Building Unity, Preserving Dhamma Purity - 6th October, 2002 by Goenka ji
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Building Unity, Preserving Dhamma Purity - 6th October, 2002 by Goenka ji

Vipassana Meditation 02.05.2026 5 611 просмотров 223 лайков

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In this rare discourse from 6 October 2002, Shri Reverend S. N. Goenka explains in Hindi and English the deep vision behind the Global Vipassana Pagoda near Mumbai. He describes how this grand monument is meant to remain a pure, non-sectarian Dhamma centre, dedicated only to Vipassana meditation and universal peace. Goenkaji speaks about the power of thousands meditating together, the unique design of the large dome without pillars, and expresses deep gratitude to Myanmar, where Vipassana was preserved in its original purity. He repeatedly reminds that nothing should be added or removed from the technique, and that the Pagoda must never become a place of ritual worship, but always stay a centre for practice open to people of all backgrounds. इस दुर्लभ प्रवचन (दिनांक 6 अक्तूबर 2002) में पूज्य एस. एन. गोयन्काजी मुंबई के निकट स्थित ग्लोबल विपश्यना पगोडा निर्माण के पीछे का गहरा दृष्टिकोन समझाते हैं। वे बताते हैं कि यह विशाल स्मारक एक शुद्ध, असांप्रदायिक धर्म का केंद्र है, जो केवल विपश्यना ध्यान और विश्व-शांति के लिए समर्पित रहना चाहिए। गोयन्का जी समझाते हैं कि जब हज़ारों साधक एक साथ ध्यान करते हैं तो कितनी शक्तिशाली शांति-तरंगें उत्पन्न होती हैं। वे बिना स्तंभों वाले विशाल गुम्बज की विशेषता बताते हैं, और म्यांमार देश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जहाँ विपश्यना अपनी मौलिक शुद्धता में संरक्षित रही। वे बार-बार स्मरण कराते हैं कि तकनीक में कुछ जोड़ा या घटाया न जाए, और यह पगोडा पूजा-पाठ का मंदिर नहीं, बल्कि सदैव विपश्यना अभ्यास का केंद्र ही बना रहे – जो सभी लोगों के लिए खुला रहे। Download Vipassana Meditation App Google App - https://play.google.com/store/apps/details?id=com.vipassanameditation Apple iOS - https://apps.apple.com/in/app/vipassanameditation-vri/id1491766806 Subscribe to Vipassana Meditation YouTube Channel Here: https://www.youtube.com/user/VipassanaOrg Anapana Meditation for All: An effective tool to deal with Stress, Fear and Anxiety. Anapana Meditation in Hindi - https://www.youtube.com/watch?v=TMfMdj7XAbk Anapana Meditation in English - https://www.youtube.com/watch?v=aYJmFdeBfVQ Exclusive dedicated Anapana sessions of around 60min can be arranged on request for government departments, schools, educational institutions, private companies and any other institutions. Please write to childrencourse@vridhamma.org To get more information on Anapana or to ask any question please email us your query at: questions@vridhamma.org Join Telegram Channel: https://t.me/joinchat/AAAAAExY2poP-74GPqFClg Also you can connect with us on: Official Social Profiles of Vipassana Meditation https://www.facebook.com/Vipassanaorganisation/ https://www.instagram.com/vipassanaorg/ https://twitter.com/VipassanaOrg Official Vipassana Organization Websites https://www.vridhamma.org/ http://www.globalpagoda.org/ https://www.dhamma.org Introduction to Vipassana Meditation by S N Goenkaji https://www.youtube.com/playlist?list=PLPJVlVRVmhc7K5cRpUxOcm4wOrK6_8O9G These videos are bought to you by Vipassana Research Institute (VRI) a non-profit-making body with the principal aim of conducting scientific research into the Vipassana Meditation Technique. The financing for running VRI comes mainly from donations. If you wish to make a contribution to this effort (100% tax exemption for Indians), please visit https://www.vridhamma.org/donate-online or through the mobile app mentioned above. May all be benefited. May all beings be happy. © Vipassana Research Institute

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डेढ़ पौने 2000 साधक साधिकाओं की ये सामूहिक साधना कितनी मंगलकारणी है कितनी कल्याणकारिणी है। जब मैं देखता हूं कि इस पवित्र भूमि पर सात आठ हजार साधक साधिकाएं एक साथ बैठकर तपेंगे तो उस मंगल का कोई माप नहीं। उस कल्याण की कोई सीमा नहीं। भगवान ने ठीक ही कहा सुख संघस सामग्री संग एकत्र हो। संग कौन होता है? भिक्षु हो, भिक्षिणी हो या गृहस्थ पुरुष हो, नारी हो, जो भी धर्म के रास्ते चल रहे हैं, शील, समाधि, प्रज्ञा हैं। अपने भीतर राग, द्वेष और मोह से संघर्ष कर रहे हैं। अपने भीतर शील समाधि प्रज्ञा को संग्रहित कर रहे हैं। मैत्री करुणा वह संग है। कोई हो सुखा संगानंद सुखा संगस सामग्री एकत्र हो। ऐसे धर्म के रास्ते चलने वाले लोग जहां एक जगह एकत्र होते हैं तो सारा वातावरण बड़ा सुखद हो जाता है। बड़ा सुखमय हो जाता है। और जब एकत्र होकर तपते हैं अरे तब तो कहना ही क्या समगान तपो सुखो यह एकत्र होकर के समग्र रूप से एकत्र होकर के तपस्या करते हैं। शील के आधार पर चित्त को एकाग्र करने का काम करते हैं। प्रज्ञा के आधार पर चित्त को निर्मल करने का काम करते हैं। उससे बड़ा और क्या सुख होगा? विकारों से मुक्ति पाना ही सुख है। विकारों का संचय संग्रह ही दुख है। यह भूमि पवित्र हो उठेगी। जब लगभग 8000 9000 लोग यहां एकत्र होकर के गप्पे नहीं लगाएंगे। यहां एकत्र होकर पिकनिक नहीं करेंगे। यहां एकत्र होकर कोई मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं करेंगे। एकत्र होकर तपेंगे। सामूहिक साधना करेंगे। एक दिन का शिविर लेंगे तो धरती तप उठेगी। अभी जो कभी-कभी एक दिन के शिविर लगते हैं उससे ही मैं देखता हूं वातावरण में अंतर आने लगा है। वह दिन जबकि यहां नियमित रूप से लोग आएंगे साधना करेंगे। तो यह भारत की ही नहीं सारे विश्व की एक विशिष्ट तपोभूमि बनेगी। कोई इतना बड़ा हॉल जहां 800 लोग बैठकर तपस्या करें

