The Bitter Truth of Viral Stories: Stop Living Someone Else's Life Lesson.
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The Bitter Truth of Viral Stories: Stop Living Someone Else's Life Lesson.

Critical Thinking Forum 28.04.2026 9 966 просмотров 536 лайков

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In this video, we explore how to think critically about the moral stories and parables shared by elders, leaders, and teachers. Learn how to accept valuable lessons while rejecting misconceptions, and understand the deeper messages behind everyday stories. Key Topics: • The purpose and meaning behind moral stories and parables • How to differentiate between truths and lies in moral messages • The importance of critical thinking in accepting life lessons • The story of the monk and the minister as a lesson in needs and priorities • Types of human needs: money, power, relationships, fame, approval, knowledge, and happiness • How to avoid the pitfalls of craving wealth, power, and fame • The importance of independence, self-knowledge, and balanced living • Practical tips for earning, saving, and living a fulfilled life Timestamps: 00:00 - Introduction to the importance of critical analysis of moral stories 00:30 - The story of the monk and the minister: lessons on needs and priorities 01:32 - Why we accept stories from elders and leaders without questioning 03:01 - The main message: life’s true needs and social influences 04:27 - Types of needs: money, power, and happiness – what's essential? 05:53 - The balance between wealth and happiness: decluttering desires 07:22 - The intoxicating nature of power and responsibility 09:46 - The significance of relationships and emotional independence 12:13 - Fame and recognition: the pursuit versus the impact 14:09 - The need for approval: how to stay true to yourself 16:34 - The story of King Sibi: the importance of kindness and justice 18:03 - The value of knowledge and avoiding its excesses 20:55 - Lessons from the story of a beggar: happiness beyond money and power 23:20 - Practical steps: earning, saving, and living a balanced life 24:50 - Final reflections: critical thinking and staying on the right path #TheBitterTruth #CriticalThinking #LifeLessons #MoralStories #PersonalDevelopment #Mindset #Philosophy #SelfImprovement #Wisdom #TruthVsLies #BalancedLiving #MentalClarity #SelfKnowledge #Parables #DeepThinking

Оглавление (15 сегментов)

Introduction to the importance of critical analysis of moral stories

हेलो दोस्तों, अक्सर हमारे जो बड़े बुजुर्ग होते हैं, जो नेता लोग होते हैं, जो गुरु होते हैं, जो बाबा लोग होते हैं, वो हमें बड़ी सारी कहानियां सुनाते हैं और वो उन कहानियों के माध्यम से हमें एक मोरल मैसेज देते हैं। हमें एक ऐसा मैसेज देते हैं जो कि उनके हिसाब से बिल्कुल सही है और हम अक्सर उन मैसेजेस को एक्सेप्ट कर लेते हैं बिना सोचे समझे। जबकि एक्चुअली उन मैसेज के अंदर कुछ सच और कुछ झूठ होता

The story of the monk and the minister: lessons on needs and priorities

है। तो दोस्तों आज हम डिस्कस करेंगे कि किस तरीके से ये जो कहानियां होती हैं उसकी हम क्रिटिकल एनालिसिस करें और जाने कि हम उसको क्या उसमें एक्सेप्ट करें और क्या चीजें उसमें रिजेक्ट करें और कैसे हम उसका बेस्ट यूज करें। तो चलिए आज के लेसन को स्टार्ट करते हैं। [प्रशंसा] दोस्तों एक बड़ी फेमस स्टोरी जो है या पैरेबल मुझे कुछ दिनों पहले फॉरवर्ड मिली एक राइटर हैं जिनका नाम है जेएल कॉलिन की और यह जो पैरेबल है या कहानी है यह एक मक की और एक मिनिस्टर की कहानी है। यह कहानी कुछ इस प्रकार से है कि दो बहुत ही क्लोज फ्रेंड थे जो कि एक समय के बाद में अलग-अलग हो गए और वो अलग-अलग डायरेक्शन में उनकी ग्रोथ हुई। अलग-अलग डायरेक्शन

