Git Explained in 5 Minutes With Real Life Example (Hindi)
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Git Explained in 5 Minutes With Real Life Example (Hindi)

5 Minutes Engineering 07.05.2026 598 просмотров 44 лайков

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Оглавление (2 сегментов)

Segment 1 (00:00 - 05:00)

हेलो एंड वेलकम दोस्तों टू फाइव मिनट्स इंजीनियरिंग। आज का वीडियो वाकई बड़ा कमाल का होने वाला है दोस्तों क्योंकि आज के इस वीडियो के अगले पांच मिनटों में ही मैं आपको गिट क्या होता है ये समझा दूंगा। ये क्या बवाल है और काहे डेवलपर्स के लिए इतना बड़ा वरदान है ये सारी बातें क्लियर हो जाएंगी। शुरुआत करते हैं रियल लाइफ रिलेटेबल एनालॉजी एग्जांपल के साथ। स्कूल प्रोजेक्ट हम सबने किए होंगे। नौवीं दसवीं में भैया अपने को स्कूल प्रोजेक्ट ग्रुप प्रोजेक्ट दिए जाते थे। है कि नहीं? तो यार हमको भी मिला था यार एक ग्रुप प्रोजेक्ट और बोला गया था कि सोलर सिस्टम के ऊपर एक रिसर्च करो और एक फाइनल प्रोजेक्ट फाइल सबमिट करो। उसके ऊपर तुमको नंबर मिलेंगे। तो मैंने भी अपने यार दोस्तों का भैया एक ग्रुप पे झुंड बना लिया और हम बड़े एक्साइटेड थे जोश में थे कि चलो भैया इस प्रोजेक्ट को बढ़िया तरीके से जो है अंजाम देंगे लेकिन गड़बड़ होना शुरू हो गया केओस मैं कुछ लिखता था तो उसी लाइन का कॉन्फ्लिक्ट सामने से आता था मेरा दोस्त लिख देता था वो कभी कबभार मेरे लिखे गए वाक्य को ओवराइट कर देता था कॉन्फ्लिक्ट कर देता था मिटा देता था रिमूव कर देता था अपना खुद का लिख लेता था फिर मेरे दिमाग में सनक चढ़ जाती थी कि अच्छा इस बार तूने मेरी लाइन मिटाई अगली बार मैं तेरी लाइन मिटाऊंगा और देख मैं कुछ नया लिखूंगा भाई ये क्या चल रहा है ये कौन सा ग्रुप प्रोजेक्ट है ये तो केओस है लेकिन हमें केओस से कोलैबोरेशन तक की जर्नी तय करनी थी जिसमें गिट आपकी मदद करता है। डेवलपर की दुनिया में भी यही होता है। जब बहुत सारे डेवलपर्स मिलके एक प्रोजेक्ट के ऊपर काम करते हैं तो बहुत सारी फीचर फंक्शनैलिटीज होती हैं। एक फीचर फंक्शनैलिटी को ये किसी और तरीके से इंप्लीमेंट कर रहा है। कई बार ये उसके इंप्लीमेंटेशन को ओवराइट इसको मिटा रहा है और अपना खुद का कुछ लिख रहा है। कुछ बार भैया यहां पे चेंजेस किए जा रहे हैं एकिस्टिंग कोड में जबकि जिसने लिखा था उसको पता ही नहीं किसने चेंज किए। तो ऐसी बहुत सारी समस्या बहुत सारा केओस जो है वो जनरेट हो जाता है और उसमें अपना गिट जो है बड़ा काम आता है क्योंकि वो एक प्रॉपर एथिकल कोलैबोरेशन लाने में मदद करता है आपके वर्क स्पेस में। जैसे कि फॉर एग्जांपल शुरुआत हम करते हैं अपने रिपॉजिटरी से। तो हमारे जो ग्रुप प्रोजेक्ट में एक डब्बा हमने सामने रख दिया। एक बॉक्स ने बोला भैया देखो अपने प्रोजेक्ट में जो भी रिसर्च होगा जो भी विजुअलाइजेशन फाइल्स होंगी जो भी अपनी मेन टॉपिक फाइल्स होंगी ये सब की सब भैया इस बक्से के अंदर रहने वाली है। इस बक्से को बोल दिया है आपका रेस्पेक्टिवली प्रोजेक्ट बॉक्स या टेक्निकली बोला जाए तो रेपो शॉर्ट फॉर्म में और फुल फॉर्म में इसको रेपोजिटरी बोला जाता है जो अपन गेट इनट जो इनिशियलाइज करते हैं और डॉट गेट फोल्डर जो है आपका क्रिएट होता है। तो इसमें आपका सब रहता है। इसमें हिस्ट्री रहती है, कोड फाइल रहती है, रीड मी फाइल रहती है, रिप्रेजेंटेशन फाइल रहती है। सारी किस्म की प्रोजेक्ट फाइल्स आपकी इस एक रिस्पेक्टिवली रेपो के अंदर मौजूद रहता है। उसके बाद आता है मेन मुद्दा आपके कमिट का। आप जो भी कुछ काम करते हो आपको लगता है कि ये काम अभी सही है ये ठीक है तो आप क्या करते हो उसको फाइनल कर देते हो। आप उसको क्या करते हो जैसे कि गिट कमिट कर देता है। लेकिन इसमें एक बहुत खास बात है जो आपको समझनी है जो कि टाइम ट्रेवल वाला कांसेप्ट इंट्रोड्यूस करता है गिट के अंदर। तो मैंने क्या