Segment 2 (05:00 - 10:00)

जिसमें बाधा बनने वाला कोई स्तंभ नहीं हो। अच्छी बात है। पर यह इसके ऊपर यह आकृति किसी चैत्य की आकृति क्यों? और यह चैत्य भी बर्मा के श्वडगुण चैत्य की आकृति क्यों? प्रश्न उठता है। यह खूब ख्याल रखना होगा कि यह कहीं कोई संप्रदाय ना बन जाए। किसी संप्रदाय का प्रतीक भी ना बन जाए। ये आकृति महज इसलिए है कि हमारे मन में कृतज्ञता का भाव जागे। इतनी कल्याणी विद्या जो कभी सारे भारत में फैली हुई थी और भारत भी उस समय इतना विशाल सारा अफगानिस्तान उसमें था। अफगानिस्तान से लेकर के बंगाल तक आसाम तक हिमालय से लेकर दक्षिण तक सारे भारत में विपशना विपशना और वो ऐसा समय था भिन्नभिन्न संप्रदाय तो तब भी थे कोई आपसे झगड़े नहीं होते थे। खून खराबा तो दूर रहा आपसी झगड़े नहीं होते थे। हर व्यक्ति अपने संप्रदाय की बाई करके दूसरे की निंदा नहीं करता था। हर संप्रदाय में हर संप्रदायिक मान्यता में हर परंपरा में कोई ना कोई अच्छी बात तो होती है। जो अच्छी बात होती है उसे उजागर करो। जो बुराई है उसको महत्व मत दो। तो आपस में एकता होगी, प्यार होगा। किस कदर अशोक के राज्य में इतने लंबे राज्य में एक सांप्रदायिक झगड़ा नहीं हुआ। एक बाहर का हमला नहीं हुआ। अड़ोस पड़ोस के सारे देश विपक्ष सेना के सामने झुके। उनका कल्याण हुआ। लड़ाई किस बात की होगी? प्यार ही प्यार होगा। लेकिन बहुत बड़ा दुर्भाग्य हुआ कि इतनी कल्याणकारी विद्या जिसे सभी मानवों ने स्वीकार किया। अपने देश में 500 वर्ष के ऊपर नहीं चली। केवल महाराष्ट्र में 6 700 वर्ष तक चली। बाकी सारे देश में 500 वर्ष होते लुप्त हो गई। तो जिस देश ने इसे संभाल के रखा और अनेक देशों में गई वहां भी विकृत होकर विलुप्त हो गई। जिस एक देश ने संभाल के रखा हमारे पड़ोसी देश बर्मा ने ममा ने हमारे मन में उसके प्रति कृतज्ञता का भाव जागना स्वाभाविक है। यह देश भी खो देता इस विद्या को खो देता तो सारे विश्व में अंधकार कोई विपशना का नाम भी नहीं जानता। उसका अभ्यास करना तो बहुत दूर रहा। बहुत थोड़े से लोगों ने संभाल के रखा गुरु शिष्य परंपरा से बहुत थोड़े से लोगों ने बाकी तो वैसे ही कर्मकांडों में उलझे रहे लेकिन कुछ लोगों ने संभाल के रखा शुद्ध रूप में संभाल के रखा तो हमारे पास शुद्ध रूप में आए और आज ठीक उसी प्रकार जैसे 2200 2300 वर्ष पहले सारे विश्व में फैली वैसे फैल रही है। सब स्वीकार कर रहे हैं क्योंकि आशु फल दायनी है। फल देती है। मरने के बाद कोई स्वर्ग मिलेगा। कौन देखने गया? किसने आकर कहा मुझे स्वर्ग मिल गया? मिलता है। अच्छी बात। उसका विरोध नहीं करते। अरे यहां स्वर्ग मिलना चाहिए ना। इसी जीवन में स्वर्ग मिलना चाहिए। भीतर नरक की अग्नि जल रही है। द्वेष की, द्रोह की, दुर्भावना की वो शांत हो। और प्रेम, मैत्री, करुणा, सद्भावना की स्वर्गीय तरंगे जागे अपने भीतर अगर अभी लाभ में नहीं मिलता है और हम मरने के बाद के लाभ की बातें करते हैं तो कहीं पंडागिरी है। कोई हमें ठग रहा है। यहां कुछ ना मिले। मरने के बाद जरूर मिलेगा। यह कर्मकांड कर लो। मैं कहता हूं वैसे कर लो। मरने के बाद यह पाएगा वो यह पाएगा। समझ लो कोई धोखा दे रहा है। अब क्या मिलता है भाई? अब कुछ नहीं मिलता। जो मिलेगा मरने के बाद मिलेगा। इस धोखे से

Segment 3 (10:00 - 15:00)