Why we accept stories from elders and leaders without questioning

में वो बड़े हुए। एक जो है वो एक मक बन गया। भिक्षु बन गया और दूसरा जो है बहुत ही रिच और पावरफुल मिनिस्टर बन गया राजा का। काफी सालों बाद में वो दोनों एक दूसरे से मिले। तो मिनिस्टर ने देखा कि यह जो दूसरा उसका दोस्त है बड़ा गरीब है। बड़ा दुबला पतला है और बड़े मतलब गंदे से कपड़े पहने हुए हैं। हाथ में एक उसके कटोरा है। उसको बड़ी दया सी आई और उसने कहा कि क्या तुम जानते हो कि अगर तुम राजा की सेवा करना सीख लो तो तुम्हें जो है राइस और बींस मतलब कि दाल चावल पे ही जिंदा नहीं रहना पड़ेगा। तो इस बात पर जो मक था भिक्षु था उसने कहा कि अगर तुम केवल दाल चावल या राइस और बींस पर जिंदा रहना सीख लो तो तुमको राजा की सेवा नहीं करनी पड़ेगी। अब इस कहानी के बाद में जो राइटर हैं उन्होंने मैसेज यह दिया कि हमें अपनी जिंदगी की जरूरतों को कम से कम करना चाहिए। जो मक है उसकी तरीके से रहना चाहिए। भिक्षु के पैसे और पावर के पीछे नहीं भागना चाहिए। अब दोस्तों ये जो पैरेबल्स होती हैं या ये कहानियां जो मोरल स्टोरीज होती हैं ये एक छोटी-छोटी कहानियां होती हैं जो कि अक्सर आपने देखा होगा आपके पेरेंट्स हैं या आपके जो टीचर्स होते हैं जो गुरु

The main message: life’s true needs and social influences

होते हैं बाबा लोग होते हैं पॉलिटिशियंस होते हैं सब इनका इस्तेमाल करते हैं आपको कोई मैसेज देने के लिए जो कि मोरल हो सकता है एथिकल हो सकता है धार्मिक हो सकता है स्पिरिचुअल हो सकता है इसके अंदर जो है कुछ ह्यूमन कररेक्टर र्स का इस्तेमाल किया जाता है। जिनके थ्रू आपको एक इंपॉर्टेंट मैसेज दिया जाता है। तो आज का जो हमारा लेसन है उसके अंदर हम सीखेंगे कि क्यों हमें इस तरीके की जो कहानियां होती हैं जो हमें रोज-रोज़ सुनाई जाती हैं। आपको Facebook पे फॉरवर्ड की जाती हैं। WhatsApp किताबों में आप पढ़ते हैं। बाबाओं से आप सीखते हैं। उनको हमें क्यों एज इट इज एक्सेप्ट नहीं करना चाहिए? क्यों उनके जो मैसेजेस होते हैं वह सही नहीं होते हैं? उसमें हमें कुछ चीजों को रिजेक्ट करने की जरूरत है। ऐसा नहीं है कि उसमें कुछ सही नहीं है। हम उसमें से कुछ सही चीजें सीख सकते हैं। लेकिन साथ-साथ में हमें क्या उससे नहीं सीखना है। यह चीजें भी बहुत जरूरी हैं जो आज हम सीखेंगे। देखिए जो मेन मैसेज है इस स्टोरी का वो यह है कि जो भिक्षु की लाइफ है वह किसी भी तरीके से कम नहीं है। जो पावरफुल लोग होते हैं, बहुत पैसे वाले लोग होते हैं जैसे मिनिस्टर्स हो गए, आईएएस ऑफिसर्स हो गए, आईपीएस ऑफिसर्स हो गए या मान लीजिए कि आप देखिए बहुत सारे जो आपके इंडस्ट्रियलिस्ट होते हैं उनसे कम नहीं होती है। तो, यह मोटिवेट करता है आपको कि आप पैसे के पीछे ना भागे। लाइफ

Types of needs: money, power, and happiness – what's essential?

में सिंपल तरीके से रहें। इसमें कुछ सच तो है। तो अब हम इसमें सेवन टाइप की नीड्स के बारे में बात करेंगे। देखिए इसमें सिर्फ एक नीड की बात करी गई है पैसे की। लेकिन हम बात करेंगे कि इसमें हम सेवन टाइप्स की नीड्स को हमें कम करने की जरूरत है। पहली जो हमारी नीड है वो है पैसे की नीड। देखिए हमें यह समझना पड़ेगा कि जब भी हम कोई पैसा कमाते हैं तो उसके लिए हमें समय देना पड़ता है। आप रोज 8 से 10 घंटे काम करते हैं। हफ्ते में 5 छ दिन काम करते हैं तब जाकर के आपको वो पैसा मिलता। आपको यह समझना होगा कि आपके पास में हजारों करोड़ रुपए भी हो तो भी आपकी जो लाइफ स्पैन है, जिंदगी का जो ड्यूरेशन है, वह करीब-करीब उतना ही रहता है। आप वही 80- 100 साल के आसपास में जीते हैं जो कि एक आम आदमी जी। आप कोई भी पैसा खर्चा करके जिंदगी नहीं खरीद सकते। तो इसका मतलब यह है कि आप जब भी कोई काम करते हैं तो आप अपनी लाइफ टाइम से जो आपकी जिंदगी का एक पार्ट है, जिंदगी का एक टुकड़ा है उससे आप उसको पेमेंट करते हैं उस पैसे को कमाने के लिए। और इसीलिए अगर आपके पास में एंजॉय करने का टाइम नहीं है तो फिर ऐसे पैसे को कमाने से फायदा ही क्या है? तो लाइफ में हमें यह भी देखना चाहिए कि किस तरीके से हम अपनी लाइफ की हैप्पीनेस को मैक्सिमाइज

