किया जा सकता है। [संगीत] कुछ लोग अपना कोर्स बेचने के लिए, अकाउंट मैनेजमेंट बेचने के लिए, मेंटोरशिप बेचने के लिए आपको यह लॉलीपॉप पकड़ाएंगे। मत फंसना। ई-कॉमर्स बिजनेस बिना जीएसटी के एक फेल्ड ई-कॉमर्स बिजनेस है। कैसे? मैं आपको समझाता हूं एग्जांपल के रूप में। गवर्नमेंट का यह कहना है कि ₹40 लाख से अगर आपकी कम है सेल तो आप अपने ही राज्य में सेल कर सकते हो बिना जीएसटी के। तो Meesho ने इसके अंदर एक सिस्टम लिया है कि आप सेल विदाउट जीएसटी करके सेल करो। आपको अपने ही स्टेट से ऑर्डर आएंगे। फिर जब आपको लगता है कि यार ऑर्डर्स इतने आ नहीं रहे हैं। अब आप चाहते हो पूरे इंडिया में सेल करो तो आप क्या करोगे? जीएसटी बनवाओगे। लेकिन आपको वो जो पुराना MSHO का अकाउंट है उसको बंद करके एक नया अकाउंट क्रिएट करना पड़ेगा और वापस से सारी मेहनत शुरू करनी पड़ेगी। और अगर आप अपनी वेबसाइट बनाकर भी सेल करते हो तो गवर्नमेंट का रूल है। जीएसटी काउंसिल का रूल है। अपने राज्य से बाहर से अगर आप ऑर्डर प्रोसेस कर रहे हो तो जीएसटी मैंडेटरी है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी ₹40 लाख की सेल है या सिर्फ ₹4 की सेल है। आपको जीएसटी बनवाकर ही ई-कॉमर्स बिज़नेस शुरू करना है। तो जो भी आपको यह गलत इंफॉर्मेशन देता है कि बिना जीएसटी के ई-कॉमर्स किया जा सकता है। वो बिल्कुल गलत है। और जो सॉल्यूशन भी मिल रहा है वो भी कोई काम का नहीं है। इतना उसमें फायदा नहीं होगा। फ्यूचर में प्रॉब्लम्स आएगी। मिथ नंबर सेवन कि ई-कॉमर्स बिजनेस में सीए की जरूरत नहीं पड़ती है। आप खुद YouTube से सीखकर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हो। कैसे जीएसटी भरा जाता है, कैसे फाइलिंग होती है, अकाउंटिंग कैसे होती है? देखो जो सीए है, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट है या जो जीएसटी एक्सपर्ट है, वह मिनिमम ₹500 लेता है एक महीने का। मैं बता रहा हूं कहीं पे 1000 भी लेता होगा, 1500 भी लेता होगा पर ₹500 मान के चलो। अब आपको ₹500 भी बचाने हैं और आपको बहुत बड़ा बिजनेसमैन भी बनना है। साल के ₹6000 बचा के आप एक बहुत बड़े बिजनेसमैन बन जाओगे। आपके पास बहुत सारी प्रॉपर्टीज हो जाएगी। अगर आप यह ₹6000 एक हसल फ्री दिमाग में हेडेक लिए बिना अगर किसी प्रोफेशनल को हायर करते हो तो वो आपके बिजनेस में आपकी हेल्प ही करेगा। आप समझ रहे हैं? यह जो लोग कह रहे हैं ना आपको कि कोई जरूरत नहीं है। YouTube पे वीडियो देख के खुद भी भर सकते हो। तो जीएसटी काउंसिल की तरफ से अगर कोई भी किसी प्रकार का नोटिस आता है आपको समझ में भी नहीं आएगा उसका रिप्लाई क्या देना है। ये उसको समझ में आएगा जिसका ये काम है और इसी के लिए वो उसके पैसे ले रहा है। आपको कोई नोटिस आएगा नहीं। लेकिन अगर आप खुद से भरोगे तो हो सकता है कोई गलती हो जाए। कहीं पर कोई मिसमैच हो जाए जो TCS कंपनीज़ Amazon, Flipkart, Meesho भर रही है आपके बिहाफ पर आपसे कलेक्ट करके और वो अगर सेल से मिसमैच हो गई तो प्रॉब्लम आपको हो सकती है। इसलिए ध्यान रखना है कि आपको एक्सपर्ट नहीं बनना है। एक्सपर्ट को एक्सपर्ट का काम करने दो। बिना सीए या बिना जीएसटी एक्सपर्ट के आपको लॉन्ग रन में इस बिजनेस