सारे समाज को निकालने के लिए यह विद्या का पुनर्जागरण हो रहा है। लोक सुधरेगा तो परलोक अपने आप सुधरेगा। हमें परलोक की चिंता करने की जरूरत नहीं। लोक सुधरे। ये जीवन हमारा सुख शांति से बीते। प्यार से बीते, सौहार्द से बीते, द्वेष और दुर्भाना रहने ना पाए तो समझो धर्म है अन्यथा धर्म नहीं संप्रदाय है। दोनों एक दूसरे के दुश्मन है। जहां संप्रदाय होगा वहां धर्म नहीं पनप पाएगा। और जहां धर्म अपने शुद्ध रूप में होगा, वहां संप्रदाय के छिलके दूर होते चले जाएंगे। यह एक प्रतीक होगा। इस युग का एक प्रतीक होगा जहां अपने शुद्ध रूप में धर्म कायम रहेगा और सारी दुनिया देखेगी शुद्ध धर्म क्या होता है? शील समाधि प्रज्ञा को छोड़कर और कोई दुकानदारी की बातें जुड़े तो शुद्धता नष्ट हो गई। शील, समाधि, प्रज्ञा बस इतने तक धर्म सीमित रहे तो मैत्री और करुणा अपने आप जागेगी। उसके लिए कुछ करना नहीं पड़ता। तो समझो शुद्ध है धर्म। अपने देश से क्यों लुप्त हुआ? धीरे धीरे संप्रदायवादियों ने देखा यह तो बिना संप्रदाय का धर्म है यह फैलेगा तो हमारे संप्रदाय का क्या होगा फिर हमारे संप्रदाय वाले तो सारे छोड़ देंगे तो जो कुछ इससे प्राप्त होता है वो ले लो और उस पर अपने संप्रदाय की बात थोप दो 90% इसको ले लो 10% अपने जोड़ दो 99% इसको ले लो 1% अपना जोड़ दो। बस जो जोड़ दिया धीरे धीरे वह प्रमुख हो गया। बाकी लुप्त होता चला गया। ना इसमें कुछ जोड़े ना इसमें से कुछ निकाले तो शुद्ध रूप कायम रहेगा और सदियों तक लोग कल्याण करेगा। यही इस शुद्धता का प्रतीक होगा। यह स्तंभ। याद रखेंगे कि एक देश ने शुद्ध रूप में संभाल के रखा। तो हमें शुद्ध रूप में प्राप्त हुआ। हमारी जिम्मेदारी है कि हम पीढ़ियों तक सदियों तक इसे शुद्ध रूप में रखेंगे। ऐसे बहुत बावले लोग होंगे जिनको अपने संप्रदाय से चिपकाव है। तो इसमें की बातें ले लेंगे। नाम बदल देंगे। कुछ जोड़ देंगे कुछ निकाल देंगे और कहेंगे वही तो है। ये भी तो वही है ना। आप जो सिखाती हैं वही है वही है समझे नहीं बेचारे लोगों को संप्रदाय से इतना चिपकाव होता है हर संप्रदाय वालों को कि उस संप्रदाय की कोई बात जोड़ दी कोई दार्शनिक मान्यता जोड़ दी कोई कर्मकांड जोड़ दिया कोई दिखावा जोड़ दिया बस ये सबसे अच्छा है उसके साथ चिपकाव पैदा करेंगे और धीरे धीरेधीरे शुद्ध धर्म लुप्त होता चला जाएगा विपसना का नाम ही नष्ट हो जाएगा। यही हुआ ना? 2500 वर्षों के बाद आज भारत विपसना शब्द भूल गया। क्या है विपसना? यह भी नहीं जानते। कभी-कभी हंसी आती है। दुख भी होता है। हमारे अपने साधक 3030 बरस के पुराने साधक विपश्चना शब्द का उच्चारण नहीं करते। ना विपसना का करते हैं हैं। विपासना हम देख के चौकते हैं विपासना क्या हुई भाई जो धर्म विरुद्ध बात हुई विपासना कितना फैल गया विपासना विपसना नहीं विपश्यना भी नहीं कितने वर्षों से लुप्त हुई विद्या उसे वापस ग्रहण करने में कठिनाई होती है। ग्रहण कर भी ले तो कायम रखने में कठिनाई होगी। फिर समझा जाएंगे। आगे आने वाली पीढ़ियों को मैं चेतावनी देता हूं कि और लोग चाहे सो जोड़ें कुछ मात्रा में अच्छा होगा। लोग नकली और असली की पहचान करना सीखेंगे। देखो एक असली मार्ग भी चल रहा है। यह कुछ नकली मार्ग भी चले हैं। दोनों में क्या अंतर है? काम करके देखेंगे क्या अंतर है। लेकिन जो अपने को असली कहते हैं वही जोड़ना शुरू कर देंगे तब क्या बीतेगी? फिर खत्म हो जाएगा। फिर वैसे के वैसे हो जाएंगे। फिर विपश्ना भी एक संप्रदाय बन जाएगा। धर्म कहीं गया धर्म की बातें जरूर

Segment 4 (15:00 - 20:00)

होंगी। 90% धर्म की बातें होंगी। वो केवल बात करने के लिए वो केवल अपना अहंकार पोषण करने के लिए। देखो हमारे यहां भी तो है ना शील सदाचार हमारे यहां भी है। समाधि प्रज्ञा हमारे यहां भी है। लेकिन साथ-साथ देखो ये दार्शनिक मान्यता भी है। साथ-साथ देखो यह कर्मकांड हमारी ये परंपरा की अमुक बात भी है। बस वो प्रमुख हुई बाकी कमजोर होता चला जाएगा। और जो करें सो करें। उनके प्रति द्वेष नहीं करना। हम देखते हैं हमसे एक शिविर लेकर दो शिविर लेकर चार शिविर लेकर के किसी ने एक दुकान खोल दी किसी ने दो ऐसा कर दिया हम मुस्कुराते हैं करो भाई तुमको जैसा ठीक लगे अपने संप्रदाय वालों को अपने बाड़े में बांध के रखना है मेरे बाड़े की कोई भेड़ बकरी दूसरे के बाड़े में ना चली जाए इसलिए बांध के रखो करे बेचारा उसके लिए संप्रदाय प्रमुख है धर्म प्रमुख नहीं है लोगों को लाभ हो या ना हो अपना संप्रदाय कायम रहना चाहिए हम क्यों बुरा माने रहे मैत्री देते हैं मंगल कामना करते हैं तेरा भला हो लेकिन जो लोग इस परंपरा के वारिस हैं इस परंपरा को कायम रखने की प्रतिज्ञा जिन्होंने ली है जिम्मेदारी जिन्होंने ली है वो अगर ऐसा पागलपन करने लगेंगे तो बहुत बड़े दोष की बात होगी इसीलिए यह पगोड़ा बने या चैत्य बने कि लोग याद रखें कि विपसना शुद्ध रूप में कैसे होती है? उसमें कोई मिलावट नहीं होने पाए। उसमें से कुछ निकालने का प्रयत्न ना करें। ना कुछ जोड़े ना कुछ तोड़े। जैसी हमें प्राप्त हुई हमारे देश ने खो दी। पड़ोसी देश से जैसे हमें प्राप्त हुई उसको हम इसलिए नहीं स्वीकार कर रहे हैं कि हमको उससे आसक्ति है। अंधापन है। नहीं हमने करके देखा है। उससे लाभ होता है। करके देखा है। हमें ही नहीं सबको लाभ होता है। इसकी सबसे बड़ी महानता यही कि उन दिनों भी और आज भी संसार की कोई भी सांप्रदायिक परंपरा नहीं है। आज भी संसार भर में कोई भी आध्यात्म की परंपरा नहीं है। 10 दिन के शिविर में नहीं आते। उनको अपना लगता है ना। दुनिया की सारी परंपराओं में शील समाधि प्रज्ञा को महत्व देते हैं। पालन नहीं करते। महत्व देते हैं। गर्वित होते हैं। हमारे यहां भी है। करेंगे नहीं। करने की विद्या नहीं है। कैसे करेंगे? उनके लीडर आते हैं। क्यों आते हैं कि उनको अपना सा लगता है। यह विशेषता है कि यह सबकी है। कभी भूलकर भी विपशना की इस विद्या को इस शुद्ध धर्म को कहीं बौद्ध धर्म मत कह देना। बड़ी हानि हो जाएगी। धर्म है। बौद्ध धर्म होगा केवल बौद्धों का होगा। जैन धर्म केवल जैनियों का होता है। हिंदू धर्म केवल हिंदुओं का होता है। ईसाई धर्म केवल ईसाइयों का होता है। मुस्लिम धर्म केवल मुसलमानों का होता है। धर्म सबका होता है। उस महापुरुष ने धर्म सिखाया। 15,000 पृष्ठों की वाणी उनकी और 30 35,000 के की अर्थकथाएं, टीकाएं, अनुकाएं कहीं बौद्ध शब्द नहीं मिलता। सारी शिक्षा को धर्म कहा गया और पालन करने वालों को धार्मिक कहा गया। धर्म और धार्मिक सबका है। वो ना छूट जाए। धर्म ही रहे। पालन करने वाले धार्मिक ही हो तब क्या होगा? धार्मिक बौद्ध, धार्मिक हिंदू, धार्मिक मुस्लिम, धार्मिक क्रिश्चियन धर्म पालन करने वाले से बना। क्या हुआ? संप्रदाय नहीं बनेगा। हम इसे संप्रदाय ना बनने दें। इसके लिए सजग रहना है। हर एक को सजग रहना है। यह प्रतीक होगा। एक प्रतीक इस मायने में भी होगा। लोगों को आकर्षित करेगा। इगतपुरी का चैत्य है। जो लोग सैलानी के रूप में टूरिस्ट के रूप में इगतपुरी जाते हैं। वहां की एक होटल प्रस प्रसिद्ध हो गई। लोग वहां दो दिन के लिए जाते हैं, चार हैं। उनमें से कोई ऐसा नहीं होता जो इगतपुरी को वहां के केंद्र को धम्मगिरी को देखे बिना चला जाए। एवरेज में 5-प00 आदमी आते हैं देखने के लिए रोज। उन 500 में से हमें बताया गया कि पांच चार तो ऐसे होते हैं जो वहां फॉर्म भरते हैं कि हम आएंगे और आते हैं। अरे यहां तो हजारों की संख्या में आएंगे। लोगों ने जिन्हें सुना नहीं कभी विपसना क्या होती है। वह इस चैत्य को देखने आएंगे। यह सवा50 फीट ऊंची इमारत ये क्या है? और बॉम्ब में देखने को है भी क्या? वो गेटवे देखने को जाएंगे। सब यही आएंगे