The balance between wealth and happiness: decluttering desires

करें और उसके लिए जरूरी है कि हम अपनी जरूरतों को कम से कम करें। अपने खर्चों देखिए कभी आप इसको ठंडे दिमाग से सोचिए। तो आपको खाने के लिए क्या चाहिए? दो-तीन समय आपको खाना चाहिए होता है। ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर हो गया। सोने के लिए एक बैडरूम चाहिए होता है। आपको जो है अगर लिमिटेड इनकम भी है तो भी आप इन सारी नीड्स को फुलफिल कर सकते हैं। भाई ज्यादा से ज्यादा आपको एक कार चाहिए, एसी चाहिए यही सब चीजें चाहिए और कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप 5 लाख की कार में चलें कि 5 करोड़ की कार में चलें। कि आप 10 कमरे के मकान में रहें कि आप दो रहें। ये सारी चीजें आपको ईगो को तो सेटिस्फाई कर सकती हैं। दूसरों को हम इंप्रेस कर सकते हैं। लेकिन इससे हैप्पीनेस में बहुत ज्यादा इजाफा नहीं होता। लेकिन इन पैसे को कमाने के लिए जो हमने जिंदगी गवा दी वो हमें कभी वापस नहीं आएगी। इसीलिए जितनी कम आपकी जरूरतें हैं उतना कम आपको काम करना पड़ेगा और जितनी कम आप खर्चा करेंगे उतना ज्यादा पैसा आप सेव कर पाएंगे और जितना ज्यादा आप पैसा सेव करेंगे उतनी जल्दी आप ऐसे काम को छोड़ सकते हैं जो आपको पसंद ना हो और ऐसे काम को कर सकते हैं जो आपको पसंद हो। अपने पैशन को फॉलो कर सकते हैं। अपनी लाइफ का जो पर्पस है उसको फॉलो कर सकते हैं। जल्दी रिटायर हो सकते हैं। अपनी जिंदगी को एंजॉय कर सकते हैं। तो इसीलिए सबसे पहली इंपॉर्टेंट है चीज है कि आपको अपनी वेल्थ की या पैसे की जो हवस है जो उसकी नीड है उसको कम करना चाहिए। दूसरी जो जरूरत हमें

The intoxicating nature of power and responsibility

कम करने की जरूरत है पावर की। दोस्तों पावर जो होती है बड़ी इनटॉक्सिकेटिंग होती है। बड़ी नशीली होती है। इसमें जो नशा होता है वो किसी भी चीज से किसी भी शराब या ड्रग से ज्यादा होता है। और अक्सर इसीलिए लोग पावर के पीछे भागते रहते हैं। क्योंकि जिसके पास पावर होती है उसके सामने दुनिया झुकती है। लेकिन वो इस बात को नहीं समझ पाते कि पावर का दूसरा नाम होता है रिस्पांसिबिलिटी। जितनी ज्यादा आपके पास पावर है उतनी ज्यादा आपकी रिस्पांसिबिलिटी है। एक आम आदमी जो है वह अपनी फैमिली के लिए रिस्पांसिबल है। लेकिन अगर आप एक एसपी है तो पूरे डिस्ट्रिक्ट के लिए रिस्पांसिबल हैं। एक सीएम है तो पूरे स्टेट पीएम है तो पूरे कंट्री के लिए रिस्पांसिबल हैं। और यह भी बात आपको समझनी पड़ेगी कि जब भी आप पावर का इस्तेमाल करते हैं तो आप डर क्रिएट करते हैं और नफरत क्रिएट करते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] यहां तक कि अगर एज अ पेरेंट्स, हम बच्चों को भी पावर का इस्तेमाल करें, उनको डराएं, मारें, पीटें, धमकाएं, तो वह भी हमसे नफरत करने लगते हैं। जबकि हम उनको बहुत प्यार करते हैं और उनकी बेहतरी के लिए वह काम करते हैं। और अगर आप किसी आम आदमी के लिए यूज़ करेंगे, तो वह तो आपका दुश्मन ही बन जाएगा। और इसीलिए जिनके पास पावर रहती है, उनसे लोग जितना डरते हैं, वह भी उतना ही डरते हैं लोगों से। आपने देखा होगा कि बहुत सारे प्राइम मिनिस्टर हैं, प्रेसिडेंट्स हैं, मिनिस्टरर्स हैं, आईएएस, आईपीएस ऑफिसर्स हैं जो कि अरेस्ट हो गए क्योंकि जब आपके हाथ से पावर चली जाती है तो जो नई सरकार आती है वो अक्सर जो है आपको अरेस्ट कर लेती है और कितने सारे एग्जांपल्स आपके चारों तरफ हैं। इसीलिए पावर के पीछे मत भागिए। कम से कम पावर का इस्तेमाल करिए। अब पावर का मतलब यह नहीं कि आपके पास सरकारी पावर हो। पैसे की पावर हो सकती है और भी किसी तरीके है। एज अ पेरेंट्स आपके पास में एब्सोल्यूट पावर एक तरीके से होती है बच्चों की। एज अ बॉस आपके पास पावर रहती है। हस्बैंड वाइफ की अपनी-अपनी पावर्स रहती हैं। इन पावर का इस्तेमाल कम से कम करिए। जहां तक हो सके लोगों को पर्सुएट करिए। समझाने की कोशिश करिए। उनको मोटिवेट करने की कोशिश करिए। पावर का जितना कम आप इस्तेमाल करेंगे उतनी आपकी जिंदगी बेटर रहेगी। अब हम आते हैं तीसरी बड़ी इंपॉर्टेंट नीड की जो कम करने की जरूरत है और वह है रिश्तों की नीड, इंटिमेसी की नीड। दोस्तों, यह जो