पे कंटिन्यू नहीं करना है। आपको इनको हायर करना पड़ेगा। ओके? मिथ नंबर एट। ई-कॉमर्स मार्केट प्लेसेस पर ऑर्डर्स लाने के लिए आपको एड्स रन करने ही पड़ेंगे। ये बहुत बड़ी गलत इंफॉर्मेशन है। मैं आपको बताता हूं। देखो Amazon, Flipkart और Meesho ये तीनों मार्केट प्लेसेस का तरीका अलग है बिजनेस करने का। Amazon के ऊपर जिन प्रोडक्ट्स के ऊपर अच्छे रिव्यूज है, जो प्रोडक्ट्स क्विकली डिलीवर होंगे, जिन प्रोडक्ट्स की क्वालिटी अच्छी होगी, Flipkart के ऊपर भी सेम इसी तरीके से और अगर वो प्रोडक्ट आपका टॉप पर या नहीं या फर्स्ट या सेकंड पेज पे भी दिख रहा है तो आपको आर्डर आएंगे। हां, थोड़ा टाइम लगेगा उनको उस नंबर्स आने में या उस जो है विजिबिलिटी आने में। लेकिन अगर आपके प्रोडक्ट्स के ऊपर अच्छे रिव्यूज आ गए तो जरूरी नहीं है कि उसको कंटिन्यू करने के लिए आपको एड्स पर डिपेंडेंट रहना पड़ेगा। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि सिर्फ ऐड से ही ऑर्डर्स आते हैं। यह बहुत गलत इंफॉर्मेशन है। और अगर आपकी खुद की वेबसाइट बनी हुई है तो आपकी वेबसाइट पर भी ट्रैफिक आ सकता है। अगर कोई Amazon, Flipkart के आपके प्रोडक्ट सर्च कर रहा है और आपके ब्रांड को वो Google पे जाकर चेक करना चाहता है कि इसके ऊपर कैसे रिव्यूज है तो वहां पर अगर उसको आपकी वेबसाइट दिखती है तो एक ट्रस्ट बिल्ड भी होता है और लोग कई बार आपकी वेबसाइट पे भी आकर ऑर्डर प्लेस कर लेते हैं। इतना जरूरी नहीं है कि सिर्फ एड्स देने से ही या फिर स्पों्सर्ड एड्स करने से ही जो है आपको आर्डर आएंगे। हां वो आपको सपोर्ट करेगा। मैं कहता हूं एड्स आपको थोड़ी बहुत विजिबिलिटी दे देंगे। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि एड्स अ रन करोगे तो ऑर्डर आएंगे ही आएंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बहुत बड़ा मिथ है। इससे थोड़ा आपको ध्यान रखना है। मिथ नंबर नाइन यानी कि ई-कॉमर्स मार्केट प्लेसेस पर या ई-कॉमर्स बिजनेस में तो बहुत सारे रिटर्न्स आते हैं। ऐसा नहीं है। देखो दो तरीके के प्रोडक्ट्स होते हैं। एक

Segment 3 (10:00 - 13:00)

प्रोडक्ट्स होते हैं जिसके अंदर साइज फिटिंग के इश्यूज रहते हैं। अगर आप ये प्रोडक्ट सेल करते हो तो आपको कस्टमर रिटर्न्स आने के चांसेस बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर आप ऐसे प्रोडक्ट सेल करते हो जिसके ऊपर साइज फिट का इशू नहीं है। सिंगल प्रोडक्ट है तो कस्टमर की रिक्वायरमेंट है। कस्टमर उसे मंगाएगा और उसे प्रोडक्ट को जो है परचेस करेगा और वो रिटर्न नहीं करेगा। अब मार्केट प्लेसेस तीन तरीके के हैं। Amazon, Flipkart और Meesho। Amazon के ऊपर प्रीपेड ऑर्डर्स ज्यादा आते हैं। कैश ऑन डिलीवरी कम आते हैं। Flipkart के ऊपर कैश ऑन डिलीवरी और प्रीपेड ऑर्डर लगभग इक्वल है और Meesho के ऊपर कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स थोड़े ज्यादा रहते हैं और प्रीपेड ऑर्डर कम रहते हैं। कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स ज्यादातर कस्टमर तक पहुंचते ही नहीं है और वापस रिटर्न आ जाते हैं। और सारे मार्केट प्लेसेस पर कोई किसी प्रकार की फी नहीं लगती है। यहां पर एक