Segment 5 (20:00 - 25:00)

देखने के लिए। आएंगे तो ये क्या है? यह क्या है? देखने आएंगे और यह विपशना है। ये जानकारी होगी। ऐसी होती है विपशना। ऐसी विपशना होती है। जानकारी होगी। प्रेरणा जागेगी। किसी के पीछे पुराना पुण्य होगा तुरंत शिविर में बैठेगा कोई कुछ देर के बाद बैठेगा इस कदर लोक कल्याण होगा हम केवल संख्या बढ़ा के अपने को बहुत गर्वित ना महसूस करें क्या होगा संख्या बढ़ जाने से क्वालिटी बढ़नी चाहिए क्वांटिटी नहीं तो क्वालिटी बढ़ेगी क्योंकि अभ्यास करेंगे यहां आकर के अपने को हम अब हम बौद्ध धर्म में कन्व्टेड हो गए क्या मिला रे हम विपश्य ना करने लगे। बहुत कुछ मिल गया। यह सीखेंगे लोग। सारा विश्व सीखेगा। इसलिए इतनी मेहनत करके यह इतना बड़ा विशाल स्तूप बन रहा है। और इसमें साधक साधिकाओं का इनकी प्रेरणा लगी है। इनकी मेहनत लग रही है। जब बनेगा तो कितना बड़ा पुण्य और उस पुण्य का कितना बड़ा फल। सदियों तक यह खड़ा रहेगा। सदियों तक लोग इससे लाभ लेंगे तो सदियों तक यह पुण्य की बेल हरीभरी रहेगी। इसमें फल लगेंगे। बड़े कल्याण की बात होगी। होगी यह अवश्य चाहता हूं। बहुत कामना तो नहीं करनी चाहिए। लेकिन फिर भी अवश्य चाहता हूं कि मेरे रहते हो जाए। तो इसका प्रयोग कैसा हो? लोगों को डांट करके वैसा प्रयोग करना सिखा के जाऊं। नहीं तो कहीं इसको भी कोई मंदिर बना देंगे और लोग आकर के नमस्कार करने लगेंगे फूल चढ़ाएंगे धूप जलाएंगे दीप जलाएंगे आरती उतारेंगे बिगड़ जाएगा विपस्या नहीं रहेगी तो ऐसा ना हो जाए तो कैसा हो क्या हो हम हजार कह के जाएंगे लिख के जाएंगे फिर भी कौन जाने कोई पागलपन कर जाए तो चाहते तो हैं कि हमारे रहते हो जाए और नहीं हुआ तो मुस्कुराते हुए चले जाएंगे हमारे क्या फिर पीछे वाले करेंगे आप ही संभालेंगे लेकिन जो भी संभाले इस बात का ख्याल रखें इसे कोई सांप्रदायिक स्तूप ना बनने दे ध्यान करने का स्थान है विपशना यह स्वरूप इसलिए दे रहे हैं कि लोग याद करें कि कहां से आया हमने खो दिया किन्होंने संभाल के रखा उनके प्रति कृतज्ञता का भाव और एक उस संत के हमारे धर्म पिता सजी हुबा उनकी 100वीं जन्मतिथि पर इसका आरंभ हुआ। एक स्मृति के रूप में क्या स्मृति उनकी सबसे बड़ी स्मृति तो यही होगी कि ज्यादा से ज्यादा लोग विपचना करें तो उनकी स्मृति कायम है। लेकिन यह स्मृति इस मायने में कि लोग याद करें कि इस युग में एक ऐसा व्यक्ति हुआ जिसके मन में इतना उमंग कि हमें यह विद्या भारत से मिली। मिली और आज भारत कंगाल हो गया। जहां तक यह विद्या का सवाल है कंगाल हो गया। कितने जातपात के झगड़े मैं ऊंची जात का तू नीची जात का। मैं अस्पृश्य, तू अस्पृश्य, मैं छूत, तू अछूत। मैं इस संप्रदाय का, तू उस संप्रदाय का लड़ते हैं, झगड़ते हैं। मन दुखी होता था उनका। कि अरे यह भारत की विद्या भारत को वापस चली जाए तो यह देश इस दुख के बाहर निकल जाएगा। लोग भेदभाव करना छोड़ देंगे। आदमी है। अच्छा कर्म करता है तो ऊंचा है। अच्छा कर्म नहीं करता है तो नीचा है। जो दुष्कर्म करता है वह दुर्जन ही होगा। किसी मां के पेट से जन्मे। जो सत्कर्म करता है वह सज्जन ही होगा। किसी मां के पेट से जन्मे। यह धर्म की बात होती है और इसको छोड़कर और कोई बात होने लगे तो अधर्म की बात होती है। अमुक मां के पेट से जन्मा इसलिए सज्जन है। चाहे जितना दुष्कर्म करे, अमुक मां के पेट से जन्मा वो दुर्जन है। चाहे जितना सत्कर्म करे तो धर्म कहां? धर्म के विरुद्ध बात हुई ना। और देश का दुर्भाग्य हुआ कि ये धर्म के विरुद्ध बात चल पड़ी। देश कंगाल हो गया। दुर्बल हो गया। बाहर के हमले हुए। हम कुछ नहीं कर पाए। हमारी एकता नष्ट हो गई। अरे भविष्य में तो ना हो। ख्याल रखें आदमी है। सत्कर्म करेगा तो सज्जन होगा। दुष्कर्म करेगा तो दुर्जन ही होगा। किसी मां के पेट से जन्मे। यह स्तूप इस बात को सिखाएगा। यह विपसना इस बात को सिखाएगी। हम देखते हैं कि जहांजहां विपना के केंद्र हैं लोग भीड़ के भीड़ बैठे हैं। उनमें से कोई नहीं कहता कि यह तो ऊंची जात का है या नीची जात का है। कोई नहीं कहता ये तो हिंदू है ये तो मुसलमान है। ये तो जैन है ये क्रिश्चियन है। फला है। मनुष्य हैं। और सब में मानवीय गुण कैसे आए? इसलिए सीख रहे