The significance of relationships and emotional independence

रिलेशनशिप्स होते हैं, वो बहुत जरूरी हैं हमारे लाइफ में क्योंकि वो उससे हमें प्यार मिलता है, अफेक्शन मिलती है। एक सिक्योरिटी मिलती है, एक बॉन्डिंग होती है आपस में। तो बिना रिलेशनशिप के जिंदगी बहुत नीरस है। आप लाइफ को एंजॉय नहीं कर सकते। लेकिन आपको यह भी समझना पड़ेगा कि जितना ज्यादा आप रिश्तों पर डिपेंडेंट रहते हैं अपनी खुशी के लिए उतना ही कम आप अक्सर खुश हो पाते हैं। क्यों? क्योंकि अगर कोई भी व्यक्ति आपके एक्सपेक्टेशन के हिसाब से पूरा नहीं उतरता तो आपको डिसपॉइंटमेंट होता है, दुख होता है। आप दूसरों के लिए 10 काम करते हैं। वह रेसिप्रोकेट नहीं करते। वह आपको बदले में नहीं करते। आप दुखी हो जाएंगे। इसीलिए आपकी कोशिश होनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा इंडिपेंडेंट हो। अपनी जो आपकी जरूरत है, रिश्तों की जो जरूरत है, फैमिली की जरूरत है, फ्रेंड्स की जरूरत है, सोसाइटी में नाम की जरूरत है, इसको आप कम करें। जितना कम करेंगे, उतना आप सुखी रहेंगे। तो हमें क्या करना चाहिए? हमें लोगों की जगह पे अपना अटेंशन ऐसी जगह पे डायवर्ट करना चाहिए। खुशी का स्रोत ऐसी जगह से हमें मिलना चाहिए जो कि किसी और पर डिपेंडेंट ना हो। जैसे बुक्स पढ़ना है, आप गेम खेलते हैं, म्यूजिक सुनते हैं, गाते हैं, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट प्ले करते हैं। आप वॉक करिए, एक्सरसाइज करिए, कोई नई स्किल सीखिए। अपने पैशन को फॉलो करिए, कोई हॉबी डेवलप करिए। यह सारी चीजें जब आप करेंगे दोस्तों तो आप किसी दूसरे पर डिपेंडेंट नहीं है क्योंकि यह खुशी का जो स्रोत है आपके अंदर से आता है। इसीलिए आपको इंडिपेंडेंट होने की जरूरत है। जितना कम आप लोगों से एक्सपेक्ट करेंगे, जितने कम लोगों से मतलब रखेंगे, जितना अपने काम से काम रखेंगे, उतना ही ज्यादा आपकी जिंदगी में सुखी होंगे। अब हम आते हैं दोस्तों चौथी बड़ी इंपॉर्टेंट चीज पे जो आज के समय में बड़ी पॉपुलर है वो है फेम की नीड प्रसिद्ध होने की। आप बड़ा पॉपुलर होना चाहते हैं। आप चाहते हैं कि आपको लोग जाने आप बड़े फेमस हो जाएं। [गला साफ़ करने की आवाज़] देखिए कोई भी आदमी अगर ऐसी इच्छा करता है इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन वो आपको भी वहां पे भी नीड को कम करने की जरूरत है। खासतौर से आपको कंप्रोमाइज करने की जरूरत नहीं है। जो आपके बेसिक प्रिंसिपल्स