किया भैया देखो 10 जनवरी को अपना जो है मुझे सन के बारे में थोड़ा बहुत लिखना था। मैंने लिख दिया। फिर उसके बाद भैया 11 जनवरी को मैंने उस सन के इनेशन में कुछ और ऐड किया और वो फाइनललाइज़ कर दिया। तो मैं उसकी एक फोटोकॉपी बनाते जा रहा हूं। हर वर्जन की 10 जनवरी का एक अलग वर्जन 11 12 का एक अलग वर्जन अब मेरे को क्या समझ में आया यार ये जो 12 वाले में मैंने इनफेशन ऐड की थी जो लिखी थी अरे यार ये तो गड़बड़ निकली यार यहां तो गलती हो गई है तो फिर टेंशन ना लो आपने 11 और 10 तारीख का जो फोटो कॉपी है वो इंस्टेंस ऑलरेडी कैप्चर करके रखा है आप पीछे जा सकते हो समय में आप फिर इसका इस्तेमाल कर सकते हो जी को दिक्कत की बात नहीं है ये टाइम ट्रेवल कांसेप्ट आपकी गिट कमिट की वजह से यहां पे पॉसिबल हो पाता है उसके बाद जब हम ग्रुप प्रोजेक्ट की बात करते हैं तो ऑब्वियस सी बात है बहुत सारे मेरे यार सहपाठी यार मेरे साथ जुड़ गए थे राहुल था प्रिया था अमन था और मैं था। तो हम सब ने अलग-अलग भैया गोले पकड़ लिए और सोलर सिस्टम का प्रोजेक्ट था तो उसके ऊपर रिसर्च करके हम लोगों ने अपने नोट्स बनाए और पैरेलली उनके ऊपर काम किया। जैसे कि भैया ये लेट्स से राहुल जो है मार्स के ऊपर काम कर रहे हैं प्रिया सैटर्न के ऊपर, अमन जुपिटर के ऊपर और मैं अर्थ के ऊपर लिख रहा हूं। तो हमने अपने अलग-अलग जो नोट्स हैं वो पैरेलली बनाए। कैसे? ब्रांचेस जो अपना ब्रांचिंग का कांसेप्ट है कि भैया सब इंडिपेंडेंटली एक दूसरे को कॉन्फ्लिक्ट किए बिना अपना काम जो है इंडिपेंडेंटली कर सकते हैं। दैट इज़ गिट ब्रांच। आपको समझना है। बहुत इंपॉर्टेंट चीज़ है। लेकिन भाई देखो काम भले ही अलग-अलग तुम कर रहे होंगे लेकिन अल्टीमेटली ये सारी चीजें एक साथ समेटनी तो पड़ेंगी ना। एक फाइनल मास्टर में ऐड तो करनी ही पड़ेंगी ना। एक मास्टर फाइल जो आपकी रहती है जो लेट्स से आप डायरेक्टली टीचर को सबमिट करने के लिए देने वाले हो। तो कंबाइन तो करना पड़ेगा ना। तो ये जितना भी चीजें आपने बनाई है इनको कंबाइन तो करना पड़ेगा। मर्ज कहते हैं उसे मर्ज। तो हम यहां पे क्या करते हैं? गिट मर्ज कर देते हैं। जितने भी हमारे ब्रांचेस का जो भी अभी तक प्रोग्रेस है जो भी काम हुआ है उसको एक ही फाइल में मर्ज कर देना और फिर उसके बाद उसे सबमिट करना। लेकिन कई बार मर्ज करते हुए दिक्कत आती है। क्या दिक्कत आती है? मर्ज कॉन्फ्लिक्ट जिसे कहते हैं। क्या होता है यार? मैंने ना सन के ऊपर कुछ चीजें लिखी। मेरे दोस्त ने भी अब किसकी माने? इसके रिस्पेक्टिवली ब्रांच की माने या इसकी माने। यानी कि मैं मेरी मनाऊं या फिर मेरे दोस्त की मानूं कि भाई तूने इनफार्मेशन जो लिखी है या मैंने जो सन के बारे में इनफार्मेशन लिखी है कि इसे फाइनललाइज किया जाए। तो इस तरीके से ह्यूमन इंटरवेंशन आता है और फिर दोनों में से एक को सेलेक्ट किया जाता है और फिर उसे आगे फर्दर अपने मास्टर में ऐड किया जाता है। फाइनली अपने मास्टर फाइल में ऐड करके प्रोजेक्ट जो है वो सबमिट किया जाता है। इसे कहते हैं मर्ज कॉन्फ्लिक्ट। तो मर्ज इतनी आसानी से भी नहीं होता। बहुत बार आपको ये कॉन्फ्लिक्ट दिखता है। फिर ह्यूमन इंटरवेंशन करके आपको उसे रिसॉल्व करना पड़ता है। और एक आखिरी और इंपॉर्टेंट चीज ये जितना भी जो भी बक्सा अपन ने रेपो वगैरह रखा हुआ है ये अपने घर के अंदर रखा हुआ है। अब मान लीजिए कल को अगर घर के अंदर आग लग गई। बक्सा जल के राख हो गया। आपकी इतनी महीने की जो मेहनत है वो भैया धुल गई। धुल गई नहीं जल गई धुली नहीं भैया वो तो जल गई राख हो गई परवड़ेगा नहीं ना तो आप क्या करते हो स्मार्ट स्टूडेंट्स हो तो हमने क्या किया था पता है ऐसा ही एक बक्से का जो कॉपी है वो रिस्पेक्टिवली अपने स्कूल के लाइब्रेरी में रख के आ गए स्कूल की लाइब्रेरी ये मेरे लिए एक रिमोट रिपॉजिटरी है जो मेरे लोकल ही नहीं है मेरे घर में नहीं है कहीं और है जैसे कि स्कूल की लाइब्रेरी तो उसके