Segment 6 (25:00 - 30:00)

हैं। सही मायने में मनुष्य कैसे बने? नेक इंसान कैसे बने? अच्छे मनुष्य कैसे बने? यह सीख रहे हैं तो इस धरती पर भी 6000 8000 10000 जो लोग बैठेंगे कोई यह नहीं कहेगा यह ऊंची जात का है कि नीची जात का है। कोई यह नहीं कहेगा कि अमुक संप्रदाय का है अमुक संप्रदाय का है। सब धर्मवान है। धर्म के रास्ते चलने वाले हैं। यह एक नमूना होगा सारे विश्व के लिए कि एक प्लेटफार्म पर भिन्न-भिन्न जाति के भिन्न-भिन्न वर्ण के भिन्न-भिन्न वर्ग के भिन्न-भिन्न संप्रदाय के लोग एक साथ बैठकर के कैसे प्यार से रहते हैं? अरे खेल तमाशे में भी एक साथ बैठते हैं। कोई नहीं जांचता कि तू किस जन्म का है, किस जाति का है। वो तो खेल तमाशे की बात हुई ना, गंदगी की बात हुई ना? धर्म के स्थल पर जहां अध्यात्म की उन्नति करनी है, वहां सब एक साथ बैठे हैं। तो अध्यात्म के क्षेत्र में हम समान है। बहुत बड़ी बात होगी। देश का ही नहीं विश्व का कल्याण होगा। यह जो धर्म के नाम पर, संप्रदाय के नाम पर खून खराबा हो रहा है, क्यों हो रहा है? जानते नहीं बेचारे, अबोध हैं। अपनी हानि करते हैं। औरों की हानि करते हैं। यह विश्व में फैलेगी विपश्य और यह प्रतीक स्तूप यह प्रकाश स्तंभ खड़ा रहेगा। लोगों को चेतावनी देता रहेगा। अरे मनुष्य एक से होते हैं। मनुष्य में कोई ऊंचानीचा नहीं होता। जिसको दुष्कर्म के कारण दुर्जन कहा गया वह भी कल प्रयत्न करके सज्जन हो सकता है। जन्म भर के लिए दुर्जन नहीं रहेगा। पीढ़ियों तक छोटा बड़ा भी नहीं रहेगा। अपने कर्मों के अनुसार छोटा या बड़ा होगा। यह संदेश भारत को ही नहीं सारे विश्व को मिलेगा। बहुत बड़ा कल्याण होगा। देखें कब इसका प्रभाव आना शुरू होता है। यह जो समय-समय पर एक दिन का शिविर लगता है। इसी से हमें प्रसन्नता होती है। एक ऐसी तरंगे तो शुरू हुई। एकता की तरंगे शुरू हुई। सब साथ बैठकर एक साथ ध्यान करते हैं। समगान तपो सुखो एक साथ तपते हैं। इससे बड़ा सुख और क्या होगा? बहुत बड़ा सुख है। और हम अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं उस देश के प्रति, इस संत पुरुष के प्रति जिसके मन में एक ही ललक कि यह भारत से आई विद्या भारत जानी चाहिए। हम पर ऋण है भारत का। मुझे यह ऋण वापस चुकाना है। खुद नहीं आ सके तो अपने धर्म पुत्र को जितना तैयार कर सके, जितना पका सके, वैसे पका के भेजा। यह धर्म की महिमा है। कि मेरे जैसा साधारण व्यक्ति व्यापार धंधे के वातावरण में जन्मा और पला हुआ व्यक्ति दुनिया को धर्म सिखाए। आश्चर्य होता है मुझे स्वयं आश्चर्य होता है। ये धर्म की कृपा ये उस संत की कृपा ये इस परंपरा की कृपा हर एक ऐसे हो जाएंगे। मेरी कोई बात नहीं है। मत समझना कि मैं कौन अनोखा आदमी हूं। जो इस रास्ते जाएगा अपना भी कल्याण करेगा और लोक कल्याण भी करेगा। जागे धर्म अपने शुद्ध रूप में जागे और शुद्ध रूप में कायम रहे जो उसको बिगाड़ते हैं उनको बिगाड़ने दे उनके साथ विरोध भी नहीं करना उनके निंदा भी नहीं करनी स्वयं सतर्क रहना हम अपनी परंपरा में कहीं कोई बात जोड़ेंगे नहीं तोड़ेंगे नहीं इस मारे जोड़ दिया कि कुछ लोग ज्यादा आ जाएंगे इस मारे कुछ तोड़ दिया कि लोग ज्यादा आ जाएंगे संख्या को क्या करोगे यह बिगड़ी हुई संख्या क्या काम आएगी गिनती गिनने के लिए नहीं होता धर्म व्यक्ति को एक को सच्चा अमानव बनाने का होता है धर्म नेक इंसान बस यह लक्ष्य सामने रहेगा तो यह स्तूप हमारे लिए बड़ा कल्याणकारी होगा और होगा ही इसमें कोई संदेह नहीं वी हैव ऑल असेंबल हियर व्हेन आई सी500 और 700 ऑफ माय धम्मा सनंस एंड धम्मा डॉटर्स मेडिटेटिंग टगेदर व्हाट अ ग्रेट डिलाइट आई गेट हाउ मच हैप्पी आई फील यस वन इन द सेंटर्स आई फाइंड 500 700 और000 स्टूडेंट्स मेडिटेटिंग द होल एटमॉस्फियर गेट्स चार्ज वि द वाइब्रेशन ऑफ पीस हार्मोनी हैप्पीनेस आई जस्ट थिंक दिस ग्रेट पगोडा हज पगोडा वेयर अबाउट 8ाउ मेडिटेट विल सी एंड मेडिटेट व्हाट वाइब्रेशन इट विल क्रिएट नॉट ओनली इगतपुरी बट आई हैव सीन सो मेनी सेंटर्स अराउंड द वर्ल्ड वेर आई हैव गॉन पीपल कम नॉन मेडिटेटर्स कम देयर एंड एस दे रीच नियरर एंड नियरर दे स्टार्ट फीलिंग पीस हार्मोनी दे हैव नॉट गेट मेडिटेड एंड व्हेन दे मेडिटेड दे गेट सो मच बेनिफिट द सेम थिंग इज़ गोइंग टू हियर