Fame and recognition: the pursuit versus the impact

हैं फेम पाने के लिए। आजकल आप देखते होंगे बहुत सारे लोग ऐसी-ऐसी रील्स बनाते हैं, व्गर रील्स बनाते हैं, गाली गलौज करते हैं। ऐसी चीजें जिसके लिए अगर उनके पेरेंट्स हो तो उनको शर्म आएगी कि ऐसा क्यों करते हैं? उनके फैमिली मेंबर को शर्म आएगी। लेकिन वो इसलिए करते हैं क्योंकि उनको पॉपुलरिटी मिलती है। बहुत व्यूज बढ़ जाते हैं उनके। उसी तरह कई लोग होते हैं बड़े ग्लैमरस प्रोफेशंस को ज्वाइन करते हैं। जैसे फिल्म है या क्रिकेट है या न्यूज़ एंकर बनना चाहते हैं, जर्नलिस्ट बनना चाहते हैं, यूबर बनना चाहते हैं या सिविल सर्वेंट्स बनना चाहते हैं। जहां पे अक्सर वो अपनी रील बना करके लोगों को दिखाते रहे। आपको ये समझना पड़ेगा कि जितना ज्यादा आप फेमस होंगे उतना ज्यादा आपकी छोटी-छोटी जो एकशंस हैं उनका स्क्रूटनी होगा और आपकी मामूली से मामूली एक्शन पे आपकी ट्रोलिंग होगी। देखिए मैं बहुत समय से सोशल मीडिया पे एक्टिव हूं। कोहरा पे मैं एक्टिव हूं। YouTube पे भी वीडियोस डालता रहता हूं। और मैं यह जानता हूं कि कभी भी आप कुछ भी कहें आपको क्रिटिसिज्म फेस करना पड़ेगा। कुछ ना कुछ लोग ऐसे होंगे जो आपकी बात से नाराज होंगे। चाहे आप जितनी भी सही बात करें। और अगर आपने फेमस होने के लिए कुछ ऐसी हरकतें कर दी जो कि वाकई में शर्मनाक हैं तो आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि कितनी आपकी ट्रोलिंग होगी और इससे क्या होगा कि आपको जो फेम से थोड़ा बहुत नाम होगा उससे 100 गुना आपको दुख मिलेगा। इसीलिए आपको जो फेम की जरूरत है उसको आप कम से कम करें। ज्यादा फेमस होने की कोशिश ना करें। अच्छी एक रिस्पेक्ट बनाएं। जो लोग आपको 10 20 लोग भी जानते हैं, वह आपकी इज्जत करें, दिल से इज्जत करें क्योंकि आपके अंदर एक कररेक्टर है। आप जो कहते हैं, वह करते हैं। आप दोस्तों के समय पर खड़े होते हैं। यह सब चीजें करें। इससे आपको सेटिस्फेक्शन होगा। फेमस होने से आपको ज्यादा फायदा नहीं

The need for approval: how to stay true to yourself

मिलेगा। अब दोस्तों, हम बात करते हैं एक और बहुत बड़ी नीड की और यह होती है नीड ऑफ़ अप्रूवल। मतलब हम यह चाहते हैं कि जो भी हम काम करें वह सब लोग उससे एग्री करें कि हां भाई तुम अच्छा काम कर रहे हो। हम अपने फैमिली के हिसाब से काम करते हैं। फैमिली को खुश करने के लिए सोसाइटी काम करते हैं। मतलब जो चीजें लोगों को पसंद हो जो तुमको पसंद हो वही बात करेंगे। तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे। एक बड़ी पुराना गाना है। तो कई लोग यह करते हैं कि भाई जैसा कह रहे हैं, मां-बाप कह रहे हैं, बच्चे कह रहे हैं, भाई-बहन कह रहे हैं, बॉस कह रहे हैं, सब मान लो। लेकिन आपको मैं बताऊं यह आपकी जिंदगी को नरक बना सकता है। अगर आप सबको खुश करना चाहे तो। एक सेइंग है यू कैन प्लीज सम पीपल ऑल द टाइम। ऑल पीपल फॉर सम टाइम बट नॉट ऑल पीपल ऑल द टाइम। आप कुछ लोगों को हर समय के लिए खुश कर सकते हैं। हर व्यक्ति को कुछ लेकिन सब लोगों को हर समय आप खुश नहीं कर सकते। तो कभी भी आप यह मत कोशिश करिए कि आपकी ऐसे बिहेवियर से सब लोग खुश होंगे। क्योंकि ऐसा करने का मतलब यह है कि आप कुछ ना करें। अपनी जो आपकी इच्छाएं हैं उनको खत्म कर दें। इसीलिए रविंद्र नाथ टैगोर जी ने कहा था एकला चलो रे। कई बार जिंदगी में आपको अकेले चलना पड़ता है। किसी का अप्रूवल नहीं है। आपका केवल अप्रूवल है। आप उसको फॉलो करें। मैं इसका मतलब यह नहीं आपसे कह रहा हूं कि आप रिबेल हो जाएं। ऐसा डिसीजन लें जिससे सब लोग नाराज हो जाए। लेकिन आपको यह भी देखना है कि अगर कोई चीज के लिए आप कन्विंस हैं कि यह सही है तो आप अप्रूवल का वेट ना करें। अपने हिसाब से डिसीजन लें। और मैं आपको प्रॉमिस करता हूं या मेरा जो लाइफ का एक्सपीरियंस है कि अगर आप अपने मकसद में कामयाब होंगे। अगर आप डिसीजन लेके सही रिजल्ट प्रोड्यूस करेंगे तो वही लोग जो आज आपको क्रिटिसाइज करते हैं कल आपको सपोर्ट करेंगे। अब हम आते हैं दोस्तों छठी नीड पे और यह नीड है अच्छा होने की नीड टू बी गुड। देखिए हर आदमी ये चाहता है कि हम समाज में इतनी सारी प्रॉब्लम्स हैं उनको दूर करें। दुखियों के दर्द को दूर किया जाए। लोग हमें कहें ये तो बड़ा अच्छा आदमी है। मैं आपको एडवाइस करूंगा इसके पीछे बहुत ज्यादा ना भागे। अच्छा बनने के