पॉइंट बहुत जरूरी है जो मैं आपको बताना चाहता हूं। Amazon के ऊपर जब कोई भी प्रोडक्ट अनडिवर्ड हो के वापस आता है तो एक बार की फॉरवर्ड शिपिंग फी Amazon आपसे ले लेता है। लेकिन 45 डेज के अंदर-अंदर आपको वो फी जो है वो रिमबर्स कर देता है। आपको वापस मिल जाती है। अब आपको यह देखना है कि कौन से मार्केट प्लेसेस के ऊपर ज्यादा रिटर्न आ रहे हैं। लॉस एक चीज का होगा रिटर्न आने पे कि जो आपकी पैकेजिंग है, जो स्लिप आपने लगाई है, जो एफर्ट्स आपने डाले हैं, जो लेबर आपने लगाई है, वो जो खर्चे हुए हैं, उसका आपको नुकसान भुगतना पड़ेगा और यह आपको आइडेंटिफाई करना पड़ेगा कि कौन से मार्केट प्लेसेस के ऊपर ज्यादा रिटर्न्स आ रहे हैं, ज्यादा आरटीओस आ रहे हैं या ज्यादा अनडिवर्ड आ रहे हैं। ठीक है? और मिथ नंबर 10 जो सबसे बड़ी गलती लोग कर रहे हैं और लोगों को यह लगता है कि इसी वजह से उनको ऑर्डर्स नहीं आ रहे हैं। उनको लगता है कि ज्यादा लिस्टिंग करेंगे ना हम लोग तो बहुत ज्यादा ऑर्डर्स आएंगे। हमने 500 लिस्टिंग कर दी, 1000 लिस्टिंग कर दी तो हमें बहुत ज्यादा ऑर्डर्स आएंगे। ऐसा नहीं होता है। मेरा यह मानना है मैं पर्सनली बिलीव करता हूं क्वालिटी ओवर क्वांटिटी। अगर आपके पास 10 से 15 क्वालिटी के प्रोडक्ट है 10 टू 15 ऐसे प्रोडक्ट्स जिसकी पैकेजिंग, लिस्टिंग, फोटोग्राफी एक्सीलेंट आपने कर रखी है तीनों मार्केट प्लेसेस पे। अब उसके आप थोड़े-थोड़े बंडल भी बना सकते हो। 10 प्रोडक्ट्स के आप कितने सारे कॉम्बो पैक ऑफ टू, पैक ऑफ थ्री बना सकते हो। आपको ऑर्डर्स भी आएंगे, उस पर रिव्यूज भी आएंगे, उसके ऊपर सेल्स भी मिलेगी, आपको प्रॉफिट भी बनेगा। वहीं पर अगर आप बहुत सारे लिस्ट कर दोगे ना तो एल्गोरििदम आपके मान के चलिए 70 टू 80% कैटलॉग को जो है ना डेड कर देगा। नहीं करेगा। नहीं विजिबिलिटी आएगी। मार्केट प्लेसेस के ऊपर सेल्स नहीं मिलेगी। आपके कुछ ही प्रोडक्ट्स को आपको कंटिन्यू सेल्स देते रहेंगे। भले ही आपके 600 7000 प्रोडक्ट आपने लिस्ट कर रहे हैं। सबके ऑर्डर्स नहीं आएंगे। यह बात आपको ध्यान रखनी है। ज्यादा प्रोडक्ट्स रखने से ज्यादा ऑर्डर्स नहीं आते हैं। क्वालिटी के आते हैं। ये चीज का आपको हमेशा ध्यान रखना है। तो ये 10 मिथ मैंने आप लोगों के साथ शेयर किए हैं। वीडियो अच्छा लगा है तो लाइक जरूर कीजिएगा। एक अच्छा सा कमेंट जरूर दीजिएगा। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब आप लोगों के अच्छे-अच्छे कमेंट्स आते हैं। मैं पढ़ता हूं। मैं कोशिश करता हूं उन सभी का रिप्लाई देने की भी। कोई सवाल है तो जरूर पूछिएगा। ई-कॉमर्स बिज़नेस सीखना चाहते हो। अगर पेड मेथड वन टाइम फी के साथ तीनों मार्केट प्लेसेस कवर करना चाहते हो। पिन कर दिया है। कमेंट मैंने चेक करिएगा। पसंद आए तो लीजिएगा। नहीं लेना है कोई बात नहीं। फ्री में सीखिए। पूरी वीडियो प्लेलिस्ट बना रखी है। वन बाय वन सारे वीडियोस हैं। चेक आउट करिए। सीखिए अपने ई-कॉमर्स बिज़नेस को शुरू करिए यार और बहुत तरक्की करिए। थैंक यू सो मच गाइस इस वीडियो को पूरा देखने के लिए। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक के लिए, टेक केयर।

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