Segment 7 (30:00 - 35:00)

इन अ लार्ज स्केल द वर्ड्स ऑफ बुद्ध जॉइनिंग टुगेदर दिस संघा जॉइनिंग टुगेदर गिव्स अ वेरी प्लेज़ेंट एटमॉस्फियर एंड व्हेन दिस संघा जॉइनिंग टुगेदर मेडिटेट्स वंडरफुल वाइब्रेशन सो मच ऑफ पीस एंड हार्मोनी एंड हैप्पीनेस दी वर्ड्स आर वर्ड्स ऑफ़ एक्सपीरियंस एट द टाइम ऑफ़ द अनलाइटेंड वन दे सेंटर्स लाइक दिस वेयर 10 थाउजेंड पीपल विल सीट एंड मेडिटेट टुगेदर एंड द हिस्ट्री विल रिपीटेड इटसेल्फ व्हेन हियर आल्सो 8 टू 10 पीपल विल सीट एंड मेडिटेट हाउ मच इफेक्ट इट विल हैव स्ट्रांग इफेक्ट वी कैन गिव एग्जांपल टू द पीपल हाउ पीपल सिट हियर टुगेदर देयर इज नो डिस्क्रिमिनेशन सो एंड सो हाई कास्ट सो लो कास्ट व्हाट हाई कास्ट एंड लो कास्ट ऑल आर ऑफ द सेम लेवल वन हुज परफॉर्मिंग गुड एक्शन सर्टनली बेटर पर्सन वन नॉट परफॉर्मिंग गुड एक्शन अनहसम एक्शन सर्टनली अ लोअर पर्सन बट हाउएवर लोअर ए पर्सन मे बी बाय दिस टेक्निक बाय वाकिंग ऑन द पाथ ऑफ़ धम्मा इज़ बाउंड टू बिकम ए हाई पर्सन दिस इज धम्मा व्हेन समवन सेस दैट वेदर वन इज़ परफॉर्मिंग बैड एक्शन और गुड एक्शंस ह ग्रेटनेस और लोनेस ओनली बिकॉज़ ऑफ द मदर फ्रॉम वि मदर वम ही हैज़ बोर्न दिस इज टोटली अगेंस्ट धम्मा आवर कंट्री लॉस्ट धम्मा बिकॉज़ ऑफ़ दिस एंड बिकम पुअर स्पिरिचुअली बिकम पुअर इन ऑल द वेज़ देयर वाज़ नो यूनिटी एट ऑल नाउ टाइम हैज़ राइप अगेन दिस ग्रेट कंट्री हैज़ टू अराइज़ नॉट ओनली फॉर इट्स ओन बेनिफिट फॉर द बेनिफिट ऑफ़ द होल वर्ल्ड व्हाट्स गोइंग ऑन इन द नेम ऑफ रिलीजन ऑफ़ कम्युनल फोर्सेस फनेटिक पीपल व्हाट दे आर डूइंग बिकॉज़ दे डू नॉट नो व्हाट द परिटी ऑफ़ धम्म व्हेन दिस स्प्रेड्स देन दे विल स्टार्ट अंडरस्टैंडिंग समबडी कॉलिंग वनसेल्फ ए हिंदू और ए मुस्लिम और ए बुद्धिस्ट और ए क्रिश्चियन ह्यूमन बीइंग इज़ ह्यूमन बीइंग समबडी कॉलिंग वनसेल्फ ए ब्राह्मण और वैश्य और क्षत्रिय और शूद्र ह्यूमन बीइंग इज़ ह्यूमन बीइंग व्हाट इज इन दिस नेम? क्वालिटी इजेंट इन धम्मा दैट विल बिकम क्लियर एंड क्लियर एंड द पास्ट ग्लोरी ऑफ़ दिस कंट्री विल कम अप। दिस मोन्यूमेंट विल नॉट बी जस्ट अ मोन्यूमेंट टू अट्रैक्ट पीपल। यस इट विल अट्रैक्ट पीपल बिकॉज़ अ सिटी लाइक बॉम्बे व्हिच इज द मोस्ट डेंसली पपुलेटेड सिटी ऑफ़ दिस कंट्री। एंड द कमर्शियल कैपिटल ऑफ दिस कंट्री। लार्ज नंबर ऑफ पीपल कीप कमिंग हियर एवरीडे एंड व्हाट इज देयर टू सी ऑन दिस सिटी व्हाट इज देयर दे सर्टनली ऑल रन हियर टू सी दिस वंडरफुल मोन्यूमेंट 325 फीट हाई सच अ ह्यूज स्प्लेंडेड मोन्यूमेंट व्हाट इज इट एंड व्हेन दे कम हियर दे मे कम जस्ट एस अ टूरिस्ट बट व्हेन दे कम हियर दे गेट द मैसेज ऑफ़ धम्मा दिस इज़ विपशना मैन यू हैव नेवर हर्ड व्हाट विपशना एंड व्हेन दे हियर एंड दे अंडरस्टैंड व्हाट दिस टेक्निक इज दे विल गेट अट्रैक्टेड एंड सर्टनली मेनी ऑफ़ देम विल स्टार्ट प्रैक्टिसिंग वी सी इनतपुरी आई वास टोल्ड अबाउट 500 एवरेज पीपल कम एवरीडे एंड व्हेन दे कम एंड दे सी दैट स्मॉल स्तूप देयर पगोडा देयर दे आर अट्रैक्टेड नॉट बिकॉज़ ऑफ़ दैट पगोड़ा दे हियर अबाउट विपसना एंड एटलीस्ट फोर और फाइव ऑफ देम रजिस्टर देमसेल्व्स फॉर द कोर्स हियर थाउजेंड्स ऑफ देम विल कम एवरीडे एंड ह्स ऑफ देम विल स्टार्ट प्रैक्टिसिंग हियर और इन देयर ओन कंट्री नाउ सेंटर्स आर एवरीवेयर एंड दे कीप ऑन ग्रोइंग पीपल गेट बेनिफिट एवरीवेयर दिस विल बी अ मैसेज ए गुड मैसेज फॉर द होल वर्ल्ड धम्मा इन इट्स परिटी दैट इज वेरीेंट दिस विल कीप ऑन रिमाइंडिंग दोज हु विल फॉलो विपसना इन फ्यूचर दिस विल कीप ऑन रिमाइंडिंग मेंटेन द परिटी ऑफ़ द टेक्निक वी सी नाउ इटसेल्फ विद इन दिस लास्ट 30 33 इयर्स सो मेनी ऑफ़ देम दे हैव टेकन वन कोर्स और टू कोर्स वंडरफुल इट गिव्स रिजल्ट यस इट गिव्स रिजल्ट दिस इज सो