The story of King Sibi: the importance of kindness and justice

चक्कर में अपनी जिंदगी को नरक ना बना दें। एक बड़ी फेमस स्टोरी है किंग सीवी की और यह जो है अक्सर आपको बुद्धिस्ट जातक कथाओं में मिलती है। महाभारत में भी इसका जिक्र है और यह कहानी कुछ इस प्रकार से है कि एक बहुत ही अच्छे न्यायप्रिय राजा थे जिनका नाम था सीबी या सीवी। एक दिन क्या हुआ कि एक कबूतर जो है उसका बाज एक पीछा कर रहा था। वह भाग करके डरते हुए उनकी शरण में आया। उसने कहा मुझे बचा लीजिए। और जो राजा थे उन्होंने कहा हां ठीक है मैं तुमको बचा लूंगा। थोड़ी देर बाद में वो बाज आ गया वहां पे। उसने कहा मेरा शिकार है मुझे दो। राजा ने कहा नहीं मैं उसको प्रॉमिस कर चुका हूं। मैं उसको नहीं दे सकता। तो जो बाज था उसने कहा कि भाई मुझे तो नहीं दोगे तो मैं तो मर जाऊंगा। तो फिर क्या हुआ कि राजा ने कहा कि ठीक है मैं उसकी जगह अपना मीट देने के लिए तैयार हूं। मेरा मांस ले लो। और फिर उसके बाद में इस तरह की कहानी है कि एक पलड़े पे मीट रखा गया। एक पलड़े पे वो आपका जो कबूतर है वो बैठा। लेकिन जो है मीट हमेशा कम पड़ जाता था। अल्टीमेटली राजा खुद बैठ गए उस पे। तो दोस्तों ये जो कहानी है वो आपको बताती है कि अगर आप बहुत अच्छा करने की कोशिश करते हैं तो आप अपनी जिंदगी को खत्म कर देंगे। फिर भी आप क्या कर पाएंगे? एक कबूतर की जिंदगी तो पता है। बचाई आपने। ऐसे हजारों लाखों कबूतर हैं