Segment 2 (05:00 - 05:00)

अंदर रख दिया जहां पे सभी अलग-अलग जो अपने स्टूडेंट्स हैं अपने जो रेस्पेक्टिवली रेपो बॉक्सेस हैं प्रोजेक्ट बॉक्सेस हैं वो यहां पे रख सकते हैं। तो जब हम लोकल से अपने रिमोट में अपना बॉक्स डालते हैं तो उसे पुश करना कहते हैं। क्या कहते हैं इसे? इसे गिट पुश कहते हैं कि भैया जैसे कि फॉर एग्जांपल ये स्कूल लाइब्रेरी मतलब आपका गिट हब ये क्या हो गया ghub तो जब भी भैया आपको अपनी जो रेस्पेक्टिवली फाइल है जो रेपो है ये यहां पे फाइल्स अपने रिमोट रिपोजिटरी में ऐड करनी होती है तो आप पुश कमांड देते हो तो गिट पुश और जब भैया आपने गिट हब में जो फाइल्स रखी हुई है वो अगर आपको लोकल सिस्टम में चाहिए होंगी तो आप गिट पुल करते हो तो पुश और पुल ये दो इंपॉर्टेंट चीजें हैं जो आपको समझनी है और होपफुल्ली ये सारा मामला समझ में आ गया होगा कैसे केओस से एक प्रॉपर कोलैबोरेटिव मैनर में हम अपने प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट कर सकते हैं गिट की मदद से।

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