Segment 8 (35:00 - 40:00)

साइंटिफिक रेशनल एक्सेप्टेबल टू एवरीबॉडी सो अडॉप दिस बट वी मस्ट अडॉप इट एंड पुट समथिंग ऑफ आवर ओन ट्रेडिशन आवर ओन सेक्ट अदर वाइज आवर पीपल फ्रॉम आवर सेक्ट विल रन अवे एंड आई वांट टू कीप दिस पीपल विद इन द माय ओन बाउंड्री सो एट समथिंग ऑफ़ माय ओन ट्रेडिशन माय ओन सेक्ट व्हाटएवर इज़ एडेड देयर इन ए फ्यू इयर्स टाइम दैट विल बिकम प्रडोमिनेंट एंड द परिटी ऑफ़ धम्मा विल गो अवे शील समाधि पन्या विल बी देर ओनली फॉर टॉक यस वी आल्सो गॉट शीला लुक आवर स्क्रिप्चर आल्सो गॉट समाधि आवर ट्रेडिशन आल्सो टॉक्स ऑफ़ पन्या नोबडी विल प्रैक्टिस बिकॉज़ दे विल प्रैक्टिस व्हाट एवर इज़ एडेड देयर सम फिलॉसफी ऑफ़ दिस ट्रेडिशन और दैट ट्रेडिशन सम राइट और रिचुअल दैट विल बिकम प्रडोमिनेंट दिस इज हाउ इट हैप इन दिस कंट्री एंड गॉट लॉस्ट व टू बी केयरफुल दिस पगोड़ा मस्ट बी मेंटेन विद द परिटी ऑफ़ द टेक्निक नथिंग शुड बी एडेड नथिंग शुड बी सबट्रैक्टेड दिस शुड नेवर बिकम ए कम्युनल टेंपल ए सेक्टेरियन टेंपल फॉर परफॉर्मिंग राइड्स रिचुअल्स सेरेमनीज़ एंड ऑल दैट नथिंग डूइंग पीपल टू कम हियर टेक प्रसेप्ट्स स्टार्ट प्रैक्टिसिंग आना पाना प्रैक्टिस विपसना प्यूरिफाई द माइंड जनरेट लव एंड कंपैशन दैट्स ऑल नथिंग टू बी एडेड नथिंग टू बी सब्ट्रैक्टेड देन फॉर सेंचुरीज दिस विल कंटिन्यू टू हेल्प पीपल आई वेरी मच विश व्हाइल आई एम हियर सो दैट आई कैन मेक स्ट्रांग रूल्स दैट दिस शुड नॉट बी मिसयज फॉर एनी अदर कम्युनल पर्पस दिस इज फॉर एवरीबडी नॉट फॉर ए पर्टिकुलर से दैट पॉइंट शुड बी वेरी क्लियर एंड हाउ टू रन इट इन फ्यूचर इवन इफ आई गो अवे सो व्हाट आई गॉट सो मेनी धम्मा सनंस एंड धम्मा डॉटर्स हु अंडरस्टैंड इट एंड दे विल मेंटेन इट आई अगेन वांट दैट यू हैव टू मेंटेन द परिटी ऑफ़ धम्मा डोंट गेट अट्रैक्टेड बाय दिस सेक्ट और दैट से दिस कम्युनिटी और दैट कम्युनिटी वी हैव नथिंग टू डू डिफरेंट विद डिफरेंट सेक्स ह्यूमन बीइंग इज़ ह्यूमन बीइंग विपसना इज़ ऑल ह्यूमन बीइंग्स इट कांट बी सेक्टेरियन द मोमेंट इट बिकम सेक्टेरियन इट इज़ नो मोर विपसना परिटी ऑफ़ धम्म इट इज फॉर ऑल ह्यूमन माइंड इज़ ह्यूमन माइंड हाउ टू प्यूरिफाई द माइंड एंड हाउ टू लिव ए पीसफुल एंड हार्मोनियस लाइफ फॉर दिस पर्पस वी पीपल थाउजेंड्स ऑफ़ पीपल सीट टुगेदर एंड मेडिटेट अगेन एंड अगेन दिस क्वेश्चन अराइज़ इफ दैट इज सो देन व्हाई दिस शेप ऑफ ए पगोडा यस आई अंडरस्टैंड सम मेड पर्सन माइट टेक इट एज अ कम्युनल सिग्नल एज इफ इट इज़ अ सेक्टेरियन थिंग ए पगोडा इज देयर नो द शेप ऑफ पगोडा इज आवर एक्सप्रेशन ऑफ फीलिंग ऑफ ग्रेटट्यूड इंडिया लॉस्ट दिस वंडरफुल टेक्निक विद इन 500 इयर्स ओनली महाराष्ट्र मेंट इट फॉरदर वन और 200 इयर्स एवरीवेयर टोटली लॉस्ट विद इन 500 इयर्स जस्ट बिकॉज़ पीपल स्टार्टेड एडिंग समथिंग एंड इट गॉट लॉस्ट द परिटी गॉट लॉस्ट अदर प्लेसेस आल्सो इट वेंट एंड गॉट लॉस्ट ओनली वन नेबरिंग कंट्री मेंटेन इट्स क्रिश्चियन परिटी दैट इज व्हाई वी गॉट इट वेरी फ्यू पीपल फ्रॉम टीचर टू पीपल जनरेशन टू जनरेशन सेंचुरी टुगेदर दे मेंटेंड इन अ स्प्रिस्टियन परिटी वी गॉट इट इन प्योर फॉर्म अगेन द कंट्री हैज़ द प्यरिटी हैज़ टू बी मेंटेंड ए फीलिंग ऑफ़ ग्रेटट्यूड टवर्ड्स द कंट्री व्हिच मेंटेन इट प्रिजर्व इट इन इट्स क्रिश्चियन परिटी एंड आल्सो ए फीलिंग ऑफ ग्रेटट्यूड टवर्ड्स द सेंटली पर्सन माय धम्म फादर सिया सियाजी उबा यू आर ऑल स्टूडेंट्स ऑफ सियाजी उबा नॉट माय स्टूडेंट फ्रॉम द डे आई केम टू दिस कंट्री एंड स्टार्टेड टीचिंग एवरी डे व्हेन आई गिव आनापाना और व्हेन आई गिव विपना आई से गुरुवर तेरी ओर से दे धर्म का दान गुरुवर तेरा प्रतिनिधि देऊं धर्म का दान। आई एम गिविंग दिस धम्मा टू द पीपल ऑन योर बिहाफ। आई एम जस्ट योर रिप्रेजेंटेटिव। तो एवरी स्टूडेंट अराउंड द वर्ल्ड इज स्टूडेंट ऑफ सियाजी उबा नॉट माय स्टूडेंट आई एम जस्ट रिप्रेजेंटेटिव