The value of knowledge and avoiding its excesses

जिनको कि बाज मारते रहेंगे। आप क्या कर लेंगे? आपने अपनी जिंदगी खत्म कर दी। लेकिन इस दुनिया को कुछ हुआ नहीं है। तो आपको यह समझना है कि इस दुनिया के अंदर जो इनजस्टिस है, इनकलिटी है, बहुत सारी प्रॉब्लम्स हैं। आप उसके लिए रिस्पांसिबल नहीं और हर व्यक्ति को अपनी प्रॉब्लम को खुद सॉल्व करने की जरूरत है। आप अपने फ्रेंड्स के लिए, फैमिली के लिए रिस्पांसिबल हो। लेकिन दुनिया का जो जिम्मेदारी अपने सर पर ना लें। क्योंकि अगर आप ऐसा करेंगे तो आपकी जिंदगी नरक बन जाएगी। तो अच्छे बने जरूर अच्छे बने लेकिन बहुत अच्छे बनने की कोशिश ना करें। दोस्तों सातवीं इंपॉर्टेंट चीज है नॉलेज की जरूरत। आजकल आपने देखा होगा कि लोग हर जगह से नॉलेज एक्वायर करते हैं। देखो ये इसने कहा, ये इसने कहा। मतलब नॉलेज बहुत है। आज आप ये समझिए कि जो 10 साल का लड़का होता है उसके पास इतनी नॉलेज रहती है या इंफॉर्मेशन रहती है जो पुराने जमाने में लोग पूरी जिंदगी में उनको वो नॉलेज नहीं रहती थी। अब उसकी क्या जरूरत है क्या नहीं है इसकी उनको मतलब नहीं है। बट ज्यादा से ज्यादा वो जानने की कोशिश करते हैं। एक कहावत है कि लिटिल नॉलेज इज अ डेंजरस थिंग। लेकिन आपको यह भी समझना पड़ेगा कि जो एक्सेस नॉलेज होती है वह भी उतना ही ज्यादा डेंजरस होती है। जैसे कम खाना नुकसान करता है वैसे ही ज्यादा खाना भी नुकसान करता है। पुराने जमाने की प्रॉब्लम थी कि लोगों को खाना नहीं मिलता था तो कम खाने की प्रॉब्लम थी। आज के समय की प्रॉब्लम है कि लोगों को ज्यादा खाना मिलता है तो ज्यादा खाना प्रॉब्लम है मोटापे की और दुनिया भर की 100 बीमारियों की। मार्क ने एक बड़ा फेमस कोट दिया था। इफ यू डोंट रीड द न्यूज़पेपर यू आर अनइनफॉर्म। इफ यू मिस इनफॉर्म। तो आपको यह समझना पड़ेगा कि जो इंफॉर्मेशन आपके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आती है वह अक्सर सही नहीं होती है। ज्यादातर गलत होती है क्योंकि ऐसे बहुत सारी स्टडीज हैं जिसमें पाया गया है कि जो फेक न्यूज़ होती हैं वो ज्यादा वायरल होती हैं। तो इसीलिए जरूरी यह है कि जैसे आप खाना न्यूट्रिशस खाते हैं, अच्छा खाना खाते हैं, वैसे सिर्फ उस नॉलेज को और उतनी ही नॉलेज को एक्वायर करें जो आपको जरूरत के लिए काफी है। अच्छी किताबें पढ़ें, फिलॉसफी की बुक्स पढ़ें, सेल्फ हेल्प की बुक्स पढ़ें, नॉलेज एक्वायर करने की बुक पढ़ें और सही स्रोत से चीजों को जाने। जो गलत स्रोत से आती हैं, सेंसेशनल आती है, ऐसी नॉलेज को बिल्कुल एक्वायर ना करें क्योंकि यह फायदा की जगह आपको नुकसान करेंगे। जो रमर्स फ्लोट होते रहते हैं, जो फॉल्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] नॉलेज सर्कुलेट हो रहती है मीडिया में, माइथोलॉजीस है, रिलीजंस है, पॉलिटिक्स है, हेट पोस्ट हैं। इन सब को अवॉइड करने की कोशिश करें क्योंकि इसमें सच नहीं यह सब झूठ से भरा हुआ है। तो दोस्तों, नॉलेज भी आपको एक्सेस में नहीं एक्वायर करनी चाहिए।

Lessons from the story of a beggar: happiness beyond money and power

वह भी उतना ही ज्यादा नुकसानदेह है जितना कि एक्सेस ऑफ फूड या एक्सेस ऑफ वेल्थ है। तो दोस्तों, इस तरीके से हमने जाना कि हमें अपनी जरूरतों को कम करना चाहिए और वो बड़ा जरूरी है। लेकिन हमें इस स्टोरी से क्या नहीं सीखना चाहिए यह जानना भी जरूरी है। देखिए यह जो स्टोरी है वो मक को या भिक्षु की लाइफ को ग्लोरिफाई करती है और मिनिस्टर की लाइफ को रिडिक्यूल करती है, क्रिटिसाइज करती है। अरे आपके पास बहुत पैसा है लेकिन आप सुखी नहीं है क्योंकि आप राजा की सेवा में तत्पर हैं। और यह कॉमन परसेप्शन है जो मार्केट में खूब बिकता है कि जो पैसा है वह सारी बुराइयों का जड़ है और जो गरीबी है वह सब सुख की खान है। पैसा कम हो बहुत अच्छा है। लेकिन आप जानते हैं कि ऐसा नहीं होता है। अब इसमें जो बहुत सारी बातें हैं जो इस स्टोरी में नहीं है लेकिन आपको अपने कॉमन सेंस से सोचनी है वो यह है कि यह जो भिक्षु है जो भिक्षा मांग करके अपनी जिंदगी गुजार रहा है गर्मियों में जाड़े में बरसात में कैसे रहता होगा एक झोपड़ी में रहता होगा अभी देखिए आजकल गर्मी चल रही है 40-45 डिग्री कैसे वहां पे बिना पंखे के कूलर के एसी के रह रहा होगा कितनी तकलीफ होगी उसको उसी तरीके से कई बार ऐसा भी होता होगा कि उसने भिक्षा मांगी भिक्षा नहीं मिली तो उसको भूख भूखे पेट भी सोना पड़ता होगा। कितना पेनफुल होगा। कई घरों के सामने जब जाता होगा भिक्षा मांगने उसको दुत्कार करके भगा देते होंगे। इतना ह्यूमिलिएशन उसको फेस करना पड़ता होगा। और कभी आप सोचिए कि अगर वो बीमार पड़ गया और उसके पास पैसे नहीं है तो उसका ट्रीटमेंट कहां से होगा? वह तो मामूली से मामूली बीमारी से मर सकता है, अपंग हो सकता है। तो इस तरीके से यह जो भिक्षु की लाइफ है, यह किसी भी तरीके से अच्छी नहीं है। केवल इसलिए क्योंकि जो मिनिस्टर है, उसकी लाइफ में प्रॉब्लम्स हैं। पैसा और पावर होने के बाद में भी इसका मतलब यह नहीं है कि भिक्षु की लाइफ इसलिए बेटर हो जाती है क्योंकि उसकी लाइफ में पैसा और पावर नहीं है। तो, क्या हमें इससे सीखना चाहिए? यह जो स्टोरी है उससे हमें क्या सीखना है और क्या नहीं सीखना है यह हमने आपको बताया। तो कैसे हम इसका बेस्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। देखिए जो मक है और मिनिस्टर हैं दोनों अपनी-अपनी जगह पे सही हैं। मेन चीज यह है कि हमें एक्सट्रीम को अवॉइड करने की जरूरत है। अब कैसे हम इस बात को करेंगे? आप कुछ साल हार्ड वर्क करें, पैसा कमाएं, पैसा बचाएं और उसके बाद में फिर आप ऐसे

Practical steps: earning, saving, and living a balanced life

नौकरी को छोड़ दें, ऐसे जॉब को छोड़ दें जो आपको पसंद नहीं है और ऐसे जॉब को करें जो आपको पसंद है। ताकि कम पैसे में भी आप कंफर्टेबल लाइफ लीड कर सकें। देखिए आप दूसरों को इंप्रेस करने की कोशिश ना करें कि हमारे पास बड़ी महंगी घड़ी है, कार है या आप पार्टीज में जाते हैं, बड़े-बड़े लोगों को जानते हैं, बहुत बड़े घर में रहते हैं। आपने यह सारी चीजें ईएमआई पे ले रखी हुई हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप जिंदगी भर बंध जाएंगे क्योंकि फिर आप सोच भी नहीं सकते कि आप नौकरी छोड़ दें। चाहे आपको उसमें कितनी भी तकलीफ हो रही हो। क्योंकि यह लायबिलिटीज लाइफ टाइम है और जब तक इन लायबिलिटीज को आप पूरा करेंगे तब तक जिंदगी का मेजर पोर्शन आपका खत्म हो चुका होगा। तो इसलिए आपको क्या करना चाहिए कि आपको कोशिश करनी चाहिए अपनी जरूरतों को कम करने की। अब जैसे मैं आपको एग्जांपल दूं कि मैंने नौकरी की 25 साल तक नौकरी की। उसके बाद में जैसे मैंने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया। अब मैं लास्ट 10 ईयर से घर पे हूं। जो काम मुझे पसंद है उसको करता हूं। ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो अर्ली रिटायर कर जाते हैं या वो ऐसे जॉब से ऐसी चीजों पर स्विच ओवर कर जाते हैं जिसमें हो सकता है बहुत ज्यादा पैसा ना हो लेकिन वो काम करने में उनको मजा आता है। अब उनके पास में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस है। वो पैसे के लिए कोई गलत काम करने की उनको जरूरत नहीं है या कोई ऐसा काम करने की जरूरत नहीं जो उनको पसंद ना हो। तो हमें दोनों चीज का ध्यान रखना। हमें भिक्षु नहीं बनना है और साथ-साथ में हमें लाइफ

Final reflections: critical thinking and staying on the right path

टाइम सर्वेंट भी नहीं बनना है। इतनी जरूरतें हम ना बढ़ाएं कि हम पूरी जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारियां निभाते खत्म हो जाए। तो इस तरीके से दोस्तों आज के जो हमारा जो वीडियो था हमने इसमें सीखा कि क्या चीजें हमें कहानियों से सीखनी चाहिए। क्या चीजें नहीं सीखनी चाहिए और कभी भी हमें बिना क्रिटिकल एनालिसिस किए हुए बिना क्रिटिकल थिंकिंग का इस्तेमाल किए हुए किसी बात को एक्सेप्ट नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसा करेंगे तभी आप इस तरीके की कहानियों का पर्दाफाश कर पाएंगे। उनकी कमियों को जान पाएंगे और यह जो गुरु बाबा पेरेंट्स नेता लोग हैं वह आपको गुमराह नहीं कर पाएंगे और आप सही रास्ते पर चलेंगे। सफलता को पाएंगे सुख को पाएंगे। कैसी लगी आपको आज का वीडियो? जरूर अपने विचार को शेयर करें। अगर आपको यह चैनल पसंद आता है, इसको सब्सक्राइब करें और लोगों तक हमारी बात को पहुंचाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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