Segment 9 (40:00 - 44:00)

फीलिंग ऑफ ग्रेटट्यूड टू द सेंटली पर्सन हु वांटेड दिस वंडरफुल टेक्निक टू गो बैक टू द कंट्री ऑफ़ ओरिजिन हो लाइफ ही यूज़ टू से वी हैव टू पे बैक द डेट ऑफ़ ग्रेटट्यूड टू इंडिया सच इनवैलबल जल वी गोट फ्रॉम इंडिया टुडे इंडिया इज बैंकरप्ट सो फस दिस स्पिरिचुअलिटी कंसर्न बकरप्ट एंड दैट इज व्हाई सो मेनी रेशियल कम्युनल सेक्टेरियन राइट्स गोइंग ऑन देयर सो मच ब्लड शेयर गोइंग ऑन देयर इफ दे गेट दिस वंडरफुल टेक्निक द कंट्री विल बी सो पीसफुल एस इन द पास्ट द कंट्री विल बी एन आइडियल कंट्री एस इन द पास्ट सो ही हैड दैट पोलिशन हाउ दिस वंडरफुल टेक्निक टू गो बैक टू द कंट्री ऑफ़ ओरिजिन ही हिमसेल्फ कुड नॉट कम ही ट्रेंड ह धम्मासन एस मच एस ही कुड एंड इट केम हियर ऑल बिकॉज़ ऑफ़ दिस वन पर्सन इट गॉट एस्टब्लिश इन इंडिया इट्स गेटिंग एस्टब्लिश अराउंड द वर्ल्ड बिकॉज़ ऑफ़ दिस वन पर्सन बी अ फीलिंग ऑफ ग्रेट दिस स्तूपा विल बी अ सिंबल ऑफ आवर ग्रेटट्यूड व्हेन धम्मा वेंट फ्रॉम दिस कंट्री टू डिफरेंट कंट्रीज नेबरिंग कंट्रीज दे बिल्ड पगोडास एव्री पगोडा एट द शेप ऑफ द पगोडा ऑफ इंडिया एक्सेप्ट दे हैव गॉट सम डेकोरेशन डिफरेंट डेकोरेशन अदरवाइज द शेप इज़ द सेम जस्ट बिकॉज़ सेंचुरी टुगेदर द पीपल शुड रिमेंबर धम्मा केम फ्रॉम द कंट्री इंडिया नाउ पीपल ऑफ इंडिया पीपल ऑफ वर्ल्ड मस्ट रिमेंबर प्योर धम्मा केम फ्रॉम द नेबरिंग कंट्री मम्मा ए फीलिंग ऑफ ग्रेटट्यूड एंड दिस फीलिंग ऑफ़ ग्रेटट्यूड इज़ बाउंड टू कम इन द माइंड ऑफ़ एव्री विपशन स्टूडेंट हुवर हैज़ गॉट एनी बेनिफिट फ्रॉम विपना इज़ बाउंड टू फील ग्रेटफुल टुवर्ड्स दैट ग्रेट कंट्री ग्रेटफुल टवर्ड्स द ग्रेट सेंटली पर्सन मे धम्मा कंटिन्यू टू सर्व इन इट्स प्रिस्टियन परिटी नॉट ओनली दिस कंट्री बट द एंटायर वर्ल्ड देयर इज़ सफरिंग ऑल अराउंड मे देयर बी पीस एंड हार्मोनी इन द होल वर्ल्ड मे बी पना स्प्रेड नॉट टू इंक्रीस द नंबर ऑफ ए पर्टिकुलर कम्युनिटी अ पर्टिकुलर से बट टू मेक मोर एंड मोर पीपल हैप्पी पीसफुल हारमोनियस मे द होल वर्ल्ड कम आउट टू द डार्कनेस ऑफ द कम्युनल फ्रेंजेस कम आउट ऑफ द ब्लड शेड एंड स्टार्ट एंजॉयंग पीस एंड हार्मोनी मे धम्मा स्प्रेड मे ऑल बीइंग्स बी हैप्पी बी पीसफुल बिलीबेटेड स मंगलम भवत सब मंगलम भवत सर्व मंगलम सबका मंगल सबका मंगल हो रे तेरा मंगल तेरा मंगल हो रे

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